पेट्रोल-डीजल पर सीलिंग की आहट; राजस्थान में अब पंपों पर तेल मिलने की सीमा तय

Jageshwar prasad | May 15, 2026, 10:50 IST
Photograph: (THE SOOTR)
प्रधानमंत्री की अपील के बाद तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सीलिंग लगानी शुरू कर दी है। पंपों पर अब अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल देने के निर्देश दिए गए हैं।

News In Short

  • तेल कंपनियों ने पेट्रोल के लिए 50 लीटर और डीजल के लिए 200 लीटर की सीमा तय की।
  • कंपनियों का दावा है कि बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई, जिससे अवैध भंडारण की आशंका।
  • बोतल, डिब्बों और ड्रम में लूज (खुला) तेल देने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
  • डीलर एसोसिएशन का कहना है कि लिखित आदेश के बिना यह पाबंदी मनमानी।
  • सप्लाई कम होने से कई पंप ड्राई हो रहे हैं, जिससे संचालकों पर कानूनी कार्रवाई का खतरा।

News In Detail

राजस्थान के पेट्रोल पंपों पर आने वाले दिनों में ग्राहकों को अपनी मर्जी के अनुसार ईंधन मिलने में दिक्कत हो सकती है। प्रधानमंत्री की संयम बरतने की अपील के बीच देश की तीनों बड़ी तेल कंपनियों ने राज्य में पेट्रोल-डीजल पर सीलिंग लागू करना शुरू कर दिया है।



कंपनियों ने डीलर्स को संदेश भेजा है कि अब एक बार में अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल ही दिया जाए। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक या लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।



अप्रत्याशित बिक्री और अवैध भंडारण

तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशक मनोज गुप्ता के अनुसार, पिछले कुछ समय में पेट्रोल-डीजल की मांग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनियों को अंदेशा है कि लोग भविष्य में किल्लत की आशंका या कीमतों के डर से भारी मात्रा में तेल का अवैध भंडारण कर रहे हैं।



गुप्ता का कहना है कि 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल एक सामान्य वाहन के लिए पर्याप्त और आदर्श मात्रा है। इससे अधिक की मांग संदिग्ध मानी जा रही है।



बोतल और ड्रम में तेल बंद

सप्लाई चेन को बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से अब ईंधन केवल वाहनों की टंकी में ही भरा जा रहा है। यदि कार की टंकी 50 लीटर की है, तो उसे पूरा भरा जाएगा, लेकिन उससे अधिक की अनुमति नहीं होगी। बोतलों या डिब्बों में पेट्रोल ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ड्रम या बैरल में डीजल देने पर रोक से किसान और निर्माण कंपनियां परेशान हैं, जो थोक में ईंधन ले जाते थे।



विवाद और कानूनी कार्रवाई

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के संरक्षक सुनीत बगई ने इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने तेल कंपनियों को पत्र लिखकर कहा है कि बिना लिखित गाइडलाइन के इन पाबंदियों को लागू करना मुश्किल है। पंप कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच तेल की मात्रा को लेकर झगड़े होने की आशंका है।



पेट्रोल पंप आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आते हैं। अगर कंपनियों से सप्लाई कम होने के कारण पंप खाली होता है, तो प्रशासन डीलर पर ही कार्रवाई करता है। डीलर्स का कहना है कि अगर सप्लाई की कमी से कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो इसकी जिम्मेदारी तेल कंपनियों की होनी चाहिए।



फिलहाल स्थिति यह है कि डिपो से पंपों को मिलने वाली सप्लाई में कटौती की जा रही है। डीलर्स संगठन ने मांग की है कि कंपनियां जनता के बीच स्पष्टीकरण जारी करें और पाबंदियों के लिखित आदेश दें।



अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की राशनिंग शुरू हो गई है?

आधिकारिक तौर पर राशनिंग के आदेश नहीं हैं, लेकिन तेल कंपनियों ने डीलर्स को मौखिक रूप से पेट्रोल के लिए 50 लीटर और डीजल के लिए 200 लीटर की सीमा बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।



क्या मैं बोतल या डिब्बे में पेट्रोल ले जा सकता हूं?

नहीं, नए सुरक्षा नियमों और सप्लाई नियंत्रण के तहत अब बोतलों, डिब्बों या ड्रम में खुला पेट्रोल या डीजल देने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।



इस पाबंदी का सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?

इसका सबसे ज्यादा असर उन किसानों, छोटे उद्योगों और निर्माण कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी मशीनरी के लिए ड्रम या बैरल में थोक डीजल ले जाते थे। अब केवल गाड़ियों की टंकी में ही तेल भरा जा रहा है।



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