पीएमओ की फटकार के बाद भी मिलता रहा पूर्व एफएसएल निदेशक को अभयदान, जानिए पूरा मामला

Mukesh Sharma | Apr 27, 2026, 16:30 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान एफएसएल के पूर्व निदेशक डॉ. अजय शर्मा को पीएमओ की सख्ती के बाद भी महीनों तक अभयदान मिलता रहा। उच्च अधिकारियों के संरक्षण के कारण एसीबी की जांच को लटकाए रखा।

News In Short

  • पीएमओ की सख्ती के बाद भी पूर्व एफएसएल निदेशक को महीनों तक मिलता रहा अभयदान।
  • एसीबी की पुष्टि और 20 रिमाइंडर के बाद भी धारा 17-A की अनुमति में देरी।
  • डीएनए किट घोटाले के साथ-साथ संगीन रेप केस की रिपोर्ट में हेरफेर के गंभीर आरोप।
  • जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप, गृह विभाग उसी को भेज रहा था शिकायतें

News In Detail

राजस्थान सरकार ने अंतत: पूर्व एफएसएल निदेशक अजय शर्मा व तीन अन्य अफसरों के विरुद्ध एसीबी (ACB) को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा—17 (ए) के तहत जांच करने की इजाजत दे दी है। इन अफसरों पर डीएनएन जांच किट खरीद में गड़बड़ियां करने के आरोप हैं।



राज्य सरकार ने 13 अप्रेल को एफएसएल निदेशक डॉ. अजय शर्मा, सिरोलॉजी डीएनए विभाग के सहायक निदेशक डॉ. आनंद कुमार, सहायक निदेशक डॉ. भावना पूनिया और सिरोलॉजी सेक्शन के सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. रामकिशन कुमावत को एपीओ कर दिया था।



बचा कौन रहा था पूर्व निदेशक को?

इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एफएसएल स्टॉफ ने एक शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन पोर्टल पर भेजी थी। पीएमओ ने 25 जुलाई, 2025 को इस शिकायत को राजस्थान के मुख्य सचिव भेजकर एक्शन करने को कहा था। पीएमओ का यह पत्र गृह विभाग से घूमता हुआ 12 दिसंबर,2025 को एफएसएसल निदेशक के पास ही पहुंच गया था।



ऐसे में सवाल उठता है कि पीएमओ से शिकायती पत्र मिलने के बाद भी अजय शर्मा को कौन लोग बचाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्य सचिव और एसीएस गृह को डॉ. अजय शर्मा के कारनामों की जानकारी पहले से ही थी।



सूत्रों के अनुसार एफएसएल अधिकारी डॉ.रमेश चौधरी मई 2024 में ही मुख्य सचिव को डीएनए किट की खरीद में घोटाले की शिकायत और 20 रिमाइंडर दे चुके थे। लेकिन, गृह विभाग के उच्च अधिकारियों से मिलीभगत के कारण डॉ. शर्मा को हटाने और उनके खिलाफ जांच की मंजूरी देने में समय लग गया।



एसीबी मान चुकी थी दोषी

डॉ.अजय शर्मा व अन्य के खिलाफ डीएनए जांच किट खरीद में भ्रष्टाचार की शिकायत पर एसीबी ने प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी मानी थी। इस आधार पर एसीबी ने डॉ.अजय शर्मा, सिरोलॉजी डीएनए विभाग के सहायक निदेशक डॉ. आनंद कुमार, सहायक निदेशक डॉ. भावना पूनिया और सिरोलॉजी सेक्शन के सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. रामकिशन कुमावत आदि के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा—11—ए के तहत जांच करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन,सरकार ने यह मंजूरी देने में ही करीब तीन महीने लगा दिए।



पीएमओ को भेजी शिकायत में ये भी लगाए आरोप

  • एफएसएल स्टॉफ की पीएमओ को भेजी शिकायत में डीएनए किट खरीद के अतिरिक्त और भी कई मामलों में गड़बडियों की जानकारी दी है।
  • एएओ अशोक कुमार चंदोलिया को एक इन्टर्न लड़की से छेड़छाड़ का दोषी होने के बावजूद बचाया। क्योंकि चंदोलिया ही डॉ. अजय शर्मा को खरीद व अन्य कार्यों में कमीशन लेने में सहयोग करता था।
  • निजी फर्म महिमा हॉलिडे ट्यूर व ट्रेवल्स से वाहन किराए पर लिए और इन वाहनों को सरकारी ड्राइवरों से चलवाया। लेकिन फर्म को ड्राईवर का भुगतान भी दिया। गृह विभाग की जांच में यह मामला साबित पाया गया था। लेकिन,अजय शर्मा ने अपने प्रभाव से कुछ नहीं होने दिया।
  • अजय शर्मा पर रेप जैसे केस में गलत डीएनए रिपोर्ट देने के भी आरोप थे। आरोप है कि शर्मा ने एक ही व्यक्ति के डीएनए प्रोफाइल को अलग - अलग जिलों में चल रहे रेप केस में पेश करवा दिया। इस कारण रेप के कई आरोपियों के बचने की संभावना हो गई।
  • अजय शर्मा पर एफएसएल लैब के उपकरण खरीद में गड़बड़ी करने सहित अपने चहेते अधिकारियों को मनमाफिक पोस्टिंग देकर मनचाहा काम करवाने के कई मामले हैं।
  • अजय शर्मा पर भर्ती नियमों के तहत आवश्यक डिग्री नहीं होने के बावजूद आरपीएससी में धांधली के चलते निदेशक पद पर पहुंचने के भी आरोप हैं।


लगातार हो रही थी लीपापोती

इस मामले का गंभीर पहलू यह है कि डॉ. अजय शर्मा के खिलाफ होने ​वाली शिकायतों को गृह विभाग वापस उन्हीं के पास भेज देता था। इसलिए लंबे समय तक शिकायतों पर लीपापोती होती रही और महंगे दामों पर डीएनए किट की खरीद नहीं रुकी। डॉ. शर्मा के खिलाफ दो साल से शिकायत होती रही। लेकिन, लगातार लीपापोती होती रही।



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