पाकिस्तान बॉर्डर पर ANTF की कार्रवाई सवालों के घेरे में, कॉन्स्टेबल पर पंजाब के बदमाशों से मिलीभगत के आरोप
12-13 अक्टूबर की रात क्या हुआ?
पाकिस्तान बॉर्डर से सटे श्रीगंगानगर जिले में यह कार्रवाई हुई। एएनटीएफ (ANTF – Anti Narcotics Task Force) की टीम रात करीब 9:30 बजे रावला मंडी के 12 केएनडी इलाके में पहुंची। यहां पंजाब के दो बदमाशों को पकड़ने का दावा किया गया।
कार्रवाई के अनुसार उनके पास भारी मात्रा में आरडीएक्स (RDX) था। साथ में तुर्की निर्मित पिस्तौल और 650 से ज्यादा जिंदा कारतूस भी बताए गए। दोनों बदमाशों के नाम लखविंदर और सुखविंदर बताए गए हैं।
सुबह 8 बजे के बाद रावला मंडी थाने में एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज हुई। इसमें आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ कानून और यूएपीए (UAPA – Unlawful Activities Prevention Act) की धाराएं लगाई गईं। दोपहर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
किन तीन बातों पर उठे सवाल?
पहला सवाल सूचना में देरी का है। रिपोर्ट के अनुसार बदमाश रात 9:30 बजे पकड़े गए। लेकिन रावला मंडी थाना पुलिस को आधिकारिक सूचना सुबह 4 बजे मिली। यानी करीब साढ़े छह से सात घंटे बाद।
दूसरा सवाल स्थानीय पुलिस को लेकर है। आरोप है कि रात 10 बजे रावला थाने के दो कॉन्स्टेबल मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद एएनटीएफ टीम ने कोई जानकारी नहीं दी। उन्हें दबाव बनाकर वापस भेजने की बात कही गई है।
तीसरा सवाल दूसरी एजेंसियों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार आरडीएक्स की ड्रोन सप्लाई का इनपुट था। फिर भी सीमा पर तैनात बीएसएफ (BSF – Border Security Force) को शामिल नहीं किया गया। स्थानीय इंटेलिजेंस और सीआईडी (CID – Crime Investigation Department) को भी सुबह 4 बजे के बाद सक्रिय किया गया।
कॉन्स्टेबल पर क्या आरोप लगे हैं?
रिपोर्ट के अनुसार सवाल एएनटीएफ के एक कॉन्स्टेबल की भूमिका पर हैं। यह सब पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है। कॉन्स्टेबल का नाम रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।
आरोप है कि दोनों बदमाश पंजाब के फाजिल्का क्षेत्र के एक ग्रेनेड हमले के मामले में फरार थे। सूत्रों के अनुसार कॉन्स्टेबल ने उन्हें पकड़वाने के बजाय एक वांछित तस्कर की मदद ली। इस तस्कर का नाम रघुवीर सिंह बताया गया है। उसकी मदद से बदमाशों को बज्जू (बीकानेर) में ठिकाना दिलाने की बात कही गई है।
यह भी आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से बातचीत जिस फोन से हुई, वह एएनटीएफ के ही एक मुखबिर का था। ये सभी बातें अभी सूत्रों के दावे हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि श्रीगंगानगर चौकी के स्टाफ को रात तक कार्रवाई की भनक नहीं थी। जयपुर से बड़े अधिकारी के आने के बाद 13 अक्टूबर को खुलासा किया गया।
आरडीएक्स को नष्ट करने पर भी सवाल
रिपोर्ट के अनुसार एएनटीएफ अधिकारियों ने जयपुर से बम निरोधक दस्ता बुलाया। सीआईडी एएसपी की मौजूदगी में रावला के सुनसान इलाके में तीन धमाके किए गए। इस तरह आरडीएक्स को नष्ट किया गया। रिपोर्ट इस जल्दबाजी पर भी सवाल उठाती है।
आईजी विकास कुमार का पक्ष
एएनटीएफ आईजी विकास कुमार ने आरोपों को गलत बताया। उनके अनुसार टीम ने सराहनीय काम किया है और बदमाशों के पाकिस्तान नेटवर्क का खुलासा किया है। कांस्टेबल की किसी संदिग्ध भूमिका की उन्हें जानकारी नहीं है।
आईजी ने यह भी बताया कि एटीएस (ATS – Anti Terrorist Squad) भी जांच कर रही है। उनके अनुसार जांच में सब सामने आ जाएगा।
एक्सपर्ट की राय
बीएसएफ के रिटायर्ड आईजी मूलचंद पंवार के अनुसार ऐसे मामलों में प्रक्रिया तय है। बॉर्डर पार से हथियार या विस्फोटक गिरने पर लोकल पुलिस को सूचना मिलती है। फिर बीएसएफ और बॉर्डर इंटेलिजेंस एजेंसियों को बताना जरूरी होता है।
उनके अनुसार बीएसएफ की इंटेलिजेंस रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय ऐसे मामले एनआईए (NIA – National Investigation Agency) को देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि बीएसएफ को सूचना देर से क्यों दी गई। उनका कहना है कि एनआईए या अन्य एजेंसियां इसका पता लगा सकती हैं।
फिलहाल एटीएस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। कार्रवाई पर उठे सवालों की सच्चाई जांच के बाद ही साफ होगी। तब तक सूत्रों के दावे अप्रमाणित माने जाने चाहिए। आईजी का पक्ष भी रिपोर्ट में दर्ज है।