भूमि कंवर्जन में बड़ा फर्जीवाड़ा, 238 म्यूटेशन भर दिए, 40 नामांतरण खारिज, एक बाबू सस्पेंड
News In Short
- बालोतरा में जमीन की किस्म बदलने की बड़ी गड़बड़ी उजागर।
- तीन साल में 262 पत्रावलियों के जरिए कृषि भूमि की किस्म बदली।
- कृषि भूमि को आवासीय किस्म बदलने में भारी अनियमितताएं।
- जांच में गड़बड़ी की पुष्टि के बाद 40 म्यूटेशन खारिज किए गए।
- प्रशासन ने इस मामले में अभी एक बाबू को किया सस्पेंड।
News In Detail
Balotra: राजस्थान के बालोतरा में नियमों को ताक पर रखकर जमीन की किस्म बदलने का बड़ा फर्जीवाड़े सामने आया है। कलेक्टर के आदेश पर हुई जांच के बाद इस घोटाले की परतें खुली हैं, जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई हैं। इस मामले में प्रशासन ने 40 म्यूटेशन खारिज कर दिए हैं। एक बाबू को निलंबित भी किया गया है।
तीन साल में 262 फाइलों का खेल
जांच रिपोर्ट के अनुसार तीन साल में बालोतरा नगर परिषद क्षेत्र में कृषि भूमि को आवासीय प्रयोजन के लिए परिवर्तित करने के नाम पर भारी अनियमितताएं की गईं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन तीन साल में कुल 262 पत्रावलियों के जरिए कृषि भूमि का आवासीय भू-रूपांतरण किया गया।
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी ठोस आधार और ले-आउट प्लान के ही 238 म्यूटेशन (नामांतरण) भर दिए गए। जब इन फाइलों की गहनता से जांच की गई तो प्राथमिक तौर पर अधिकारियों ने 40 नामांतरणों को पूरी तरह अवैध पाया। उन्हें तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया।
नियमों की धज्जियां उड़ीं
नगर परिषद के आयुक्त रामकिशोर मेहता ने बताया कि तहसील के रिकॉर्ड के अनुसार फाइलों का मिलान नहीं हो पा रहा है। जांच में पाया गया है कि 268 फाइलों के 90-ए आदेश हुए थे, लेकिन इनमें से कई पत्रावलियां रिकॉर्ड में मिल ही नहीं रही हैं। यह प्रथम दृष्टया नियमों का घोर उल्लंघन है। यह एक गंभीर स्थिति है और इसके बारे में सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया जा रहा है।
कॉलोनाइजरों के लिए बदला नियम
जांच में यह भी सामने आया है कि नगर परिषद के कुछ अधिकारियों ने चुनिंदा कॉलोनाइजरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए विशिष्ट खसरों पर जानबूझकर नियमों में राहत दी गई। नियम यह कहता है कि किसी भी रूपांतरण से पहले पत्रावली में ले-आउट प्लान अप्रूव होना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में बिना किसी नक्शे या ले-आउट के ही फाइलें आगे बढ़ा दी गईं
इसका सीधा नुकसान शहर के विकास और आम जनता को हुआ। जिन कॉलोनियों के लिए पार्क, चौड़ी सड़कें और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन छोड़ी जानी चाहिए थी, वहां कॉलोनाइजरों ने 40% सार्वजनिक भूमि को भी छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेच दिया। अधिकारियों की मिलीभगत से सड़कों और पार्कों की जमीन को खुर्द-बुर्द कर दिया गया।
कार्रवाई की जद में अधिकारी और कर्मचारी
इस पूरे फर्जीवाड़े में संलिप्तता पाए जाने पर कनिष्ठ लिपिक को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आयुक्त ने बताया कि पूर्व में जिन मामलों में बिना पत्रावलियों के 90-ए खारिज कर स्थिति बहाल की गई थी, अन्य संदिग्ध मामलों में भी वैसी ही कार्रवाई की जाएगी। यदि पत्रावलियां बाद में भी सही नहीं पाई गईं, तो जिला कलेक्टर के पास अपील कर उन्हें रद्द करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
क्या है 90-ए और छूट का मामला?
नियमों के मुताबिक, धारा 90-ए के तहत कृषि भूमि का गैर-कृषि कार्यों के लिए रूपांतरण किया जाता है। राज्य सरकार की योजना के तहत इसमें 10 प्रतिशत शुल्क की छूट भी दी जाती है। आरोप है कि इसी छूट और रूपांतरण प्रक्रिया का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया और अवैध कॉलोनियां काट दीं।
आगे क्या
फिलहाल प्रशासन सभी 262 फाइलों की बारीकी से दोबारा जांच कर रहा है। आयुक्त का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। शहर में बिना ले-आउट प्लान के काटी गई ऐसी सभी कॉलोनियों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
मुख्य बिंदु:
262 कुल फाइलों की जांच।
238 म्यूटेशन संदिग्ध पाए गए।
40 नामांतरण अब तक खारिज।
40 प्रतिशत पार्क और सड़क की जमीन को भी प्लॉट बनाकर बेचा गया।
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