निकाय चुनाव: विधायकों की मनमर्जी पर कांग्रेस का अंकुश, बदला टिकट वितरण पैटर्न

Jageshwar prasad | Aug 27, 2026, 14:12 IST
निकाय चुनावों में राजस्थान कांग्रेस ने खत्म किया विधायक राज
राजस्थान में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने टिकट वितरण में ब्लॉक, जिला और पर्यवेक्षकों की रायशुमारी को सर्वोपरि रखने का फैसला लिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस ने बदला टिकट वितरण का पैटर्न।
  • निकाय चुनावों में राजस्थान कांग्रेस ने खत्म किया विधायक राज।
  • अब टिकटों के चयन में स्थानीय कार्यकर्ताओं को मिलेगी प्राथमिकता।
  • विधायकों का एकतरफा वीटो खत्म, प्रदेश संगठन की सहमति जरूरी।
  • वार्ड पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और रायशुमारी के आधार पर बनेंगे पैनल।

राजस्थान में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस संगठन ने अपनी कमियों को दूर करने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है।



आगामी नगरीय निकाय चुनावों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) में उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी ने विधायक राज की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।



पूर्व के चुनावों में संबंधित क्षेत्र के विधायक या पराजित प्रत्याशियों की पसंद पर ही ज्यादातर वार्डों के टिकट तय कर दिए जाते थे, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति बनती थी। लेकिन इस बार पार्टी ने टिकट वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है।



पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और जमीनी फीडबैक होगा मुख्य आधार

नए फॉर्मूले के तहत प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों को हर वार्ड में जाकर कार्यकर्ताओं, स्थानीय पदाधिकारियों और जनता से सीधा संवाद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।



पर्यवेक्षक अपनी वन-टू-वन रायशुमारी के बाद दावेदारों की राजनीतिक व सामाजिक पृष्ठभूमि का 'फिजिकल वेरिफिकेशन' कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में यह देखा जा रहा है कि संबंधित कार्यकर्ता ने संगठन के लिए क्या काम किया है और उसकी अपने वार्ड में पकड़ कैसी है।



जिताऊ और टिकाऊ कार्यकर्ताओं को ही मिलेगा मौका

कांग्रेस के इस नए पैटर्न का मुख्य उद्देश्य सिफारिशी संस्कृति को खत्म कर 'जिताऊ और टिकाऊ' कार्यकर्ताओं को आगे लाना है। विधायकों के एकतरफा एकाधिकार को समाप्त करते हुए अब तीन-तीन संभावित उम्मीदवारों के पैनल बनाए जा रहे हैं।



इन पैनलों पर जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) और प्रदेश संगठन स्तर पर अंतिम चर्चा के बाद ही उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इससे निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को सीधे संगठन से जुड़ने और अपनी बात रखने का मंच मिल रहा है।



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