राजस्थान में ऊंची इमारतों का रास्ता साफ, बिल्डिंग बायलॉज में बड़ा बदलाव

Jageshwar prasad | Jun 02, 2026, 11:05 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान सरकार ने नए बिल्डिंग बायलॉज लागू कर शहरों में बहुमंजिला इमारतों की ऊंचाई पर लगा 70 मीटर का प्रतिबंध हटा दिया है। अब पुख्ता फायर फाइटिंग सिस्टम वाली इमारतें कितनी भी ऊंची बनाई जा सकेंगी। नियमों में इंडियन स्टैंडर्ड कोड लागू किया गया है।

News In Short

  • राजस्थान में अब 70 मीटर से ऊंची इमारतें बनाने का रास्ता साफ, नया बिल्डिंग बायलाज लागू।
  • फायर फाइटिंग सिस्टम होने पर इमारतों की ऊंचाई पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।
  • वर्ष 2020 से 70 मीटर की ऊंचाई सीमा थी, अब हाईराइज बिल्डिंग के लिए खुला रास्ता।
  • नए बायलाज में इंडियन स्टैंडर्ड कोड लागू, नेशनल बिल्डिंग कोड की जगह ली।
  • बिना भवन स्वीकृति मकान बनने पर संबंधित अधिकारी होंगे जिम्मेदार।

News In Detail

राजस्थान में नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज लागू होंगे। सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए शहरों में बहुमंजिला (हाईराइज) इमारतों की ऊंचाई पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। अभी शहरों में 70 मीटर की ऊंचाई तक ही बिल्डिंग बनाने की सीमा तय थी।



हाईराइज बिल्डिंग की ऊंचाई का यह प्रतिबंध हटाने का फैसला उन इमारतों पर लागू होगा, जिनमें पुख्ता फायर फाइटिंग सिस्टम (अग्निशमन प्रणाली) उपलब्ध होगा।



क्यों लगा था 70 मीटर का प्रतिबंध?

साल 2020 से राजस्थान में सबसे ऊंची फायर लेडर की ऊंचाई के आधार पर अधिकतम 70 मीटर ऊंचे भवन निर्माण की अनुमति का प्रावधान लागू किया गया था। इसका कारण यह था कि अग्निशमन विभाग के पास 70 मीटर से ऊपर की इमारतों में आग बुझाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे।



लेकिन अब नए नियमों के तहत यदि भवन निर्माता खुद ही भवन में पुख्ता फायर फाइटिंग सिस्टम लगाते हैं, तो भवन की ऊंचाई कितनी भी बढ़ाई जा सकेगी।



क्या बदलेगा नए नियमों में?

नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में अब इंडियन स्टैंडर्ड कोड को लागू किया गया है, जबकि पहले नेशनल बिल्डिंग कोड प्रभावी थे। अब भवनों की निर्माण स्वीकृति से पहले पंजीकृत आर्किटेक्ट (वास्तुकार) सहित संबंधित हितधारकों को इंडियन स्टैंडर्ड कोड की पालना करनी होगी। यह नया इंडियन स्टैंडर्ड कोड मुख्य रूप से भवन निर्माण स्वीकृति, पूर्णता प्रमाण पत्र और अधिवास प्रमाण पत्र से संबंधित है।



अधिकारी होंगे जिम्मेदार

यूडीएच विभाग ने इसकी पालना सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को पाबंद कर दिया है। नए नियमों के तहत अब यदि बिना भवन स्वीकृति के कोई मकान बनता है तो इसके लिए संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। इससे पहले, भवन निर्माण की फायर एनओसी लेने से पहले भवन की ऊंचाई से संबंधित दस्तावेज मांगे जाते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था भी बदल गई है।



दूसरी बार बदले नियम

वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में दूसरी बार बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव किया गया है। इससे पहले सरकार ने कुछ अन्य प्रावधानों में भी संशोधन किए थे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से शहरों में ऊंची इमारतों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आवासीय और वाणिज्यिक दोनों क्षेत्रों में विकास होगा।



हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी ऊंची इमारतों के निर्माण से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह से मजबूत हो और इमारतों में अन्य सुरक्षा मानकों का भी पालन किया जाए।



निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा

इस फैसले का रियल एस्टेट सेक्टर में स्वागत किया जा रहा है। डेवलपर्स का कहना है कि अब वे ज्यादा ऊंची इमारतें बना सकेंगे, जिससे जमीन के बढ़ते दामों के बीच लोगों को सस्ते विकल्प मिल सकेंगे। साथ ही, इससे शहरों में फैलाव को रोकने में भी मदद मिलेगी और सघन विकास को बढ़ावा मिलेगा।



FAQ

  1. बिल्डिंग बायलाज क्या होता है?
    बिल्डिंग बायलॉज (Building Bye-laws) या भवन उपनियम स्थानीय सरकार, विकास प्राधिकरणों (जैसे जेडीए) या नगर निगमों द्वारा बनाए गए कानूनी नियमों और विनियमों का एक समूह है। सरल शब्दों में, यह घर या व्यावसायिक इमारत बनाने के लिए सरकार द्वारा तय की गई गाइडलाइन है, जिसका पालन करना हर मकान मालिक और बिल्डर के लिए अनिवार्य होता है। यदि आपका कंस्ट्रक्शन प्लान इन बायलॉज के अनुरूप नहीं होता, तो विकास प्राधिकरण आपके बिल्डिंग मैप (नक्शे) को पास नहीं करता है।

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