राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग जांच, सीपी जोशी की अध्यक्षता में कमेटी गठित
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के आरोपों पर जांच तेज कर दी है
- 346 पार्षदों को कार्रवाई के दायरे में रखने की जानकारी सामने आई
- सीपी जोशी की अध्यक्षता वाली कमेटी सात दिन में रिपोर्ट देगी
- कई निकायों में संख्या बल के बावजूद बदले चुनावी नतीजे
- गुप्त मतदान के बीच क्रॉस वोटिंग के आरोपों की होगी जांच
राजस्थान के निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ मतदान और क्रॉस वोटिंग के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है, जो अलग-अलग निकायों में सामने आए मामलों की रिपोर्ट तैयार करेगी। कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
पार्टी के अनुसार, निकाय चुनाव के दौरान कई जगह कांग्रेस के पास संख्या बल होने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी चुनाव हार गए। इसके बाद क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठे। पाली, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर समेत कई निकायों के नतीजों के बाद पार्टी ने स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट मांगी है।
346 पार्षदों पर कार्रवाई की तैयारी
दिए गए पार्टी आंकड़ों के मुताबिक करीब 346 पार्षदों को क्रॉस वोटिंग के आरोपों में कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनके खिलाफ निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हालांकि, क्रॉस वोटिंग के मामले में अंतिम कार्रवाई जांच कमेटी की रिपोर्ट और पार्टी स्तर पर लिए जाने वाले फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
सीपी जोशी की अध्यक्षता में कमेटी
क्रॉस वोटिंग के मामलों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी करेंगे। कमेटी में रामसिंह कस्वां, मुरारीलाल मीणा, कुलदीप इंदौरा, प्रमोद जैन भाया, शकुंतला रावत, हाकम अली, गणेश घोघरा और रघुवीर सिंह राठौड़ को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।कमेटी अलग-अलग जिलों से मिली रिपोर्ट और निकाय चुनाव के नतीजों के आधार पर मामलों की समीक्षा करेगी।
कई निकायों में संख्या बल के बावजूद बदले नतीजे
निकाय चुनाव में कुछ जगह कांग्रेस के पास ज्यादा पार्षद होने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सके। पाली नगर निगम में कांग्रेस के पास 29 पार्षद थे, जबकि भाजपा के पास 21 और निर्दलीयों के पास 15 पार्षद थे। इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 33 वोट मिले।
बीकानेर में भी कांग्रेस के पास 41 पार्षद थे, जबकि भाजपा के 27 पार्षद थे। इसके बावजूद उपमहापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 40 और कांग्रेस प्रत्याशी को 38 वोट मिले। एक वोट अमान्य रहा और एक NOTA को गया। इसके बाद कांग्रेस ने मामले की जांच की मांग की।
अजमेर और जोधपुर में भी उठे सवाल
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के 37 पार्षद थे, जबकि भाजपा के 32। इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 43 और कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट मिले। इसके बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर चर्चा शुरू हुई।
जोधपुर में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बेहद करीबी था। महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 53 और कांग्रेस प्रत्याशी को 47 वोट मिले। चुनाव से पहले कांग्रेस के पास 44 पार्षद थे।
भीलवाड़ा में सिंबल जमा नहीं होने का मामला
निकाय चुनाव के दौरान भीलवाड़ा में पार्टी प्रत्याशियों के सिंबल समय पर जमा नहीं होने का मामला भी कांग्रेस के लिए विवाद का विषय बना। पार्टी स्तर पर इस मामले की जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी चर्चा है।
कांग्रेस से जुड़े नेताओं के अनुसार इस मामले में प्रदेश स्तर के बजाय राष्ट्रीय स्तर से कार्रवाई किए जाने की संभावना है। इस दावे पर अंतिम निर्णय पार्टी की ओर से किया जाना बाकी है।
400 पार्षदों के दावे की भी जांच होगी
पार्टी के भीतर करीब 400 कांग्रेस पार्षदों द्वारा भाजपा के पक्ष में मतदान करने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, गुप्त मतदान होने के कारण किसी व्यक्तिगत पार्षद ने किसे वोट दिया, यह केवल मतदान के आंकड़ों से सीधे साबित नहीं होता। इसलिए ऐसे दावों की पुष्टि के लिए पार्टी की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
अब रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई
कांग्रेस की जांच कमेटी अब अलग-अलग निकायों से मिली रिपोर्ट का अध्ययन करेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन पार्षदों या नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों को लेकर कांग्रेस की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने कई जगह अपने संख्याबल के आधार पर बोर्ड बनाने की उम्मीद की थी, लेकिन नतीजे अलग रहे। अब सात दिन में आने वाली कमेटी की रिपोर्ट से पार्टी के भीतर कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।