मंत्रियों की नहीं सुन रहे हैं अधिकारी, अब कार्रवाई की तैयारी

Ashish Bhardwaj | Aug 26, 2026, 10:35 IST
राजस्थान ब्यूरोक्रेसी
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के सेवा विस्तार के बाद राजस्थान की टॉप ब्यूरोक्रेसी में बड़ा बदलाव संभव है। इस बीच स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और वन विभाग में मंत्री-अफसर विवाद की तीन कहानियां सामने आई हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के बाद राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में बदलाव की चर्चा।
  • कलेक्टर से लेकर ACS और सचिव स्तर तक फेरबदल संभव।
  • स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और वन विभाग में मंत्री-अफसर विवाद सामने आए।
  • आचार संहिता के कारण तबादलों के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी।
  • पंचायत चुनाव से पहले नई प्रशासनिक टीम की तैयारी के संकेत।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के सेवा विस्तार के बाद राजस्थान की टॉप ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल संभव है। कलेक्टर से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव और सचिव स्तर तक के अधिकारी हटाए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव पंचायत चुनाव से पहले नई टीम के साथ काम करना चाहते हैं। इसी बीच कुछ विभागों में मंत्री और अफसरों के बीच टकराव की कहानियां भी सामने आई हैं।



आचार संहिता के बीच संभव है बड़ा बदलाव

फिलहाल प्रदेश में निकाय चुनावों को लेकर आचार संहिता लागू है। ऐसे में सरकार राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति से ही अफसरों के तबादले कर सकती है।



सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव पंचायत चुनाव से पहले नई टीम के साथ मैदान में उतरना चाहते हैं। इसी वजह से कलेक्टर से लेकर वरिष्ठ अफसरों तक के तबादले की चर्चा तेज हो गई है। इनमें वे अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी अपने विभाग के मंत्रियों से नहीं पट रही है।



स्वास्थ्य मंत्री और प्रिंसिपल सेक्रेटरी में विवाद

हाल ही में तबादलों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह और विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी गायत्री राठौड़ के बीच विवाद सामने आया। मंत्री गजेंद्र सिंह ने 5 और 8 अगस्त को निर्देश दिए थे कि मुकेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता (एनएचएम) को तत्काल प्रभाव से मूल विभाग जल संसाधन विभाग भेजा जाए। साथ ही देवेंद्र कुमार मीना, मुख्य अभियंता (स्वायत्त शासन विभाग) को स्वास्थ्य विभाग में लगाया जाए।



17 अगस्त तक प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने इस आदेश की पालना रिपोर्ट मंत्री को नहीं भेजी थी। इस पर मंत्री गजेंद्र सिंह ने नोटशीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, "यह खेद का विषय है।" उन्होंने आगे लिखा कि आदेश की पालना तत्काल कराते हुए पालना रिपोर्ट बिना देरी भेजी जाए।



हालांकि बाद में यह विवाद सुलझ गया। अगले ही दिन 18 अगस्त को मंत्री के आदेशों की पालना कर दी गई। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह का अफसरों के साथ टकराव इससे पहले भी सामने आ चुका है। कुछ समय पहले उन्होंने अपने विशिष्ट सहायक आरएएस अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री को हटाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिखी थी। बाद में सरकार ने लिग्री की जगह आरएएस अधिकारी विभु कौशिक को नियुक्त किया।



स्कॉलरशिप बैन पर मंत्री और सचिव आमने-सामने

राज्य के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने पिछले साल पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में फर्जीवाड़ा करने वाली 20 संस्थाओं पर बैन लगाया था। आरोप है कि इन संस्थाओं ने छात्रों के नाम पर फर्जी दस्तावेज भेजकर करोड़ों रुपए की छात्रवृत्ति गलत तरीके से हासिल की।



बैन के बाद ये संस्थान अब स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे और इनकी लॉग-इन आईडी भी बंद कर दी गई हैं। इससे इन संस्थानों में पढ़ने वाले एससी-एसटी छात्र स्कॉलरशिप से वंचित हो रहे हैं।



सूत्रों के मुताबिक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत चाहते हैं कि एससी-एसटी छात्रों को छात्रवृत्ति से वंचित न रखा जाए और उन्हें कुछ रियायत दी जाए। लेकिन विभाग की तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने किसी भी तरह की रियायत देने से इनकार कर दिया था। बाद में अपर्णा अरोड़ा का तबादला हो गया, लेकिन उनकी जगह आए दिनेश कुमार भी अब तक रियायत नहीं दे रहे हैं।



वन विभाग में तबादलों को लेकर रहा विवाद

वन विभाग में जुलाई 2026 में आईएफएस अधिकारियों के तबादले से पहले ही उन पदों पर आरएफएस अधिकारियों को लगाए जाने से विवाद खड़ा हुआ था। बाद में यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा।



दरअसल आईएफएस अधिकारियों के तबादले से पहले ही 4 आरएफएस अधिकारियों को पोस्टिंग दे दी गई थी। जयपुर उत्तर में आईएफएस देवेंद्र सिंह की जगह आरएफएस मनफूल बिश्नोई, अलवर में आईएफएस राजेंद्र हुड्डा की जगह आरएफएस ओमप्रकाश शर्मा, चित्तौड़गढ़ में आईएफएस मृदुला सिंह की जगह आरएफएस सुनील कुमार सिंह और उदयपुर उत्तर में आईएफएस अजय चित्तौड़ा की जगह आरएफएस देवेंद्र तिवारी को पोस्टिंग दी गई थी।



सूत्रों के मुताबिक ट्रांसफर लिस्ट को लेकर वनमंत्री संजय शर्मा और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार के बीच मतभेद रहे थे। बाद में अगस्त 2026 में आईएफएस ट्रांसफर लिस्ट जारी कर यह विवाद सुलझा लिया गया।



आखिर क्यों होता है मंत्रियों और अफसरों में टकराव

अधिकारी जनता से जुड़े जरूरी काम और निर्देश समय पर पूरे नहीं करते। जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में मन मुताबिक काम या तबादले चाहते हैं।



वहीं दूसरी ओर अधिकारी नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर बात मानने से बचते हैं। यहीं से मंत्रियों और अफसरों के बीच टकराव की शुरुआत होती है।



आगे क्या

फिलहाल आचार संहिता के कारण बड़े पैमाने पर तबादलों में कुछ समय लग सकता है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक निकाय और पंचायत चुनाव के आसपास प्रशासनिक फेरबदल की संभावना बनी हुई है।



आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि किन विभागों में और किन अफसरों को बदला जाता है।



FAQ

  1. राजस्थान की टॉप ब्यूरोक्रेसी में बदलाव की चर्चा क्यों हो रही है?
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के सेवा विस्तार के बाद यह चर्चा तेज हुई है। सूत्रों के मुताबिक वे पंचायत चुनाव से पहले नई टीम चाहते हैं। इसमें मंत्रियों से न पटने वाले अफसर भी शामिल हो सकते हैं।
  2. स्वास्थ्य मंत्री और प्रिंसिपल सेक्रेटरी के बीच विवाद किस बात पर हुआ?
    मंत्री गजेंद्र सिंह के तबादला आदेश की पालना रिपोर्ट समय पर नहीं भेजी गई थी। इस पर मंत्री ने नोटशीट पर कड़ी टिप्पणी की। बाद में अगले ही दिन आदेश की पालना हो गई।
  3. स्कॉलरशिप बैन को लेकर मंत्री और सचिव में मतभेद क्यों है?
    मंत्री अविनाश गहलोत चाहते हैं कि एससी-एसटी छात्रों को स्कॉलरशिप से वंचित न रखा जाए। लेकिन विभाग के सचिव फर्जीवाड़े में शामिल संस्थानों पर बैन में रियायत देने से इनकार कर रहे हैं। यह मामला अब तक अनसुलझा है।

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