बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में बड़ा एक्शन, 80 MBBS छात्रों पर कार्रवाई; 13 हॉस्टल से बाहर
मामले में 2025 बैच के सीनियर छात्रों पर 2026 बैच के जूनियर विद्यार्थियों को परेशान करने और उन पर दबाव बनाने के आरोप हैं। शिकायतों के मुताबिक, जूनियर छात्रों से छोटे बाल रखने, फॉर्मल कपड़े पहनने और सीनियर्स को एक तय तरीके से संबोधित करने को कहा गया। कुछ शिकायतों में आपत्तिजनक मैसेज, अश्लील सामग्री और गाली-गलौज का भी जिक्र है।
ऐसे खुला रैगिंग का मामला
कॉलेज में कई जूनियर छात्रों के बाल बेहद छोटे दिखाई देने के बाद फैकल्टी सदस्यों को शक हुआ। प्रशासन ने छात्रों से गोपनीय तरीके से बातचीत की। इस दौरान कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि सीनियर छात्रों के दबाव में उन्हें बाल कटवाने पड़े।
इसके बाद एंटी-रैगिंग कमेटी ने शिकायतों की जांच शुरू की। कॉलेज प्रशासन ने संबंधित विद्यार्थियों के मोबाइल फोन, वाट्सऐप चैट, वीडियो और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। प्राचार्य डॉ. अनूप सिंह गुर्जर के मुताबिक, जांच में जूनियर छात्रों से परिचय पूछने के लिए दबाव बनाने, आपत्तिजनक सामग्री साझा करने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्य मिले।
प्राचार्य ने यह भी कहा कि जांच में जूनियर छात्रों के साथ शारीरिक मारपीट का मामला सामने नहीं आया। ‘व्हाइट हाउस’ नाम की जगह पर इस साल बाल काटने की घटना से भी उन्होंने इनकार किया है। हालांकि, जूनियर छात्रों की शिकायतों में इस जगह का जिक्र किया गया था।
13 छात्रों को हॉस्टल से स्थायी छुट्टी
जांच के बाद कॉलेज प्रशासन ने आरोपों की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग सजा तय की। रिपोर्टों के मुताबिक, छह छात्रों को 60 कार्यदिवसों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से बाहर किया गया है। सात अन्य छात्रों को 30 कार्यदिवसों के लिए क्लास और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है। इन सभी 13 छात्रों को हॉस्टल से स्थायी रूप से निष्कासित किया गया है।
इसके अलावा 11 छात्रों को 30 दिनों के लिए हॉस्टल से बाहर किया गया है। उन्हें 15 कार्यदिवसों तक लेक्चर, प्रैक्टिकल, वार्ड पोस्टिंग और परीक्षा जैसी शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होने से भी रोका गया है।
इन 24 छात्रों पर एक साल तक खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने पर भी रोक लगाई गई है।
बाकी छात्रों को चेतावनी और प्रतिबंध
अन्य छात्रों को भी कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 49 छात्रों को चेतावनी देते हुए सात कार्यदिवसों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है। उन्हें एक साल तक खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की अनुमति भी नहीं होगी। दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर हॉस्टल से स्थायी निष्कासन की चेतावनी दी गई है।
पांच अन्य छात्रों को भी चेतावनी जारी की गई है। उन्हें तीन दिन के भीतर अपने माता-पिता को कॉलेज प्रशासन के सामने उपस्थित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
NMC ने भी मांगी रिपोर्ट
बाड़मेर का मामला राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) तक पहुंच चुका है। आयोग को राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग और जूनियर छात्रों के उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें मिली हैं। बाड़मेर और कोटा मेडिकल कॉलेज से शिकायतों पर जवाब और विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी गई है।
NMC ने कॉलेज प्रशासन से जांच, एंटी-रैगिंग कमेटी की भूमिका और छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। आयोग ने शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने और सबूत सुरक्षित रखने पर जोर दिया है।
प्राचार्य बोले- रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनूप सिंह गुर्जर ने कहा है कि संस्थान में रैगिंग, दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है। किसी भी छात्र को जूनियर के साथ गलत व्यवहार करने की छूट नहीं दी जाएगी।
बाड़मेर की यह कार्रवाई मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग रोकने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। नए विद्यार्थी पढ़ाई के लिए कॉलेज आते हैं, लेकिन सीनियर छात्रों का दबाव उनके लिए डर और मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है।