पुलिस की नौकरी छोड़ चपरासी बनने चले 24 पुलिस कांस्टेबल, लंबी ड्यूटी से हैं परेशान
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में 24 कांस्टेबल छोड़ेंगे पुलिस की नौकरी, बनेंगे चपरासी।
- 53,749 पदों की भर्ती में स्वास्थ्य विभाग में हुआ है चयन।
- लंबी ड्यूटी, तनाव और दूर पोस्टिंग से परेशान पुलिसकर्मियों ने दिया इस्तीफा।
- रेलवे, BSF, CRPF और आयकर विभाग के कर्मचारी भी चपरासी पद पर चयनित।
- इस्तीफा मंजूर नहीं होने पर जॉइनिंग की तारीख बढ़ाकर 23 नवंबर की गई।
पुलिस की वर्दी पहनना कभी कई युवाओं का सपना होता था। लेकिन अब कुछ कांस्टेबल यह नौकरी छोड़कर चपरासी बनना चाहते हैं। वजह है लंबी ड्यूटी, ज्यादा तनाव और घर से दूर पोस्टिंग। ऐसे 24 कांस्टेबल अब स्वास्थ्य विभाग में जॉइन करने की तैयारी में हैं।
प्रदेश में चपरासी के 53,749 पदों पर भर्ती हुई थी। इनमें 7903 पद स्वास्थ्य विभाग के थे। स्वास्थ्य विभाग में चयनित 24 कर्मी पुलिस में कांस्टेबल हैं। इन्होंने चपरासी बनने के लिए पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी न होने से इन्हें 23 नवंबर तक जॉइनिंग का समय मिला है।
53,749 पदों पर हुई थी भर्ती
हाल ही में प्रदेश में चपरासी के 53,749 पदों पर भर्ती हुई थी। इनमें से 7903 पद स्वास्थ्य विभाग में थे। इन पदों पर चयनित 24 लोग पुलिस में सिपाही के तौर पर काम कर रहे हैं।
इन सभी ने चपरासी पद पर जॉइन करने के लिए इस्तीफा दे दिया है। इन्हें सीएमएचओ ऑफिस में नियुक्ति मिली है। कुछ को बीसीएमओ ऑफिस में लगाया गया है। बाकी की पोस्टिंग सीएचसी और पीएचसी में हुई है।
दूसरे विभागों के कर्मचारी भी
चपरासी बनने वालों में सिर्फ पुलिसकर्मी ही नहीं हैं। इनमें रेलवे ग्रुप-डी के 11 कर्मचारी भी शामिल हैं। बीएसएफ (BSF – Border Security Force) का एक कांस्टेबल भी इसमें है। सीआरपीएफ (CRPF – Central Reserve Police Force) का एक कांस्टेबल भी चपरासी बनेगा। आयकर विभाग का एक एमटीएस भी इस सूची में है।
इन सभी का मानना है कि इस नौकरी में घर के पास तैनाती मिल सकेगी। साथ ही काम का तनाव भी कम होगा।
इस्तीफा अटका, बढ़ी मोहलत
पुलिस विभाग में इस्तीफे की औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इसलिए इन अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य विभाग से समय मांगा। उन्होंने कार्यग्रहण की अवधि बढ़ाने का आवेदन दिया। विभाग ने इन्हें 23 नवंबर तक जॉइन करने का समय दिया है।
ब्यावर के दो कांस्टेबल
जयसिंह मीना ब्यावर पुलिस में कांस्टेबल हैं। चपरासी पद पर चयन के बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग मिला। विभाग ने 10 अगस्त को उनकी पोस्टिंग जहाजपुर एसडीएच में की। जहाजपुर भीलवाड़ा जिले में है। जयसिंह ने इस्तीफा दे दिया है, जो अभी स्वीकार नहीं हुआ। उन्हें जॉइनिंग के लिए दो महीने का समय मिला है।
ब्यावर पुलिस के कांस्टेबल राकेश माली को भी स्वास्थ्य विभाग मिला है। उनकी पोस्टिंग अजमेर की मेहरू कलां पीएचसी में हुई है। राकेश ने भी इस्तीफा सौंपा है, जो अभी मंजूर नहीं हुआ। उन्हें भी कार्यग्रहण के लिए दो महीने मिले हैं।
कोटा के तेजराज सिंह
तेजराज सिंह कोटा पुलिस में कांस्टेबल हैं। चपरासी पद पर चयन के बाद उन्हें भी स्वास्थ्य विभाग मिला। उनकी पोस्टिंग कोटा के इटावा इलाके में हुई है। वे ढिपरी चंबल पीएचसी में तैनात होंगे। उनका इस्तीफा भी अभी स्वीकार नहीं हुआ है।
24 घंटे ड्यूटी का दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक पुलिस में ड्यूटी का समय तय नहीं होता। कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर लंबी ड्यूटी करनी पड़ती है। वीआईपी मूवमेंट पर भी यही हाल रहता है। अपराध की घटना होने पर 16 से 24 घंटे तक तैनात रहना पड़ता है।
इसके उलट स्वास्थ्य विभाग में ड्यूटी के घंटे तय हैं। पुलिस में नाइट ड्यूटी आम है। त्योहारों पर छुट्टी मिलने में भी परेशानी होती है। इससे निजी और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ता है।
वेतन में मामूली फर्क
वेतन आयोग के मुताबिक दोनों पदों की ग्रेड पे में सिर्फ 700 रुपए का अंतर है। यानी चपरासी बनने पर वेतन में ज्यादा नुकसान नहीं है।
घर के पास पोस्टिंग
स्वास्थ्य विभाग में ब्लॉक, सीएचसी और पीएचसी स्तर पर पोस्टिंग मिलती है। इससे कर्मचारी अपने गृह जिले या गांव के पास रह सकते हैं। पुलिस में दूरदराज जिलों और थानों में तैनाती आम बात है। यही वजह है कि कई कर्मचारी अब सुकून वाली नौकरी को तरजीह दे रहे हैं।