प्रसूताओं के इलाज में लापरवाही नहीं, जोधपुर टीम ने पीबीएम को दी क्लीन चिट

Jageshwar prasad | Jun 11, 2026, 13:03 IST
पीबीएम हॉस्पिटल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में डॉक्टरों को क्लीन चिट
राजस्थान के पीबीएम हॉस्पिटल, बीकानेर में 5 प्रसूताओं की किडनी फेल मामले में जोधपुर की जांच टीम ने डॉक्टरों को क्लीन चिट दी। बाजार से खरीदे ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जांच ड्रग कंट्रोलर कर रहा है। रिपोर्ट 5 दिन में आने की संभावना है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पीबीएम हॉस्पिटल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में डॉक्टरों को क्लीन चिट।
  • जोधपुर से आई जांच टीम ने इलाज और डिलीवरी प्रक्रिया को सही माना, लापरवाही नहीं पाई।
  • अब ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जांच ड्रग कंट्रोलर विभाग कर रहा है, रिपोर्ट 5 दिन में आएगी।
  • 80 दवाएं नहीं अस्पताल में जिसमें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी शामिल, इसीलिए बाजार से खरीदे थे।
  • पांचों प्रसूताओं की हालत में सुधार है, एक महिला प्रीति की स्थिति अभी भी गंभीर है।

बीकानेर के प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल यानी PBM सरकारी हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 5 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। जोधपुर से आई 6 डॉक्टर्स की जांच टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है और इलाज में लापरवाही नहीं पाई है।



बाजार से खरीदकर प्रसूताओं को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जांच ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंटकर रहा है। इसकी रिपोर्ट करीब 5 दिन में आने की संभावना है। प्रीति नाम की एक मरीज की हालत अभी भी गंभीर है, बाकी चार की स्थिति में सुधार हो रहा है।



सिजेरियन के बाद एक-एक कर बिगड़ती गई हालत

PBM हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की किडनी अचानक फेल होने लगी। हालात इतने बिगड़े कि कई बार डायलिसिस करना पड़ी और सभी को आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करना पड़ा।



तारा देवी (27), शारदा (26), राहिला (19) और इमरती (20) की हालत में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। लेकिन प्रीति (20) की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।



जोधपुर टीम ने दी डॉक्टर्स को क्लीन चिट

राज्य सरकार ने जोधपुर मेडिकल कॉलेज के 6 डॉक्टर्स की एक जांच टीम बीकानेर भेजी थी। इसमें माइक्रोबायोलॉजिस्ट, फिजिशियन, नेफ्रोलॉजिस्ट और गायनी डॉक्टर शामिल थे। टीम ने आईसीयू में प्रसूताओं से बातचीत की। ओटी, आईसीयू और वार्ड का निरीक्षण किया। अब तक दिए गए इलाज की पूरी जानकारी ली।



टीम को इलाज में कोई लापरवाही नहीं मिली। PBM हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. बीसी घीया ने बताया कि टीम ने डिलीवरी और इलाज की पूरी प्रक्रिया को सही माना है। टीम बुधवार को जांच पूरी कर जोधपुर लौट गई।



असली सवाल: ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में क्या था?

जांच टीम ने साफ किया कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को बाजार से मंगवाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए गए थे। और इन्हीं इंजेक्शन के लगने के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ती गई।



इन इंजेक्शन के बैच की टेस्टिंग को लेकर अब ड्रग कंट्रोलर विभाग जांच कर रहा है। निर्माता कंपनी से पूरी जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट करीब 5 दिन में आने की संभावना है।



4 रुपए का इंजेक्शन, 18 में खरीदा

इस पूरे मामले में एक और गंभीर बात सामने आई है। हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर्स के अनुसार पिछले 6 महीनों में करीब 25 हजार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के वायल (Vial) स्थानीय बाजार से खरीदे गए।



सरकारी खरीद में यही इंजेक्शन 4 से 5 रुपए प्रति इंजेक्शन की दर से मिलता है। लेकिन बाजार से इन्हें 18 रुपए में खरीदा गया। यानी सरकारी दर से 3 से 4 गुना महंगा।



यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत मिलने वाली 80 तरह की दवाइयों की सप्लाई ठप हो गई है। PBM हॉस्पिटल के साथ-साथ बीकानेर जिले के सभी पीएचसी (PHC), सीएचसी (CHC) और सैटेलाइट हॉस्पिटल भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं।



कोटा का साया बीकानेर पर भी?

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब कोटा की घटना से जोड़कर देखा जाए। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की मौत हुई थी। वहां आधिकारिक जांच रिपोर्ट में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन फेल हो गया था। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में दवा की जगह सिर्फ पानी भरा था।



ऑक्सीटोसिन वह जीवनरक्षक दवा है जो प्रसव के बाद होने वाले भारी रक्तस्राव को रोकती है। इंजेक्शन में पानी होने से महिलाओं की ब्लीडिंग नहीं रुकी और उनकी जान चली गई। बीकानेर में भी बाजार से खरीदे गए इंजेक्शन पर सवाल उठना इसी डर को बढ़ाता है।



अंतिम फैसला अभी बाकी

PBM हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट डॉ. घीया ने कहा कि अभी तक हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से कोई लापरवाही सामने नहीं आई है। लेकिन मामले में अंतिम फैसला दोनों जांच टीमों की रिपोर्ट के बाद ही राज्य सरकार करेगी। इसमें 4 से 5 दिन और लग सकते हैं।



FAQ

  1. कोटा और बीकानेर के ऑक्सीटोसिन मामले में क्या फर्क है?
    कोटा में आधिकारिक जांच में साबित हो गया था कि इंजेक्शन में दवा की जगह पानी था जिससे 5 मांओं की मौत हुई। बीकानेर में अभी जांच जारी है और 5 प्रसूताओं की किडनी फेल हुई है लेकिन सभी जीवित हैं। ड्रग कंट्रोलर की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इंजेक्शन में क्या खामी थी।

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