राजस्थान में 211 प्रधानाचार्यों के तबादले अटके, शिक्षा निदेशालय ने मांगी रिपोर्ट
राजस्थान में तबादला आदेश जारी होने के बावजूद नई जगह कार्यग्रहण नहीं करने वाले 211 प्रधानाचार्यों और समकक्ष कार्मिकों को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सख्ती दिखाई है। निदेशालय ने संबंधित संयुक्त निदेशकों से सभी मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को बताना होगा कि कार्मिकों को पुराने पदस्थापन स्थल से कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया या उन्होंने नई जगह जाकर कार्यभार क्यों नहीं संभाला। यदि मामला न्यायालय में लंबित है, तो उसकी वाद संख्या और मौजूदा स्थिति भी देनी होगी।
211 प्रधानाचार्यों के मामलों की होगी समीक्षा
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश में ऐसे 211 प्रधानाचार्यों और समकक्ष कार्मिकों की जानकारी तलब की है, जिनका तबादला होने के बावजूद नई जगह कार्यग्रहण नहीं हुआ है। निदेशालय ने संयुक्त निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक प्रकरण की स्थिति स्पष्ट की जाए और देरी के कारणों का ब्योरा दिया जाए।
निर्धारित प्रारूप में देनी होगी जानकारी
निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों से निर्धारित प्रारूप में पूरी जानकारी मांगी है। इसमें कार्मिक का नाम, कर्मचारी आईडी, वर्तमान पदस्थापन जिला, नई जगह का नाम और स्थानांतरण आदेश की तारीख शामिल होगी।
इसके साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित कार्मिक को पुराने स्थान से कार्यमुक्त नहीं किया गया या उसने नई जगह पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। रिपोर्ट के जरिए हर मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
जोधपुर में सबसे ज्यादा 16 मामले
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जोधपुर में सबसे ज्यादा 16 प्रधानाचार्यों ने नई जगह कार्यग्रहण नहीं किया है। अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
- जोधपुर: 16 मामले
- भीलवाड़ा: 5 मामले
- डूंगरपुर: 4 मामले
- बूंदी: 3 मामले
- डीग: 3 मामले
- चित्तौड़गढ़: 2 मामले
- डीडवाना-कुचामन: 2 मामले
- धौलपुर: 1 मामला
इनके अलावा भी कई जिलों में तबादले के बाद कार्यग्रहण नहीं करने के प्रकरण हैं।
न्यायालय में मामला है तो देनी होगी जानकारी
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कार्मिक का मामला न्यायालय में लंबित है, तो संबंधित अधिकारी को वाद संख्या और मामले की वर्तमान स्थिति भी रिपोर्ट में दर्ज करनी होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि कार्यग्रहण नहीं होने के पीछे प्रशासनिक कारण हैं या मामला कानूनी प्रक्रिया में है।
आगे क्या?
अब संबंधित संयुक्त निदेशकों की रिपोर्ट के आधार पर 211 मामलों की स्थिति स्पष्ट होगी। रिपोर्ट में सामने आए कारणों के आधार पर विभाग आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रिपोर्ट मिलने के बाद किन कार्मिकों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे।