राजस्थान बजट 2027-28 की तैयारी शुरू, गैरजरूरी खर्च पर लगेगी रोक
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू कर दी है।
- बजट से जुड़े प्रस्ताव और BFC फॉर्म अब IFMS 3.0 के जरिए ऑनलाइन भेजे जाएंगे।
- विभागों की योजनाओं को विकसित राजस्थान-2047 के 13 सेक्टर और SDG से जोड़ा जाएगा।
- विभागों को गैरजरूरी खर्च रोकने और एक जैसे काम वाली योजनाओं को मिलाने के प्रस्ताव देने होंगे।
- बजट प्रस्ताव, राजस्व अनुमान और दूसरे वित्तीय आंकड़े भेजने के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई।
राजस्थान में अगले बजट की तैयारी शुरू हो गई है। भजनलाल सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट के लिए सभी विभागों से हिसाब-किताब और प्रस्ताव मांगे हैं। इस बार पूरी बजट प्रक्रिया IFMS 3.0 के जरिए ऑनलाइन होगी। विभागों को यह भी बताना होगा कि उनकी योजनाएं विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्यों से कैसे जुड़ती हैं। साथ ही सरकार ने गैरजरूरी खर्च कम करने और एक जैसे काम वाली योजनाओं को आपस में मिलाने या बंद करने के प्रस्ताव भी मांगे हैं।
वित्त विभाग ने सभी विभागों को भेजे निर्देश
वित्त विभाग ने बजट 2027-28 की तैयारी को लेकर सभी विभागाध्यक्षों और बजट नियंत्रण अधिकारियों के लिए सर्कुलर जारी किया है। इसमें बजट बनाने से लेकर पैसे के इस्तेमाल तक की प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सरकार का फोकस बजट प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाने के साथ सरकारी खर्च पर नजर रखने पर है।
IFMS 3.0 पर होगा बजट का पूरा काम
इस बार बजट से जुड़ा पूरा काम ऑनलाइन IFMS 3.0 के जरिए किया जाएगा। विभाग अपने बजट अनुमान और BFC फॉर्म भी इसी सिस्टम पर भेजेंगे। BFC से जुड़ी जानकारी को दो हिस्सों में रखा गया है। पहला BFC रिपोर्ट का होगा, जिसमें जानकारी अपने आप अपडेट होगी। दूसरा BFC फॉर्मेट का होगा, जिसे संबंधित विभागों को ऑनलाइन भरना होगा। इससे बजट से जुड़ी जानकारी एक ही सिस्टम पर उपलब्ध रहेगी और विभागों के खर्च व प्रस्तावों पर नजर रखना आसान होगा।
विकसित राजस्थान-2047 से जुड़ेंगी योजनाएं
इस बार विभाग केवल बजट की मांग भेजकर अपना काम पूरा नहीं कर पाएंगे। उन्हें अपनी योजनाओं को विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्यों से भी जोड़ना होगा। इसके लिए सभी विभागीय योजनाओं की मैपिंग विकसित राजस्थान-2047 के 13 सेक्टरों से की जाएगी। इसके साथ योजनाओं को संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों यानी SDG और उनके 169 टारगेट से भी जोड़ा जाएगा। इससे सरकार यह देख सकेगी कि किस योजना पर होने वाला खर्च लंबे समय के किस लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर रहा है।
गैरजरूरी खर्च रोकने के भी मांगे प्रस्ताव
वित्त विभाग ने सरकारी खर्च कम करने पर भी जोर दिया है। सभी विभागों से पूछा गया है कि कहां गैरजरूरी खर्च रोका जा सकता है। इसके साथ ऐसी योजनाओं की पहचान भी करनी होगी, जिनका मकसद लगभग एक जैसा है। विभागों को बताना होगा कि इनमें से किन योजनाओं को आपस में मिलाया जा सकता है और किन योजनाओं को बंद करने की जरूरत है। यानी बजट में नई योजनाओं और खर्च की मांग के साथ पुराने खर्च का हिसाब भी देखा जाएगा।
इन सेक्टर पर रहेगा खास फोकस
बजट तैयार करते समय कुछ खास सेक्टर के लिए होने वाले खर्च पर अलग से ध्यान दिया जाएगा। इसमें जेंडर बजट, चाइल्ड बजट, ग्रीन बजट, कृषि और यूथ से जुड़े बजट शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति सब-प्लान और ट्राइबल सब-प्लान के तहत होने वाले खर्च का भी अलग हिसाब रखा जाएगा। इन सेक्टर के लिए विभागों को अपनी जरूरत और प्रस्ताव बजट प्रक्रिया के दौरान देने होंगे।
खर्च के कोड भी बदलने की तैयारी
सरकार आने वाले समय में सरकारी खर्च दर्ज करने के तरीके में भी बदलाव करने जा रही है। CAG के निर्देशों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2028-29 से नए Object Head Codes लागू किए जाएंगे। ऑब्जेक्ट हेड कोड आसान भाषा में वह कोड होता है, जिससे पता चलता है कि सरकार ने पैसा किस काम पर खर्च किया। मसलन वेतन, मजदूरी, यात्रा या ऑफिस खर्च के लिए अलग-अलग कोड होते हैं।
नई व्यवस्था के लिए IFMS सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव मार्च 2027 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद जून 2027 तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी।
केंद्रीय योजनाओं का पैसा भी ऑनलाइन सिस्टम से
केंद्र सरकार की मदद से चलने वाली योजनाओं के पैसे के लेन-देन के लिए भी डिजिटल सिस्टम पर जोर दिया गया है। सर्कुलर के मुताबिक केंद्र प्रवर्तित योजनाओं का संचालन 1 नवंबर 2025 से SPARSH और RBI के e-Kuber प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाना अनिवार्य है। इस व्यवस्था का मकसद योजनाओं में आने और खर्च होने वाले पैसे का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से रखना है।
विभागों को समय पर देना होगा पूरा हिसाब
वित्त विभाग ने बजट तैयार करने के लिए तारीखें भी तय कर दी हैं। IFMS पर कर्मचारियों, संपत्ति, सरकारी वाहनों, PD और बैंक खातों की जानकारी अपडेट करने के लिए 22 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया था। विभागाध्यक्षों को बजट नोट के साथ सभी जरूरी फॉर्म 30 सितंबर 2026 तक भेजने हैं। इसके बाद प्रशासनिक विभाग इन्हें 7 अक्टूबर 2026 तक वित्त विभाग को भेजेंगे। राजस्व से होने वाली कमाई का अनुमान 10 नवंबर 2026 तक देना होगा। वहीं CAG की ओर से कर्ज और जमा से जुड़ी जानकारी 16 नवंबर 2026 तक वित्त विभाग को भेजी जानी है।
BFC की बैठक से कम से कम 7 दिन पहले प्रस्ताव पहुंचना जरूरी होगा। इन बैठकों में संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी भी जरूरी रखी गई है।
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