डोटासरा ने CM को बताया 'पर्ची मुख्यमंत्री', बोले- निकाय चुनाव में जनादेश से खिलवाड़
5 पॉइंट में समझें पूरा मामला
- राजस्थान निकाय प्रमुख चुनाव पर बढ़ा सियासी घमासान।
- गोविंद सिंह डोटासरा ने CMO पर लगाए गंभीर आरोप।
- डोटासरा ने कई निकायों में दबाव बनाने का दावा।
- मुख्यमंत्री भजनलाल से पूछा जनादेश का क्या मतलब।
- कार्यकर्ताओं से मांगे घटनाओं के पूरे सबूत।
राजस्थान में महापौर, सभापति और पालिका अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रही सियासी लड़ाई और तेज हो गई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अब सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सीएमओ और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साधा।
उनका आरोप है कि जिन निकायों में भाजपा के पास बहुमत नहीं, वहां कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव बनाया जा रहा। डोटासरा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ऐसी हर घटना का सबूत जुटाकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पार्टी के वॉर रूम तक पहुंचाने को कहा।
डोटासरा ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
डोटासरा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट कर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि निकाय प्रमुखों के चुनाव में चल रही राजनीतिक गतिविधियों का संचालन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से आए कुछ नेता कर रहे हैं।
डोटासरा का आरोप है कि CMO में बैठे अधिकारियों के जरिए कलेक्टर और एसपी तक निर्देश पहुंचाए जा रहे हैं। कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाने, मुकदमे दर्ज करने और उन्हें भाजपा के पक्ष में लाने की कोशिश की जा रही है। एक दिन पहले भी डोटासरा ने इसी तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि CMO के अधिकारियों के जरिए जिला स्तर के अफसरों पर दबाव बनाया जा रहा है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि निर्दलीय पार्षदों को भाजपा के पक्ष में करने के लिए दबाव या खरीद-फरोख्त जैसी कोई बात नहीं है।
डोटासरा ने CM भजनलाल शर्मा को घेरा
डोटासरा ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए ‘पर्ची मुख्यमंत्री’ जैसे राजनीतिक तंज का इस्तेमाल किया। डोटासरा ने सवाल किया कि अगर जनता के वोट से आए नतीजों को सत्ता और प्रशासन के दम पर बदलने की कोशिश होगी तो चुनाव कराने का मतलब क्या रह जाएगा?
उन्होंने दावा किया कि भाजपा उन जगहों पर भी बोर्ड बनाने की कोशिश कर रही है, जहां कांग्रेस या निर्दलीय मजबूत स्थिति में हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। डोटासरा ने दावा किया कि मामला किसी एक नगरपालिका या नगर निगम तक सीमित नहीं है।
उन्होंने भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर, संगरिया, कुचेरा, बहरोड़, बानसूर, दूनी-देवली उनियारा, मंडावा, मांढण, नीमराना, सीकर, लोसल, धोद, कानोड़ और भींडर समेत कई जगहों का नाम लिया।
उनका आरोप है कि इन जगहों से पार्षदों को डराने, मुकदमों का दबाव बनाने और पुलिस-प्रशासन के दखल की शिकायतें मिल रही हैं।
कुचेरा में कांग्रेस पहले ही पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगा चुकी है। वहीं दूनी में एक महिला पार्षद को लेकर सामने आए विवाद पर भी डोटासरा ने सरकार को घेरा था।
'गुजरात मॉडल' का लगाया आरोप
डोटासरा ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा का कथित ‘गुजरात मॉडल’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में सत्ता हासिल करने के लिए जिस तरह राजनीतिक जोड़-तोड़, सरकारी एजेंसियों और सत्ता के इस्तेमाल के आरोप भाजपा पर लगते रहे हैं, उसी तरीके को अब राजस्थान में अपनाया जा रहा है।
अपने पोस्ट में उन्होंने गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। इन राज्यों को लेकर डोटासरा की व्याख्या राजनीतिक आरोप है और भाजपा ऐसे आरोपों को पहले भी खारिज करती रही है।
डोटासरा के ट्वीट में क्या कहा?
डोटासरा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि जिस जनता ने वोट देकर अपना फैसला सुनाया, अगर उसी फैसले को पुलिस और प्रशासन के जरिए प्रभावित किया जाए तो चुनाव की जरूरत ही क्या रह जाती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों पर काम करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि निकाय चुनावों में सत्ता के कथित दुरुपयोग की घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
डोटासरा ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी संदेश दिया। उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं को पीछे नहीं हटने को कहा।
वॉर रूम तक भेजें हर शिकायत
डोटासरा ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की ओर से दबाव बनाने, धमकी देने या सत्ता के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आए तो उसके तथ्य और सबूत जुटाए जाएं।
उन्होंने ऐसी शिकायतों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी या कांग्रेस के वॉर रूम तक पहुंचाने को कहा है।
डोटासरा ने कहा कि हर घटना और संबंधित अधिकारी का रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि आगे जवाबदेही तय की जा सके।
पहले भी दी थी चेतावनी
निकाय प्रमुखों के चुनाव को लेकर डोटासरा पिछले कुछ दिनों से लगातार सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने शुक्रवार को भी पार्षदों की बाड़ेबंदी में पुलिस की कथित दखल पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऐसी स्थिति से प्रदेश में आक्रोश बढ़ सकता है। यदि किसी तरह का मर्डर या खून-खराबा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और राजस्थान पुलिस की होगी।
अब शनिवार को सामने आए उनके नए पोस्ट के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को सीधे CMO और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से जोड़ दिया है। दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस के दबाव और खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज कर रही है। ऐसे में मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष के चुनाव से पहले सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है।
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