ट्रेन लेट हुई, फ्लाइट छूटी, रेलवे को देना पड़ा 69 हजार रुपए का हर्जाना
News In Short
- कोटा दंपति ने ट्रेन की देरी से फ्लाइट छूटने पर रेलवे से 69 हजार का मुआवजा वसूल किया।
- राजधानी एक्सप्रेस चार घंटे लेट हुई, दोबारा फ्लाइट टिकट पर 72,930 रुपये खर्च करने पड़े।
- जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को मुआवजे के तौर पर 69,004 रुपए देने के आदेश दिए।
- रेलवे ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की, लेकिन अपील खारिज हो गई।
- यूरोप में 60 मिनट की देरी पर 25% और 120 मिनट पर 50% टिकट रिफंड मिलता है।
News In Detail
राजस्थान के कोटा के रहने वाले एक दंपती ने साबित कर दिया है कि यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग हो, तो वह देश के सबसे बड़े सरकारी तंत्र से भी अपनी असुविधा का हर्जाना वसूल सकता है।
ट्रेन की लेट-लतीफी के कारण फ्लाइट छूटने और भारी आर्थिक व मानसिक नुकसान झेलने के बाद, अनिल कुमार राणा और उनकी पत्नी अनीता राणा ने रेलवे के खिलाफ कानूनी जंग लड़ी और आखिरकार 69,004 रुपए का मुआवजा हासिल किया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला दिसंबर 2017 का है। कोटा निवासी अनिल और अनीता राणा ने केरल घूमने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से तिरुवनंतपुरम जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट बुक की थी, जिसके टिकटों पर 33,929 रुपए खर्च हुए थे। दिल्ली समय पर पहुंचने के लिए उन्होंने कोटा से राजधानी एक्सप्रेस का टिकट लिया।
शेड्यूल के मुताबिक, राजधानी एक्सप्रेस को दोपहर 2:40 बजे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन (दिल्ली) पहुंचना था, जबकि उनकी फ्लाइट शाम 6:05 बजे थी। यानी उनके पास एयरपोर्ट पहुंचने के लिए पर्याप्त समय (करीब साढ़े तीन घंटे) था। लेकिन ट्रेन अपने निर्धारित समय से 4 घंटे से अधिक लेट हो गई और शाम करीब 4:50 बजे दिल्ली पहुंची। नतीजतन, जब तक दंपती एयरपोर्ट पहुंचे, उनकी फ्लाइट छूट चुकी थी।
फ्लाइट छूटने से बढ़ गया आर्थिक बोझ
फ्लाइट मिस होने के कारण दंपती को न केवल मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि दिल्ली में रुकने के लिए होटल का खर्च भी उठाना पड़ा। अगले दिन केरल पहुंचने के लिए उन्हें मजबूरी में नए और महंगे फ्लाइट टिकट खरीदने पड़े, जिस पर 72,930 रुपये का अतिरिक्त खर्च आया।
रेलवे की दलीलें खारिज, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
रेलवे प्रशासन को शिकायत और कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो दंपती ने कोटा जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान रेलवे ने बचाव में तर्क दिया कि ट्रेन की देरी परिचालन, तकनीकी और सुरक्षा कारणों से हुई थी।
हालांकि, आयोग ने रेलवे की इस पारंपरिक दलील को सेवा में कमी मानते हुए खारिज कर दिया। अगस्त 2023 में आयोग ने दंपती के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 69,004 रुपए का मुआवजा तय किया
आयोग ने अतिरिक्त फ्लाइट खर्च के लिए 39,004 रुपए, मानसिक पीड़ा के लिए 20,000 रुपए, होटल खर्च के लिए 5,000 रुपए और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 5,000 रुपए देने का निर्देश दिया। कुल मुआवजा 69,004 रुपए तय किया गया। रेलवे ने इस फैसले को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसकी अपील खारिज कर दी गई।
वैश्विक स्तर पर क्या हैं नियम?
ट्रेन की देरी पर यात्रियों को मुआवजा देने की व्यवस्था दुनिया के कई देशों में बेहद सख्त है:
यूरोपीय संघ (EU): यहां ट्रेन 60 मिनट से ज्यादा लेट होने पर यात्री को टिकट की कीमत का 25% और 120 मिनट से ज्यादा की देरी पर 50% रिफंड सीधे मिलता है। साथ ही ट्रेन ऑपरेटर पर पेनाल्टी लगती है।
सिंगापुर: यहां की लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (LTA) ट्रेनों में देरी होने पर मेट्रो ऑपरेटर (SMRT) पर भारी-भरकम जुर्माना लगाती है।
यह ऐतिहासिक फैसला उन लाखों रेल यात्रियों के लिए एक नजीर बन गया है जो ट्रेन लेट होने के कारण अक्सर अपनी जरूरी परीक्षाएं, इंटरव्यू, मेडिकल इमरजेंसी या फ्लाइट मिस कर देते हैं।
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