राजस्थान PHED ठेकेदारों की हड़ताल, बकाया भुगतान न मिलने पर 9 सितंबर से जलापूर्ति ठप

Mukesh Sharma | Sept 08, 2026, 19:32 IST
PHED ठेकेदारों का अल्टीमेटम: 9 सितंबर से पानी बंद
राजस्थान में पीएचईडी ठेकेदारों ने 2,500 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान और जेजेएम बिल क्लीयरेंस की मांग को लेकर 9 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से जलापूर्ति ठप करने और 12 सितंबर से पूर्ण काम बंद का ऐलान किया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बकाया राशि,2,500 करोड़ रुपए का बकाया और 1,000 करोड़ की जीएसटी अंतर राशि अटकी।
  • अधूरी सहमति,जलदाय मंत्री और वित्त सचिव से लिखित समझौते के बाद भी नहीं हुआ भुगतान।
  • आर्थिक संकट,कर्ज और एनपीए (NPA) के दबाव में ठेकेदार दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे।
  • कार्य बहिष्कार, 9 से 11 सितंबर तक सांकेतिक और 12 सितंबर से जलापूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी।

राजस्थान में पीएचईडी में काम करने वाले ठेकेदारों ने बिलों का भुगतान नहीं मिलने के विरोध में 9 सितंबर से 11 सितंबर तक चरणबद्ध तरीके से और 12 सितंबर से पूरी तरह जलापूर्ति सहित सभी प्रकार के काम पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।



2500 करोड़ का है बकाया

संघर्ष समिति के हरिराम गोदारा ने बताया कि उन्हें पिछले तीन साल से उनके किए गए कार्यों का पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है। अप्रेल 2024 से विभाग थोड़ा-थोड़ा भुगतान करता है लेकिन,उससे काम नहीं चल रहा। जबकि राज्य में अलग-अलग काम करने वाले ठेकेदारों का करीब ढाई हजार करोड़ रुपए का भुगतान बकाया चल रहा है।



इसके अतिरिक्त सरकार के पास ठेकेदारों का एक हजार करोड़ रुपए का अंतर राशि की जीएसटी जमा है। जबकि ठेकेदारों को जीएसटी समय पर जमा करवानी होती है। ठेकेदार अपनी जेब से टैक्स जमा करवा रहा है और सरकार उसे भुगतान नहीं कर रही है।



समझौते से पीछे हटी सरकार

गोदारा ने बताया कि समय पर भुगतान नहीं मिलने पर ठेकेदारों ने अप्रेल में 10 दिन तक धरना दिया था। 22 अप्रेल को जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के साथ मई के अंत तक सभी भुगतान करने का समझौता हुआ था। लेकिन जून तक भी भुगतान नहीं हुआ।



उन्होंने बताया कि इसके बाद तत्कालीन वित्त सचिव के चैंबर में विभागीय अधिकारियों के उपस्थिति में 15 जुलाई तक बकाया भुगतान करने का लिखित में समझौता हुआ था। इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं हुए हैं।



बैंक भी कर्जा नहीं दे रहे

गोदारा ने बताया कि PHEDमें करीब-करीब सभी काम ठेके पर करवाए जाते हैं। इसके लिए ठेकेदार को अपने कर्मचारियों का वेतन, मजदूरों की मजदूरी के साथ ही मशीनरी आदि का किराया तथा ऑफिस के खर्चे निरंतर व समय पर देने होते हैं। छोटे से लेकर बड़ी-बड़ी फर्म तक काम करने के लिए बैंकों से कर्जा लेते हैं।



समय पर कर्जा नहीं चुकाने के कारण आज स्थिति यह है कि बैंक भी अब कर्जा नहीं दे रहे हैं उल्टे कई बड़ी फर्मों के सामने एनपीए होने के हालात हो चुके हैं तो कई ठेकेदार दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।



जेजेएम के बिल 5-6 साल से फाईनल नहीं

गोदारा ने बताया कि जल जीवन मिशन योजना के बिल तो पिछले करीब 5-6 साल से फाईनल नहीं हो रहे हैं। विभाग जेजेएम घोटाले के नाम पर बिल फाईनल नहीं कर रहे हैं। जबकि योजना में जो घोटाला हुआ उसके आरोपी पकड़े जा चुके हैं तथा चार्जशीट भी पेश हो चुकी है। लेकिन,भुगतान बाकी ठेकेदारों के रोके हुए हैं।



9 सितंबर से बंद होगी जलआपूर्ति

गोदारा ने बताया कि विरोधस्वरुप एसोसिएशन ने निर्णय किया है कि 9 सितंबर से चरणबद्ध तरीके जलापूर्ति बंद करेंगे। उन्होंने बताया कि 9 सितंबर को सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक,10 सितंबर को सुबह 11 से शाम 5 बजे तक,11 सितंबर को सुबह 11 से रात 11 बजे तक और 12 सितंबर से जलापूर्ति सहित सभी प्रकार के काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।



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