8.32 करोड़ के 2.08 लाख ट्रामाडोल टैबलेट जब्त, राजस्थान-यूपी तक फैला था नेटवर्क

Jageshwar prasad | Jun 29, 2026, 20:36 IST
मेडिकल लाइसेंस की आड़ में 8 करोड़ की दवा तस्करी
गुजरात ATS ने ट्रामाडोल तस्करी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। राजस्थान के पाली के परेश पारसमल जैन को उदयपुर के गोगुंदा से गिरफ्तार किया। 8.32 करोड़ की 2.08 लाख गोलियां जब्त।

समझें क्या है पूरा मामला

  • गुजरात एटीएस ने 8.32 करोड़ की ट्रामाडोल तस्करी का किया भंडाफोड़, पाली का परेश जैन गिरफ्तार।
  • 2.08 लाख ट्रामाडोल टैबलेट जब्त, मई से 62 लाख से अधिक गोलियों की सप्लाई का खुलासा।
  • बस में न्यू महावीर मेडिकल के नाम से भेजी गई थी खेप, लग्जरी बस में मिली करोड़ों की गोलियां।
  • उदयपुर से गिरफ्तारी, पहले भी हरिद्वार-ठाणे में एनडीपीएस के मामलों में रहा आरोपी।
  • पाली के बाद उत्तर प्रदेश तक फैला था तस्करी का नेटवर्क, गुजरात एटीएस की गहन जांच जारी।

मुकेश सोनी @ पाली



गुजरात एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने ट्रामाडोल की अवैध तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। राजस्थान के पाली जिले के सादड़ी मूल निवासी परेश पारसमल जैन को उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।



उसके पास से 8 करोड़ 32 लाख रुपए मूल्य की 2,08,000 ट्रामाडोल टैबलेट जब्त की गई हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह मई 2026 से अब तक 25 खेपों में 62 लाख 54 हजार से अधिक गोलियां राजस्थान और उत्तरप्रदेश में सप्लाई कर चुका था।



बस में छिपाई दवाओं की खेप

25 जून 2026 को आरोपी ने गुजरात के अंकलेश्वर से एमआर ट्रेवल्स की लग्जरी बस के जरिए पाली के लिए ट्रामाडोल की खेप रवाना की। इसे न्यू महावीर मेडिकल के नाम से जारी टैक्स इनवॉइस में अन्य दवाओं के रूप में दर्शाया गया था ताकि किसी को शक न हो।



अहमदाबाद के शाहीबाग स्थित नमस्ते सर्कल पर एटीएस ने बस की तलाशी ली। छह बड़े कार्टन में 416 छोटे बॉक्स मिले। सभी बॉक्स पर Tramadol Hydrochloride IP Tablets 100 mg (Scovidol-100) अंकित था। कुल 4,160 स्ट्रिप में 2,08,000 टैबलेट बरामद हुईं।



भागा पर पकड़ा गया

कार्रवाई की भनक लगते ही परेश जैन राजस्थान की ओर भाग निकला। लेकिन गुजरात एटीएस की विशेष टीम ने लगातार पीछा किया और उसे उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।



मेडिकल लाइसेंस की आड़ में चला कारोबार

पूछताछ में सामने आया कि परेश जैन ने मई 2026 में मेडिकल स्टॉकिस्ट का लाइसेंस लिया था। लेकिन लाइसेंस मिलते ही उसने अधिकांश कारोबार ट्रामाडोल की अवैध खरीद-फरोख्त का शुरू कर दिया।



मई 2026 से अब तक वह 25 खेपों में 62 लाख 54 हजार से अधिक गोलियां राजस्थान और उत्तरप्रदेश में सप्लाई कर चुका था।



पहले भी पकड़ा जा चुका है

यह पहली बार नहीं है जब परेश जैन कानून की गिरफ्त में आया हो। साल 2026 में उत्तराखंड के हरिद्वार और महाराष्ट्र के ठाणे में कोडीन युक्त कफ सिरप के मामलों में भी उसे गिरफ्तार किया जा चुका था।



इसके अलावा गुजरात एटीएस द्वारा पिछले महीने वापी से 2.38 किलोग्राम एमडी (MD – Mephedrone) के साथ चार आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में भी उसकी संलिप्तता सामने आई है।



क्या है ट्रामाडोल?

ट्रामाडोल एक दर्द निवारक दवा है जो डॉक्टर के पर्चे पर मिलती है। लेकिन इसका दुरुपयोग नशे के रूप में होता है। यह एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act – Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत नियंत्रित पदार्थ है। बिना अनुमति इसकी बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री अपराध है।



पूरे नेटवर्क की जांच जारी

गुजरात एटीएस अब पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस तस्करी में और कितने लोग शामिल हैं और किन-किन राज्यों तक गोलियां पहुंचाई जा रही थीं।



FAQ

  1. ट्रामाडोल क्या है और इसकी तस्करी क्यों होती है?
    ट्रामाडोल एक दर्द निवारक दवा है जो डॉक्टर की पर्ची पर मिलती है। इसका नशे के रूप में दुरुपयोग होता है इसलिए यह NDPS Act के तहत नियंत्रित है। बिना अनुमति बड़े पैमाने पर इसकी खरीद-बिक्री अपराध है और भारी मुनाफे के कारण इसकी तस्करी होती है।

ये भी पढ़े:-

सोने की तस्करी में फंसी थाई महिला को राहत, हाई कोर्ट बोला-विदेशी नागरिक को भी सम्मान से जीने का हक



बच्चियों की तस्करी में लेडी डॉन गिरफ्तार, 3 करोड़ का बंगला और लग्जरी कारें जब्त



केंद्रीय मंत्री के सब्सिडी खुलासे पर घमासान, कांग्रेस बोली-इसकी निष्पक्ष जांच हो



लखनऊ में 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, दृष्टि और मदर्स कोचिंग सेंटर को नोटिस