पुलिस अब रिक्रूटर और सरगना तक पहुंचेगी; साइबर अपराधों पर लगाम लगाने की नई रणनीति
समझें क्या है पूरा मामला
- म्यूल अकाउंट यानी किराए के बैंक खातों पर पुलिस की निगरानी बढ़ेगी।
- जांच छह चरणों में 21 स्टेप्स के तहत पूरी की जाएगी।
- खाताधारक के साथ रिक्रूटर और मुख्य सरगना तक पहुंचने की कोशिश होगी।
- बैंक ट्रांजेक्शन, UPI, SIM और डिजिटल डिवाइस की जांच होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और कस्टडी चेन अनिवार्य होगी।
राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ जांच का तरीका बदलने की तैयारी की है। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले किराए के बैंक खातों यानी म्यूल अकाउंट की जांच अब सिर्फ खाताधारक की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। जयपुर रेंज आईजी की पहल पर जांच अधिकारियों के लिए म्यूल अकाउंट इन्वेस्टिगेशन की एसओपी तैयार की गई है।
इस एसओपी के तहत जांच अधिकारियों को छह चरणों में कुल 21 स्टेप्स पूरे करने होंगे। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि ठगी की रकम खाते में कहां से आई, खाते को वास्तव में कौन चला रहा था, खाता किसने उपलब्ध कराया और आखिरकार रकम का फायदा किसे मिला।
खाताधारक के साथ पूरी चेन तक पहुंचेगी जांच
अब किसी साइबर ठगी के मामले में पुलिस केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी जिसके नाम पर बैंक खाता है। जांच अधिकारी को रिक्रूटर, फेसिलिटेटर, खाता ऑपरेटर, कैश हैंडलर और मुख्य सरगना की भूमिका भी सामने लानी होगी।
इसके लिए पैसों की पूरी दिशा यानी मनी ट्रेल को ट्रेस किया जाएगा। बैंक खाते से रकम निकलने, दूसरे खातों में ट्रांसफर होने, एटीएम से निकासी और चेक के इस्तेमाल तक की टाइमलाइन तैयार की जाएगी।
पुलिस का प्रयास होगा कि डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे सिंडिकेट की भूमिका सामने लाई जाए, ताकि मामले में सिर्फ छोटे स्तर पर कार्रवाई न हो और नेटवर्क के पीछे मौजूद लोगों तक भी पहुंचा जा सके।
छह चरणों में होगी जांच
एसओपी में जांच को अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। सबसे पहले NCRP और संबंधित समन्वय पोर्टल से म्यूल अकाउंट की जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें खाते की प्रोफाइल, संबंधित राज्य और पहले दर्ज शिकायतों की जानकारी देखी जाएगी।
इसके बाद बैंक से KYC से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। जांच अधिकारी यह पता लगाएंगे कि खाता किसने खुलवाया, खाताधारक को बैंक तक कौन लेकर गया और खाता खोलते समय बैंक में लगे CCTV कैमरों में कौन-कौन लोग दिखाई दिए।
तीसरे चरण में डिजिटल जांच होगी। इसमें खाते से जुड़े SIM, IMEI, UPI बाइंडिंग और OTP एक्सेस की जानकारी का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि खाते को वास्तव में कौन ऑपरेट कर रहा था। इसके बाद बैंक ट्रांजेक्शन का पूरा विश्लेषण किया जाएगा। रकम कब आई, कहां ट्रांसफर हुई और किस माध्यम से निकाली गई, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
फोरेंसिक जांच होगी जरूरी
नई व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। डिजिटल डाटा का उचित तरीके से सर्टिफिकेशन और उसकी कस्टडी चेन को बनाए रखना जरूरी होगा।
जांच पूरी होने से पहले पूरे मामले की सुपरवाइजरी समीक्षा भी की जाएगी। इसके बाद ही चालान पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोर्ट में पेश किए जाने वाले डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य मजबूत हों।
कई राज्यों की जांच व्यवस्था का किया अध्ययन
म्यूल अकाउंट से जुड़े साइबर अपराधों की जांच को मजबूत बनाने के लिए राजस्थान पुलिस की टीम ने झारखंड, तेलंगाना समेत कई राज्यों की जांच व्यवस्था और एसओपी का अध्ययन किया। आईपीएस नितिन चौधरी और आरपीएस विनय के नेतृत्व में टीम ने अलग-अलग राज्यों में अपनाई जा रही जांच प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद इस एसओपी को तैयार किया है।
जयपुर रेंज के अलवर, दौसा, भिवाड़ी और खैरथल-तिजारा जैसे इलाकों में साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क की मौजूदगी को देखते हुए इस तरह की जांच व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।