बॉर्डर पर आईएसआई जासूस झबराराम गिरफ्तार, इस तरह दे रहा था खुफिया जानकारी

Purshottam Kumar Joshi | Jan 31, 2026, 17:45 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान पुलिस ने पोकरण में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले झबराराम को गिरफ्तार किया। इस पर संवेदनशील सैन्य जानकारी लीक करने का आरोप है। झबराराम से पूछताछ की जा रही है।

News in Short

जैसलमेर के पोकरण में ISI जासूसी मामले में झबराराम गिरफ्तार।



आरोपी ने भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेजी।



हनीट्रैप और वित्तीय प्रलोभन से जासूसी नेटवर्क में फंसा।



आरोपी के डिजिटल उपकरणों से पाया पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क।



राजस्थान पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर किया नेटवर्क का पर्दाफाश।



News in Detail

राजस्थान पुलिस ने सीमावर्ती इलाके पोकरण से पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान झबराराम के रूप में हुई है, जो पोकरण के नेदान गांव का निवासी है। उसे भारतीय सेना की सामरिक जानकारी पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के हैंडलर्स तक पहुंचाने का आरोप है। इस गिरफ्तारी ने यह साबित किया कि सीमा क्षेत्रों में पाकिस्तान की खुफिया गतिविधियां अब भी सक्रिय हैं।



झबराराम पर आईएसआई को सूचना देने का आरोप

झबराराम पोकरण का स्थानीय निवासी है। उस पर आरोप है कि उसने सेना की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को दी। हनीट्रैप और वित्तीय प्रलोभन के माध्यम से उसे जासूसी में शामिल किया गया। जांच में उसके मोबाइल से पाकिस्तानी हैंडलर्स से चैट और अन्य अहम डिजिटल सबूत मिले हैं। गिरफ्तारी के बाद उसकी गहन पूछताछ जारी है, जिससे इस जासूसी नेटवर्क के कनेक्शंस का पता लगाया जा रहा है।



खुफिया गतिविधियों से उजागर हुई जासूसी नेटवर्क की जानकारी

राजस्थान पुलिस की खुफिया शाखा ने पहले से ही जासूसी गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए तकनीकी और मानव खुफिया स्रोतों का इस्तेमाल किया था। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (खुफिया) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि इस ऑपरेशन के तहत संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया गया और आरोपी की पहचान की गई। इसके बाद तकनीकी और डिजिटल निगरानी का एक समन्वित प्रयास किया गया, जिससे आरोपी को गिरफ्तार किया जा सका।



हनीट्रैप और वित्तीय प्रलोभन से जुड़ा जासूसी नेटवर्क

जांच में यह सामने आया कि पाकिस्तानी एजेंट्स ने झबराराम को हनीट्रैप और वित्तीय प्रलोभन के जरिए जासूसी नेटवर्क में शामिल किया था। आरोपी ने भारतीय सेना की तैनाती, मूवमेंट्स और अन्य सैन्य जानकारियाँ साझा की। इसके अलावा, उसे व्हाट्सऐप पर पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क करने के लिए ओटीपी भी भेजने को कहा गया था। यह डिजिटल संचार चैनल पाकिस्तानी जासूसी एजेंट्स के लिए महत्वपूर्ण था।



फोरेंसिक जांच से जासूसी के स्तर का खुलासा

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसकी मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की फोरेंसिक जांच की गई। जांच में कई एन्क्रिप्टेड संदेश, सोशल मीडिया संचार और गुप्त डेटा आदान-प्रदान के प्रमाण मिले। इससे यह स्पष्ट हुआ कि जासूसी की गतिविधियाँ एक पेशेवर और योजनाबद्ध तरीके से चल रही थीं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट्स भारतीय सेना की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे थे।



सैन्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ संयुक्त पूछताछ

आईएसआई एजेंटझबराराम को जयपुर स्थित सेंट्रल इंटरोगेशन सेंटर लाया गया, जहां उसकी संयुक्त पूछताछ की गई। राजस्थान पुलिस खुफिया, मिलिट्री इंटेलिजेंस और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां मिलकर जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूछताछ का उद्देश्य जासूसी नेटवर्क के विस्तृत संपर्कों को पहचानना और संवेदनशील जानकारी की लीक का पूरी तरह से आकलन करना है।



जासूसी के खिलाफ सतर्कता को बढ़ाना

पोकरण में झबराराम की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि सीमा क्षेत्रों में जासूसी और खुफिया गतिविधियाँ लगातार जारी हैं। यह घटना पुलिसिंग और केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से सुरक्षा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस गिरफ्तारी ने यह भी दिखाया कि भारत की सीमा सुरक्षा के लिए सतर्कता और समन्वय कितना महत्वपूर्ण है।



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