जिस FSL रिपोर्ट से महिला अधिकारी जेल गईं, उसी पर उठे सवाल; डिप्टी डायरेक्टर को चार्जशीट
डॉ. चौधरी ने वर्ष 2010 के एक दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षरों की तुलना वर्ष 2016 के हस्ताक्षरों से की और उन्हें मिसमैच बता दिया। जबकि जांच में सामने आए नियमों और प्रक्रिया के मुताबिक, विवादित हस्ताक्षरों के मिलान के लिए तीन साल पहले या तीन साल बाद के नमूने लिए जाने चाहिए थे। इस अंतर के कारण FSL रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
2010 के हस्ताक्षर, जांच के लिए भेजे 2016 के दस्तावेज
मामले की शुरुआत 2 अगस्त 2021 को हुई। राजेंद्र सिंह ने जोधपुर के महामंदिर थाने में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद मामले में एफआर यानी फाइनल रिपोर्ट लगा दी। परिवादी ने इस रिपोर्ट को गलत बताते हुए वर्ष 2010 के एक बेचाननामे पर तत्कालीन नोटरी श्रवण कुमार ओझा के हस्ताक्षरों की जांच कराने की मांग की।
इस मामले में पुलिस के पास वर्ष 2010 का मूल नोटरी रजिस्टर भी जब्त था। तत्कालीन जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया था। इसके बावजूद हस्ताक्षरों के मिलान के लिए वर्ष 2016 के दस्तावेज FSL भेज दिए गए।
आरोप है कि डॉ. रमेश चौधरी ने इन्हीं दस्तावेजों से तुलना कर हस्ताक्षरों को मिसमैच बता दिया। इस रिपोर्ट के आधार पर हेमलता कांकरिया समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया। महामंदिर थाना पुलिस ने हेमलता को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में हाईकोर्ट ने मामले में कार्रवाई पर रोक लगा दी।
रिहाई के बाद पुलिसकर्मियों की शिकायत
रिहा होने के बाद हेमलता कांकरिया ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत की। इसके बाद एसओजी ने मामले की जांच शुरू की। जांच में FSL रिपोर्ट तैयार करने और पुलिस की ओर से दस्तावेज भेजने की प्रक्रिया पर सवाल उठे। आरोप है कि गलत अवधि के दस्तावेज जांच के लिए भेजे गए और फिर उन्हीं के आधार पर रिपोर्ट तैयार हुई।
गृह विभाग ने 13 अक्टूबर को डॉ. रमेश चौधरी को चार्जशीट सौंप दी है। वहीं, गलत दस्तावेज FSL भेजने वाले पुलिस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संबंधित पुलिस अधिकारी से जवाब-तलब किया गया है। ऐसे में अब यह सवाल भी अहम है कि गलत दस्तावेज भेजने की जिम्मेदारी किसकी थी और उस पर क्या कार्रवाई होगी।
मेरी सामाजिक हत्या हुई, बेटे की सगाई भी टूटी
हेमलता कांकरिया ने इस मामले में अपनी गिरफ्तारी और उसके असर को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि गलत FSL रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचा। उन्होंने इसे अपनी सामाजिक हत्या बताया।
हेमलता के मुताबिक, इस घटना के बाद उनके बेटे की सगाई तक टूट गई। उनका सवाल है कि अब जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद क्या सिर्फ FSL अधिकारी को चार्जशीट देना ही न्याय है? उन्होंने उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर गलत दस्तावेज FSL भेजे थे।
दो करोड़ की घूस मामले से भी जुड़ा है परिवार
हेमलता कांकरिया का नाम एक दूसरे चर्चित मामले के कारण भी सुर्खियों में रहा है। वे निरंजन मोगरा की पत्नी हैं। निरंजन मोगरा ने एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी से जुड़े दो करोड़ रुपए की कथित रिश्वत के मामले में ट्रैप कार्रवाई कराने में भूमिका निभाई थी। इस मामले का जिक्र भी मौजूदा घटनाक्रम के साथ हो रहा है।
यह पूरा मामला अब सिर्फ एक महिला अधिकारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। सवाल FSL की रिपोर्ट तैयार करने के तरीके, पुलिस की ओर से भेजे गए दस्तावेजों और जांच में जवाबदेही का है। FSL की रिपोर्ट आपराधिक मामलों में अहम वैज्ञानिक साक्ष्य होती है। ऐसे में उसकी तैयारी में कथित गड़बड़ी सामने आना जांच व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।