₹6.80 करोड़ के ‘बॉस स्कैम’ में एक और गिरफ्तारी: कमीशन पर दिया बैंक खाता

Raghvendra Singh Rathore | Sept 10, 2026, 19:26 IST
बॉस स्कैम में एक और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 8 पकड़े
राजस्थान के बाड़मेर से आरोपी तगाराम गिरफ्तार, अब तक 8 आरोपी पकड़े गए, म्यूल अकाउंट से कई खातों में घुमाते थे पैसा, फिर USDT में बदलकर मास्टरमाइंड तक पहुंचाने का आरोप

समझें क्या है पूरा मामला

  • 6.80 करोड़के बॉस स्कैम में एकऔर आरोपी गिरफ्तार
  • बैंक खाता किराए परदेकर फंसा बाड़मेर कातगाराम
  • साइबर ठगीका पैसा क्रिप्टो मेंबदलकर होता था पार
  • टेलीग्राम पर बिकतीथी बैंक खाते और सिमकी किट
  • अब तक 8गिरफ्तारियां, पुलिसखंगाल रही पूरानेटवर्क

राजस्थान पुलिस ने 6.80 करोड़ रुपए के ‘बॉस स्कैम’ मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बाड़मेर निवासी तगाराम को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए उपलब्ध कराया था। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।



पुलिस की जांच में साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का पूरा नेटवर्क सामने आया है। आरोप है कि गिरोह म्यूल बैंक खातों में रकम मंगवाने के बाद उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लेयरिंग करता था। इसके बाद रकम को USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे भेजा जाता था।



हरेन्द्र को दिया बैंक खाता, आए 2.50 लाख रुपए

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी जांच में तगाराम की भूमिका सामने आई। आरोपी ने अपना बैंक खाता हरेन्द्र उर्फ हनी को उपलब्ध कराया था।



पुलिस के अनुसार, इसी खाते में 24 अगस्त 2026 को 2.50 लाख रुपए आए थे। इसके बाद तगाराम, हरेन्द्र के साथ बैंक पहुंचा और खाते से रकम निकालने की कोशिश की। जांच में उसकी भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उसे बाड़मेर से गिरफ्तार कर जयपुर लाया।



म्यूल अकाउंट से क्रिप्टो तक ऐसे चलता था नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर ठगी की रकम को हासिल करने और उसकी मनी ट्रेल छिपाने के लिए कई स्तरों पर काम करता था। इसके लिए म्यूल बैंक अकाउंट, ATM, चेक, UPI, QR कोड और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किया जाता था।



आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि टेलीग्राम ग्रुप के जरिए बैंक खाते, ATM, सिम और पासबुक की किट उपलब्ध कराई जाती थीं। ठगी की रकम म्यूल अकाउंट में आते ही उसे ATM या चेक के जरिए निकालने अथवा UPI, QR कोड, CDM और दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करने की कोशिश की जाती थी।



कई खातों में घुमाकर USDT में बदलते थे रकम

पुलिस के मुताबिक, रकम की मनी ट्रेल छिपाने के लिए उसे एक बैंक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता था। कई स्तरों की इस लेयरिंग के बाद रकम को USDT या दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे भेजा जाता था।



जांच में क्रिप्टो लेन-देन के लिए Binance जैसे प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम पर उपलब्ध QR कोड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। पुलिस का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए रकम आखिर में नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी।



WhatsApp से बैंक ट्रांजेक्शन तक खंगाल रही पुलिस

अब पुलिस इस नेटवर्क की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है। इसके लिए WhatsApp रिकॉर्ड, CDR, CAF ID, IPDR और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और नेटवर्क में अभी कितने लोग शामिल हैं।



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