पुलिस से बचने के लिए पाल रखे थे 8 कुत्ते, नवरात्रि में पूजा करने घर आया तो पकड़ा गया एक लाख का इनामी तस्कर
राजस्थान में तीन साल से फरार एक लाख रुपए के इनामी आरोपी कंवराराम को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बाड़मेर से पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने घर के आसपास आठ कुत्ते पाल रखे थे, ताकि किसी बाहरी व्यक्ति या पुलिस के आने पर उसे पहले ही भनक लग जाए। वह लंबे समय से ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बच रहा था।
नवरात्रि में नागणेची माता की पूजा करने के लिए वह अपने घर पहुंचा था। इसी दौरान ANTF की टीम ने ऑपरेशन विषकपिल के तहत दबिश देकर उसे पकड़ लिया। पुलिस का दावा है कि आरोपी नेपाल भागने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही टीम ने उसे दबोच लिया।
कुत्तों के भौंकते ही हो जाता था सतर्क
ANTF के मुताबिक, कंवराराम ने अपने घर के आसपास आठ पालतू कुत्ते रखे थे। कोई बाहरी व्यक्ति घर के पास आता तो कुत्ते भौंकने लगते थे। इससे आरोपी को खतरे का संकेत मिल जाता था।
पुलिस का कहना है कि कुत्तों के कारण बाहरी लोगों का घर के आसपास पहुंचना भी मुश्किल था। आरोपी इसी व्यवस्था के सहारे पुलिस की संभावित दबिश से बचने की कोशिश करता था।
नवरात्रि में घर आने की सूचना मिली, पूजा करते समय दबोचा
ANTF की टीम लंबे समय से कंवराराम की तलाश कर रही थी। इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी नागणेची माता का भक्त है और नवरात्रि में पूजा करने अपने घर आ सकता है। इस सूचना के बाद टीम ने उसके घर के आसपास गुप्त निगरानी शुरू कर दी। नवरात्रि के दौरान आरोपी के घर पहुंचने की जानकारी मिली।
टीम ने उसकी मौजूदगी की पुष्टि की और घर पर दबिश दी। उस समय कंवराराम पूजा-पाठ कर रहा था। पुलिस ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया और बाड़मेर के रीको पुलिस थाने को सौंप दिया।
नेपाल भागने के लिए तैयार कर रखा था बैग
ANTF के आईजी विकास कुमार के मुताबिक, आरोपी नवरात्रि में पूजा करने के लिए ही घर आया था। इसके बाद वह फिर फरार होने की तैयारी में था। पुलिस का दावा है कि कंवराराम ने नेपाल जाने के लिए अपना बैग भी तैयार कर रखा था। हालांकि, वह रवाना होता, उससे पहले ही टीम ने उसे पकड़ लिया।
कंवराराम राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अलग-अलग ठिकानों पर छिपकर रह चुका था। पुलिस के अनुसार, फरारी के दौरान भी वह नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ा रहा।
पेट्रोल पंप पर नौकरी की, फिर ड्राइवर बना
पुलिस के अनुसार, 35 वर्षीय कंवराराम बाड़मेर के बोला गांव का रहने वाला है। फिलहाल वह बाड़मेर के बलदेव नगर में रह रहा था। कंवराराम ने वर्ष 2009 में दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद करीब दो साल पेट्रोल पंप पर सेल्समैन का काम किया। बाद में वह अलग-अलग लोगों के वाहन चलाने लगा।
वर्ष 2010 में उसके खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज हुआ। वर्ष 2013 में हत्या के मामले में उसका नाम सामने आया। इस मामले में वह जेल भी गया और करीब चार साल बाद उसे जमानत मिली।
शराब की तस्करी के बाद नशीले पदार्थों के कारोबार में आया नाम
पुलिस के मुताबिक, कंवराराम ने अवैध शराब के कारोबार में भी हाथ आजमाया। वह राजस्थान से गुजरात शराब सप्लाई करता था, लेकिन पार्टनर से विवाद होने के बाद वापस बाड़मेर लौट आया।
इसके बाद उसका संपर्क नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े लोगों से हुआ। पुलिस का आरोप है कि वह मध्यप्रदेश और दक्षिण राजस्थान से नशीले पदार्थ खरीदकर मारवाड़ क्षेत्र में सप्लाई करने लगा। वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश के नीमच में डोडा पोस्त से जुड़े एनडीपीएस मामले में उसे पकड़ा गया था। इस मामले में वह करीब 27 महीने जेल में रहा।
दिसंबर 2021 में प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी में भी डोडा पोस्त से जुड़े मामले में पकड़ा गया। वर्ष 2023 में पाली जिले के बाली थाने में उसके खिलाफ एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।
हत्या और तस्करी सहित 14 से अधिक मामले दर्ज
ANTF के मुताबिक, कंवराराम के खिलाफ हत्या, मारपीट और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित 14 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
उसके खिलाफ राजस्थान के अलग-अलग पुलिस थानों के अलावा दूसरे राज्यों में भी मामले दर्ज होने का उल्लेख है। लगातार आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद आरोपी ने अपना गांव छोड़ दिया था। वह पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलता रहा।
ANTF की टॉप नार्को-25 सूची में था शामिल
ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि कंवराराम करीब तीन साल से फरार था। उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित था। वह ANTF की टॉप नार्को-25 सूची में भी शामिल था।
ऑपरेशन विषकपिल के तहत उसे बाड़मेर से पकड़ा गया। विकास कुमार के मुताबिक, कार्रवाई में शामिल टीमों को विशेष कार्यक्रम में ANTF मुख्यालय में सम्मानित किया जाएगा। ANTF ने आम लोगों से भी अपील की है कि नशीले पदार्थों की तस्करी या फरार आरोपियों से जुड़ी जानकारी पुलिस को दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।