पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर 11 मई को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी, सरकार और चुनाव आयोग ने मांगा समय
News In Short
- पंचायत और निकाय चुनाव टालने पर हाईकोर्ट में 11 मई को सुनवाई होगी।
- सरकार ने चुनाव को दिसंबर से पहले कराना असंभव बताया, समय बढ़ाने की मांग की।
- राज्य चुनाव आयोग ने भी चुनाव टालने के सरकारी तर्कों का समर्थन किया।
- सरकार ने कहा, ओबीसी रिजर्वेशन के निर्धारण से पहले चुनाव कराना संभव नहीं।
- पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा की अवमानना याचिका पर 18 मई को सुनवाई।
News In Detail
राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव टालने के सरकार के प्रार्थना पत्र पर हाईकोर्ट में 11 मई को सुनवाई होगी। सरकार ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। इसके लिए सरकार ने हर महीने की स्थिति का हवाला देते हुए समय मांगा था।
हाईकोर्ट का 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में यह बताया गया कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं है। ऐसे में यह मामला अब हाईकोर्ट की सुनवाई में महत्वपूर्ण बन गया है, जो 11 मई को होगी।
राज्य चुनाव आयोग का समर्थन
राज्य चुनाव आयोग ने भी सरकार के तर्कों का समर्थन किया है और चुनाव टालने का अनुरोध किया है। आयोग ने कहा है कि ओबीसी रिजर्वेशन का निर्धारण किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। आयोग ने इसके साथ ही सम्भावित संसाधनों जैसे ईवीएम, स्कूल, और स्टाफ की उपलब्धता का भी हवाला दिया है।
वन स्टेट वन इलेक्शन को मिलेगा बल
सरकार ने यह भी कहा कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में, उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव कराना वन स्टेट वन इलेक्शन की धारणा को भी बल देगा।
अवमानना याचिका पर भी सुनवाई
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा की अवमानना याचिका पर भी हाईकोर्ट 18 मई को सुनवाई करेगा। इस याचिका में आरोप है कि राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट के आदेश की अवमानना की है।
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