राजस्थान कांग्रेस की निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग की जांच, 346 पार्षद और 32 विधायक शामिल
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस ने निकाय चुनाव की क्रॉस वोटिंग की जांच शुरू की है
- 346 पार्षदों के साथ 32 विधायक भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं
- डॉ. सीपी जोशी कमेटी ने जांच की शुरुआत की है
- पाली, अजमेर, भीलवाड़ा और कोटा पर शुरुआती फोकस है
- संदिग्ध भूमिका मिलने पर नेताओं पर कार्रवाई हो सकती है
राजस्थान कांग्रेस में निकाय चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और बगावत को लेकर पार्टी ने अब जांच का दायरा बढ़ा दिया है। 346 पार्षदों के अलावा 32 विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। इन नेताओं का संबंध पाली, जालौर, सिरोही, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, अलवर, भरतपुर, कोटा, नागौर, श्रीगंगानगर और भीलवाड़ा समेत कई जिलों से बताया गया है।
निकाय चुनाव में अजमेर, पाली और भीलवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन और 113 निकायों में सामने आई बगावत व क्रॉस वोटिंग के बाद पार्टी ने मामले को गंभीरता से लिया है। इसी को लेकर डॉ. सीपी जोशी की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने शनिवार से जांच शुरू कर दी है।
सबसे पहले बड़े निकाय चुनावों की जांच
जांच कमेटी का शुरुआती फोकस उन निकायों पर है, जहां कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहने के बावजूद मेयर या उपमहापौर चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
कमेटी सबसे पहले पाली, अजमेर, भीलवाड़ा और कोटा के मेयर चुनाव की पड़ताल करेगी। इसके साथ ही बीकानेर में उपमहापौर और जोधपुर में महापौर चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग की भी जांच की जाएगी।
पार्टी के अंदर माना जा रहा है कि इन चुनावों में पार्टी के पास पर्याप्त संख्या में पार्षद होने के बावजूद परिणाम पक्ष में नहीं आए। ऐसे में क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी बगावत की वजह पता लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
32 विधायक और पूर्व नेता भी जांच के दायरे में
जांच का दायरा केवल पार्षदों तक सीमित नहीं रखा गया है। करीब 32 विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भी कमेटी की जांच के दायरे में हैं। कमेटी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहीं किसी बड़े नेता की भूमिका पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ तो नहीं रही।
पाली, उदयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर समेत कई जगहों पर क्रॉस वोटिंग के दौरान नेताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। यदि जांच में किसी नेता की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो पार्टी स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
जिला अध्यक्ष और प्रभारी से भी पूछताछ
कमेटी पीसीसी की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के आधार पर संबंधित निकायों के प्रभारी, जिला अध्यक्ष और विधायकों को बुलाकर जानकारी लेगी। जरूरत पड़ने पर बगावत करने वाले पार्षदों को भी कमेटी के सामने बुलाया जा सकता है।
जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि किन नेताओं या अन्य लोगों ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ माहौल बनाने या क्रॉस वोटिंग में भूमिका निभाई। पार्टी के अंदर ऐसी भी चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
पाली में पार्षदों के बाड़े से जुड़े सवाल
जांच में पाली का मामला भी अहम रहने वाला है। यहां पार्षदों को एक गुट के साथ रखने के बावजूद दूसरे गुट के पास बड़ी संख्या में पार्षद पहुंचने को लेकर सवाल उठे हैं।
कमेटी यह पता करेगी कि जब अधिकांश पार्षद विधायक के साथ बताए जा रहे थे तो दूसरा गुट बड़ी संख्या में पार्षदों को अपने साथ कैसे ले गया। इसी दौरान विधायक के भाई के साथ मारपीट की घटना का भी जिक्र सामने आया है।
अब जांच कमेटी यह जानने की कोशिश करेगी कि पार्षदों को एक गुट से दूसरे गुट तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या इसमें पार्टी के किसी नेता या पदाधिकारी की कोई भूमिका थी।
बड़े नेताओं की भूमिका भी होगी साफ
कांग्रेस की जांच कमेटी उदयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर में हुई क्रॉस वोटिंग की भी पड़ताल करेगी। खास तौर पर उन नेताओं की भूमिका देखी जाएगी, जिन पर पार्टी प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने या दूसरे गुट को समर्थन देने के आरोप लगे हैं।
जांच के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी। इसके आधार पर जिम्मेदार नेताओं और कार्यकर्ताओं पर संगठनात्मक कार्रवाई का फैसला लिया जा सकता है।