भ्रष्टाचार पर सरकार का एक्शन, ढ़ाई साल में 26 अफसरों की छुट्टी, 28 की पेंशन आजीवन बंद
News In Short
- भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप में 1 RAS सहित 26 दागी अधिकारी नौकरी से निकाले गए।
- रिटायरमेंट के बाद भी दोषी पाए 28 अफसर की पेंशन और ग्रेच्युटी स्थायी रूप से बंद।
- कॉकटेल सिस्टम खत्म करने के लिए एक IAS सहित 435 कर्मचारी किए गए सस्पेंड।
- 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी,अब मुकदमा और 577 केसों में जांच जारी।
News In Detail
राजस्थान में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और लापरवाही के मामलों में दागी पाए अफसरों के खिलाफ एक्शन लगातार जारी है। इस प्रक्रिया के तहत ढ़ाई साल में अब तक 1 RAS समेत कुल 26 अधिकारियों को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। एक IAS अधिकारी समेत 435 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। रिटायर हो चुके 28 अधिकारियों को वित्तीय अनियमिता का दोषी पाए जाने पर उनकी पेंशन हमेशा के लिए बंद कर दी है।
इनको हटाया है नौकरी से
राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप में अदालत से दोषी घोषित होने वाले तथा वित्तीय अनियमितता के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
बर्खास्त होने वालों में मुख्य रुप से RAS अधिकारी नर सिंह, तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह (सामाजिक न्याय) व संजय पांडे (पर्यटन), कृषि उपनिदेशक डॉ. पीआर खींची व राजेश कुमार नैनावत और पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन विकास अधिकारी भरत प्रकाश मेघवाल शामिल हैं।
इनके अलावा सहायक आचार्य डॉ. सुनील व्यास व वैजयंती मीणा, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा, सहायक आयुक्त महावीर सिंह आसीवाल, प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर, कृषि अधिकारी शीना लुकोश, व्याख्याता अमृत लाल मीणा, लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर और चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा व डॉ. मनोहर लाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
इनकी हुई है पेंशन बंद
घोटालों और पद के दुरुपयोग में लिप्त पाए गए 28 अधिकारियों की रिटायरमेंट के बाद आजीवन पेंशन और ग्रेच्युटी को स्थायी रूप से रोक दिया है।
पेंशन गंवाने वाले इन अधिकारियों में RAS फतेह राय सोनी, UIT अलवर के तत्कालीन उप सचिव बनवारी लाल मीणा, RPS ओमप्रकाश चंदोलिया और खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक राकेश हीरात शामिल हैं। झालावाड़ के तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विलास राव गुल्हाने को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है।
108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति
ACB और अन्य जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी है। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब आय से अधिक संपत्ति,ट्रैप और पद के दुरुपयोग के मामलों में आरोपी अधिकारियों पर अदालत में मुकदमा चलेगा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत भी 37 मामलों में प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। वर्तमान में विभिन्न विभागों से जुड़े 577 प्रकरणों की जांच चल रही है, जबकि अखिल भारतीय सेवा (AIS) के 9 अधिकारियों से जुड़ी फाइलें भी प्रक्रियाधीन हैं।
लापरवाही पर सरकार का रुख
सरकार का दावा है कि फाइलों को बिना कारण लंबित रखने, सरकारी धन का दुरुपयोग करने और जनता के काम में बेवजह देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक जवाबदेही से बचने वाले कर्मचारियों को सेवा में बख्शा नहीं जाएगा।
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