बजट सत्र का रिपोर्ट कार्ड: गहलोत और वसुंधरा आए एक दिन, 16 विधायकों ने नहीं पूछे सवाल
News In Short
- बजट सत्र में पूर्व सीएम अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे ने किया निराश।
- गहलोत और वसुंधरा केवल एक दिन ही विधानसभा में नजर आए।
- कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी बजट सत्र में नहीं पूछा एक भी सवाल।
- बजट सत्र में सवाल पूछने में भाजपा के 9 और कांग्रेस के 7 विधायक पीछे।
- 30 विधायक शून्यकाल में प्रस्ताव पर बोलने के समय हो गए गायब।
News In Detail
जयपुर। राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र खत्म हो गया है, लेकिन यह सत्र विधायी चर्चाओं से ज्यादा दो बड़े चेहरों की 'खामोशी' और जनता के अनसुने मुद्दों के लिए जाना जाएगा। 28 जनवरी से 10 मार्च तक चले 24 दिन के इस सत्र में जहां नए विधायकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं प्रदेश के दो कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे सदन की कार्यवाही से लगभग दूर ही रहे।
गहलोत-वसुंधरा सदन में आए, पर बोले कुछ नहीं
राजस्थान की राजनीति के दो ध्रुव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे इस पूरे सत्र में केवल एक-एक दिन के लिए सदन में नजर आए। गहलोत 23 फरवरी को सदन पहुंचे, करीब 50 मिनट रहे और बिना किसी सवाल या बहस में हिस्सा लिए बाहर निकल गए। इसी तरह पूर्व सीएम वसुंधरा राजे 24 फरवरी को मात्र 20 मिनट के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हैरानी की बात यह रही कि प्रदेश के इतने अनुभवी नेताओं ने न तो कोई प्रश्न लगाया और न ही किसी अहम मुद्दे पर सरकार को घेरा।
सवाल पूछने में भाजपा के 9 और कांग्रेस के 7 विधायक पीछे
सत्र के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो भाजपा के 9 और कांग्रेस के 7 विधायक ऐसे रहे, जिन्होंने सवाल पूछने की प्रक्रिया से खुद को दूर रखा। यह वह मंच था, जहां वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को सरकार के सामने मजबूती से रख सकते थे।
दोनों पार्टियों में सवाल नहीं पूछने वाले चेहरे:
भाजपा के ये 9 चेहरे, सवाल पूछने से रहे दूर
वसुंधरा राजे, झालरापाटन
अतुल भंसाली, जोधपुर
शांता देवी, सलूंबर
सिद्धी कुमारी, बीकानेर ईस्ट
सुरेंद्र सिंह राठौड़, कुंभलगढ़
जितेंद्र गोठवाल, खंडार
जयदीप बियाणी, श्रीगंगानगर
शिवराज सिंह, नाथद्वारा
दर्शन सिंह, करौली
कांग्रेस के ये 7 चेहरे, जिन्होंने सवाल पूछने में किया निराश
अशोक गहलोत, सरदारपुरा
सचिन पायलट, टोंक
नरेंद्र बुढ़ानिया, तारानगर
हरेंद्र मिर्धा, नागौर
राजेंद्र पारीक, सीकर
अनिता जाटव, हिंडौन सिटी
दीपचंद खैरिया, किशनगढ़बास
वो मुद्दे, जो सदन की दहलीज तक नहीं पहुंचे
दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों की जनता ने उन ज्वलंत मुद्दों की सूची साझा की है, जिन्हें उनके विधायकों को सदन में उठाना चाहिए था। लेकिन, ये मुद्दे नहीं उठाए गए।
अशोक गहलोत, सरदारपुरा: पानी की समस्या, जर्जर सड़कें व सीवरेज लाइन, चिकित्सा सुविधाओं की बदहाली।
वसुंधरा राजे, झालरापाटन: नए उद्योगों की स्थापना, पेयजल संकट, मेडिकल कॉलेज में आधुनिक सुविधाओं का अभाव।
सचिन पायलट, टोंक: सड़क-सीवरेज की बदहाली, अवैध बजरी खनन और उद्योगों का अभाव।
शून्यकाल में प्रस्ताव देकर हुए गायब
चौंकाने वाली बात यह भी रही कि 30 विधायकों ने शून्यकाल में बोलने का प्रस्ताव तो दिया, लेकिन जब सदन में उनका नाम पुकारा गया, तो वे वहां उपस्थित ही नहीं थे। यानी इन विधायकों ने शून्यकाल में अपने प्रस्ताव को अहमियतता नहीं दी।
100 फीसदी उपस्थिति, फिर भी गायब सक्रियता
सत्र की एक सकारात्मक तस्वीर यह रही कि सभी 200 विधायकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और किसी ने भी आधिकारिक तौर पर छुट्टी नहीं ली। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल रजिस्टर में हस्ताक्षर करना ही लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी है।
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