पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाई कोर्ट की फटकार, कहा-सरकार की मंशा ठीक नहीं
News In Short
- पंचायत-निकाय चुनाव टालने के सरकार की अर्जी पर हाई कोर्ट की फटकार।
- हाई कोर्ट ने चुनाव टालने संबंधी अर्जी पर अपना फैसला रखा सुरक्षित।
- कोर्ट ने गर्मी व बारिश की दलीलों को नकारा, कहा-राजस्थान का व्यक्ति जानता है उपाय।
- सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी का दिया हवाला, कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी।
- 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश की हुई अवहेलना, 18 मई को अवमानना पर सुनवाई
News In Detail
राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव टालने के सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला रिजर्व रख लिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बैंच ने तय समय पर चुनाव नहीं कराने को लेकर नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान बैंच ने मौखिक रुप से कहा कि सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है। हम पहले ही पर्याप्त समय दे चुके हैं। लेकिन सरकार इलेक्शन को होल्ड करती जा रही हैं। सरकार की ओर से एजी राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि निकाय चुनावों को लेकर वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर हाई कोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आ गए थे। जिसकी वजह से भी चुनाव में देरी हुई।
क्यों नहीं करवाए पंचायत चुनाव?
इस पर बैंच ने कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, आपने पंचायत के चुनाव क्यों नहीं करवाए ? इस पर एजी ने कहा कि ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व ) की रिपोर्ट नहीं आने कारण इलेक्शन नहीं करवा पा रहे हैं।
सरकार ने 9 मई 2025 को ही आयोग का गठन कर दिया था। लेकिन आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बार-बार समय की मांग की है, जिससे उसका कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया गया।
बैंच ने कहा कि ओबीसी आयोग कर क्या रहा है। वो हमारे सामने नहीं है वरना हम उसे भी निर्देश देते।
कोर्ट रूम में चली ऐसे बहस
एजी राजेन्द्र प्रसाद - राजस्थान का अधिकतर क्षेत्र रेगिस्तानी है, जून में हीटवेव चलती हैं ।
बैंच - यह कोई कारण नहीं है। राजस्थान का व्यक्ति प्रिवेंशन (उपाय) करना जानता है।
एजी राजेन्द्र प्रसाद - कैंडिडेट्स के लिए भी प्रचार करना मुश्किल होगा।
बैंच - उन्हें इसके लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
एजी राजेन्द्र प्रसाद - जुलाई में बरसात का सीजन शुरू हो जाएगा।
बैंच - राजस्थान में बरसात?
एडवोकेट पुनीत सिंघवी - सरकार की चुनाव कराने की मंशा ही नही है। प्रदेश में संविधानिक संकट खड़ा हो गया है। पंचायतों में प्रशासक और निकायों में अधिकारी काम संभाल रहे हैं।
एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा - साढ़े 11 हजार पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है।अब बढ़कर 14 हजार पंचायतें हो गई हैं। सरकार डेढ़ साल से चुनाव टाल रही हैं।
बैंच - जजमेंट रिजर्व
15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिए थे आदेश
हाई कोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश जताई थी सहमति
इस आदेश के खिलाफ अपीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के 15 अपैल तक चुनाव करवाने के आदेश से सहमति जताई थी। अदालती आदेश की पालना नहीं होने पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा ने अवमानना कार्रवाई शुरु करने के लिए याचिका दायर की है। इसके बाद ही सरकार और चुनाव आयोग ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव के लिए ओर समय देने की मांग की हैं। अवमानना याचिकाओं पर अदालत 18 मई को सुनवाई करेगी।
वन स्टेट वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा
सरकार की ओर से बताया गया कि सितंबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा। इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा।
प्रार्थना पत्र में सरकार ने कहा है कि अदालती आदेश की पालना के लिए हरसंभव प्रयास किया। लेकिन परिस्थितियां ऐसी हैं कि 15 अप्रैल तक चुनाव करवाना संभव नहीं है। सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूल, स्टाफ, ईवीएम सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर हाईकोर्ट से चुनाव आगे खिसकाने का अनुरोध किया है।
सरकार के समर्थन में है राज्य चुनाव आयोग
राज्य चुनाव आयोग ने भी हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव टालने का अनुरोध किया है। प्रार्थना पत्र में आयोग ने चुनाव की तिथियां बढ़ाने के सरकारी तर्कों का समर्थन करते हुए कहा है कि ओबीसी आरक्षण के निर्धारण से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है।
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