पंजाब राज्यपाल के लगातार उदयपुर दौरे पर उठे सवाल, राष्ट्रपति को भेजी शिकायत
News In Short
- पंजाब राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के बार-बार उदयपुर दौरों पर विवाद।
- गवर्नर होने के बावजूद राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता पर सवाल।
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंची शिकायत, कॉपी पीएम को भी भेजी।
- शिकायत में महाराणा प्रताप पर विवादित टिप्पणी का किया जिक्र
- दौरों में प्रशासनिक और सियासी दखलंदाजी को बताया असंविधानिक।
News In Detail
राजस्थान में मेवाड़ की राजनीति का केंद्र उदयपुर लगातार किसी ना किसी विवाद के चलते चर्चा में है। पहले 'उदयपुर फाइल्स' मामला आया, जिसमें कई भाजपा नेताओं का शामिल होना बताया जा रहा है। फिर एक आदिवासी की जमीन पर कब्जा करवाने के लिए बाली विधायक पुष्पेंद्र सिंह की धमकी का मामला उछला। हाल ही इस मामले में कोर्ट के आदेश पर उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव पर एफआईआर दर्ज हुई है।
अब नया मामला पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के बार-बार उदयपुर दौरों और जनसुनवाई को लेकर सामने आया है। कटारिया के दौरों के खिलाफ राष्ट्रपति को शिकायत की गई है। इस शिकायत में पंजाब राज्यपाल के नियमित दौरों में प्रशासनिक और सियासी दखलंदाजी को असंविधानिक बताया गया है।
सक्रिय राजनीति से हटाकर बनाया राज्यपाल
पंजाब राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया मूल रूप से उदयपुर के रहने वाले हैं। उनका बरसों से मेवाड़ की राजनीति में सीधा दखल रहा है। उन्हें राजस्थान की सक्रिय राजनीति से हटाकर फरवरी 2023 में असम का राज्यपाल बनाया था। बाद में 81 वर्षीय कटारिया को जुलाई 2024 में पंजाब भेजा गया। उनके पास पंजाब के राज्यपाल के साथ ही केंद्र शासित क्षेत्र चंडीगढ़ के प्रशासक का दायित्व है। वे कुछ अपवादों को छोड़कर आम तौर पर प्रत्येक महीने उदयपुर दौरे पर रहते हैं।
नियमित उदयपुर दौरे की शिकायत
कटारिया के नियमित दौरे के खिलाफ उदयपुर के एडवोकेट डॉ. विजय विपल्वी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शिकायत भेजी है। विपल्वी उदयपुर नगर परिषद के पार्षद व भाजपा के मंडल अध्यक्ष भी रह चुके हैं। डॉ. विजय विपल्वी ने अपनी शिकायत में कहा है कि कटारिया के निरंतर उदयपुर निरंतर दौरे से न केवल प्रशासनिक, बल्कि मेवाड़ की राजनीति में उनकी दखलदांजी बढ़ रही है। वे राज्यपाल के प्रोटोकॉल के विपरीत सक्रिय राजनेता के समान व्यवहार कर रहे हैं। यह पूरी तरह असंविधानिक है।
अगवानी में प्रशासन तो कैसे हो आमजन के काम
शिकायत में यह भी कहा है कि राज्यपाल बनने के बाद कटारिया हर महीने कम से कम सात दिन के लिए उदयपुर आते हैं। उनके आने पर प्रोटोकॉल के कारण प्रशासन और पुलिस उसकी अगवानी में लग जाती है। इससे ना केवल आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि उदयपुर में ट्रैफिक रोकने से शहर की संकरी गलियों में जाम भी लग जाता है।
जनता दरबार लगाकर दखलंदाजी
शिकायत में गंभीर आरोप यह लगाया है कि राज्यपाल होने के बावजूद कटारिया सर्किट हाउस में जनता दरबार लगाकर जनसुनवाई करते हैं, जबकि संविधानिक मर्यादा के अनुसार एक प्रदेश का राज्यपाल दूसरे राज्य के प्रशासन व पुलिस में किसी प्रकार की दखलंदाजी नहीं कर सकते। यदि कोई राज्यपाल ऐसा करता है तो यह संबंधित राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण होता है।
गरिमा का भी नहीं रख रहे ध्यान
एडवोकेट डॉ. विपल्वी ने शिकायत में कहा है कि कटारिया राज्यपाल जैसे गरिमामय पद पर नगर निगम के टेम्पो स्टैंड शेड के जीर्णोद्धार जैसे बेहद छोटे स्तर के कार्यों का लोकार्पण कर रहे हैं। इतना ही नहीं, वह राजस्थान के राज्यपाल व कुलाधिपति की उपस्थिति में उदयपुर के विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में प्रोटोकॉल के विपरीत मंच पर मौजूद रहते हैं।
महाराणा प्रताप पर टिप्पणी का जिक्र
शिकायत में गुलाबचंद कटारिया के महाराणा प्रताप पर की गई टिप्पणी और फिर माफी मांगने के मामले का जिक्र भी किया है। कटारिया पर राज्यपाल पद के प्रभाव से अपने नजदीकियों के जमीन और अवैध निर्माण के मामलों में संरक्षण देने के आरोप भी लगाए हैं।
शिकायतकर्ता एडवोकेट डॉ. विजय विपल्वी का कहना है कि यदि कटारिया का उदयपुर में रहना अनिवार्य है तो उन्हें गुजरात में राज्यपाल लगा दिया जाए। इससे उन्हें उदयपुर आने-जाने में भी सुविधा रहेगी। उन्होंने पत्र की कॉपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राजस्थान के राज्यपाल को भी भेजी हैं।
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