PM आवास योजना में 2.83 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपी को हाईकोर्ट से राहत, निलंबन पर रोक
टिंडल का तर्क था कि उनकी नियुक्ति नगर पालिका बोर्ड के जरिए हुई थी, इसलिए उन्हें निलंबित करने का अधिकार अधिशासी अधिकारी के पास नहीं था।हालांकि, हाईकोर्ट से मिली राहत का मतलब यह नहीं है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप खत्म हो गए हैं।
84 लाख रुपए के भुगतान पर उठा था विवाद
मामले में सुरेंद्र सिंह टिंडल प्रधानमंत्री आवास योजना शाखा का काम संभाल रहे थे। आरोप है कि 25 जून 2026 को 84 लाख रुपए के बिल भुगतान के लिए पारित किए गए। बाद में नगर पालिका को इन बिलों में गड़बड़ी का पता चला। इसके बाद 1 जुलाई को इन बिलों को निरस्त कराने के लिए जयपुर स्थित रूडिसको को पत्र तैयार किया गया।
यह पत्र ई-मेल से भेजने की जिम्मेदारी टिंडल को दी गई थी, लेकिन ई-मेल नहीं भेजा गया। इसके बाद अधिकारियों ने 6 जुलाई को खुद ई-मेल भेजा। हालांकि, तब तक 8 जुलाई को सरकारी खाते से 84 लाख रुपए कथित तौर पर गलत खातों में ट्रांसफर हो चुके थे।
84 लाख लौटाए, लेकिन पूरी रकम का हिसाब बाकी
मामला सामने आने के बाद नगर पालिका ने 10 जुलाई को कार्रवाई की। इसके बाद टिंडल ने 22 जुलाई 2026 को 84 लाख रुपए नगर पालिका के बैंक खाते में वापस जमा करा दिए। लेकिन जांच यहीं खत्म नहीं हुई।
नगर पालिका की जांच कमेटी ने ऑनलाइन भुगतान पोर्टल के रिकॉर्ड खंगाले। नवंबर 2025 से जून 2026 के बीच कुल 49 बिलों की जांच की गई। जांच में सामने आया की इन बिलों के जरिए 2 करोड़ 83 लाख 80 हजार रुपए ऐसे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाए गए, जिन्हें भुगतान का पात्र नहीं माना गया।
84 लाख रुपए वापस जमा होने के बाद भी 1 करोड़ 99 लाख 80 हजार रुपए की राशि बकाया बताई गई है। नगर पालिका प्रशासन ने इस मामले में पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग भी की थी। अक्टूबर में सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।
नियुक्ति बोर्ड ने की, निलंबन का अधिकार किसे?
हाईकोर्ट में टिंडल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता परमेंद्र बोहरा ने दलील दी कि उनकी नियुक्ति नगर पालिका बोर्ड के माध्यम से हुई थी। ऐसे में उनके खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई करने से पहले बोर्ड की बैठक और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी था।
अधिवक्ता का कहना था कि अधिशासी अधिकारी नियुक्ति प्राधिकारी नहीं हैं। इसलिए वे अपने स्तर पर निलंबन का आदेश जारी नहीं कर सकते। इसी आधार पर निलंबन आदेश को चुनौती दी गई। अदालत ने इस दलील पर निलंबन आदेश पर रोक लगा दी।
आरोपों की जांच पर नहीं पड़ेगा अपने आप असर
इस मामले में दो पहलू अहम हैं। पहला, निलंबन आदेश जारी करने की वैधानिक प्रक्रिया। दूसरा, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि के कथित गलत भुगतान का मामला। हाईकोर्ट से निलंबन पर मिली अंतरिम राहत को आरोपों से क्लीन चिट नहीं माना जा सकता। जांच में सामने आए तथ्यों और रकम की वसूली का मामला अलग से तय होगा। अब मामले में हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।