जिस विदेशी माल्ट कंपनी की आवभगत की, उसने 'राइजिंग राजस्थान' पर उठाए सवाल, फ़्रांस राजदूत ने सीएम को लिखी चिट्ठी
News In Short
- राइजिंग राजस्थान में फ्रांसीसी माल्ट कंपनी से प्लांट लगाने के लिए एमओयू हुआ।
- फ्रांसीसी कंपनी को बढ़ते शराब बाजार का लाभ लेने के लिए बनाना था रॉ माल्ट।
- कंपनी का आरोप- जो वादा किया, उस दर पर सरकार नहीं दे रही जमीन।
- फ्रांसीसी राजदूत ने सीएम भजनलाल को चिट्ठी भेजकर जताई गहरी नाराजगी।
- रीको अब बोल रहा- कंपनी पहले फैसला करे, फिर उसे हम दे देंगे जमीन।
News In Detail
Jaipur: राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट के जरिए विदेशी निवेश लुभाने के सरकार के दावों पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। जिस फ्रांसीसी माल्ट कंपनी के लिए भजनलाल शर्मा सरकार ने पलक-पावडे बिछाए, उसी ने राजस्थान के सरकारी सिस्टम को सवालों में ला दिया है। फ्रांसीसी दूतावास ने सीधे सीएम को पत्र लिखकर इस बात पर नाराजगी जाहिर की है कि रीको ने जमीन के लिए जो कीमत ऑफर की है, वह शुरुआती सहमति की तय दरों से काफी अधिक है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, फ्रांसीसी कंपनी सॉफ्टलेट माल्ट इंडिया ने राजस्थान में शराब और बीयर उद्योग के लिए रॉ माल्ट बनाने का बड़ा प्लांट लगाने के लिए राज्य सरकार से एक एमओयू किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत कोटा में 50 एकड़ जमीन चिह्नित की गई थी। योजना के अनुसार कंपनी को दो चरणों में कुल 1200 करोड़ रुपये का निवेश करना था। इसमें 2027-28 तक 3 लाख टन उत्पादन क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया जाना है।
सीएम की सहमति, फिर भी जमीन में देरी
हालांकि, अब फ्रांसीसी दूतावास की ओर से लिखे पत्र में यह स्पष्ट किया है कि सीएम स्तर पर सकारात्मक बातचीत और सहमति बनने के बावजूद रीको जमीन देने में देरी कर रहा है। कंपनी का आरोप है कि रीको ने जमीन के लिए अब जो कीमत प्रस्तावित की है, वह शुरुआती सहमति के समय तय की गई दरों से काफी अधिक है।
जमीन आवंटन की समय सीमा भी बढ़ाकर अब दिसंबर 2026 कर दी है। कंपनी का मानना है कि इतनी लंबी देरी से प्रोजेक्ट के अधर में लटकने की आशंका बढ़ गई है।
प्रोजेक्ट पर मंडराया संकट
फ्रांसीसी राजदूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ये नई शर्तें प्रोजेक्ट को गंभीर जोखिम में डाल रही हैं। पत्र में कहा गया कि कंपनी राजस्थान में निवेश करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा अनिश्चितता ने प्लांट स्थापना को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। फ्रांसिसी राजदूत का यह पत्र सीधे तौर पर राजस्थान की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पॉलिसी पर सवाल भी उठा रहा है।
सीएम से नई बैठक करने का अनुरोध
फ्रांसीसी राजदूत ने पत्र में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक नई बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया है।
उद्योग विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि राजस्थान सरकार वर्तमान में प्रदेश को एक इन्वेस्टमेंट हब बनाने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में फ्रांस के राजदूत का यह पत्र सरकार के लिए एक चुनौती के रूप में सामने आया है।
रीको का दावा, कंपनी पहले फैसला करे
विवाद बढ़ता देख रीको की एमडी शिवांगी स्वर्णकार का कहना है कि कंपनी को उसकी जरूरत के अनुरूप कई विकल्प दिखाए गए हैं। विकसित और अर्द्ध-विकसित भूमि की दरों में अंतर होना स्वाभाविक है। जैसे ही कंपनी निर्णय लेगी, उसे नियमों के तहत भूमि का आवंटन कर दिया जाएगा।
कोटा में ही क्यों माल्ट प्लांट?
फ्रांसीसी कंपनी सॉफ्टलेट माल्ट इंडिया कोटा में 50 एकड़ जमीन पर यह उच्च क्षमता वाला एआई संचालित प्लांट लगाना चाहती है। इसके पीछे कंपनी की सोच है कि वहां प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा पानी की उपलब्धता बेहतर है। कंपनी पहले फेज में प्लांट की माल्टा उत्पादन क्षमता 1 लाख टन रखेगी। बाद में दूसरे फेज में 2 लाख टन की अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी। इस प्लांट पर 1200 करोड़ रुपये का कुल निवेश होगा।
बढ़ते बीयर बाजार पर नजर
सॉफ्टलेट माल्ट इंडिया भारत में बढ़ते बीयर और व्हिस्की बाजार का लाभ उठाने के लिए तेजी से उपस्थिति दर्ज कर रही है। उसका अभी एक प्लांट राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिकी क्षेत्र में है। इसकी मौजूदा माल्ट उत्पादन क्षमता 18000 टन है। चूंकि भिवाड़ी में पानी का बेहद संकट है और वहां इसका विरोध हो रहा है। ऐसे में उसका अब कोटा में बड़ा प्लांट लगाने की योजना है, जहां राजस्थान का सर्वाधिक पानी है। यह कंपनी शराब कंपनियों के लिए रॉ माल्ट सप्लाई करेगी।
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