सलमान खान को नहीं मिली राहत, पान मसाले के भ्रामक प्रचार के आरोप, जानिए पूरा मामला
News In Short
- बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को नहीं मिली राहत।
- पान मसाले के भ्रामक प्रचार का मामला।
- राजस्थान उपभोक्ता आयोग ने राहत देने से किया इनकार।
- जिला आयोग ने 18 मार्च को तय की सुनवाई की तारीख।
- सलमान ने पिता की बीमारी के आधार पर मांगी थी छूट
News In Detail
राजस्थान में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को पान मसाला के भ्रामक प्रचार-प्रसार के मामले में राहत नहीं मिली है। सलमान ने पिता की बीमारी के आधार पर जवाब देने व बहस करने के लिए समय मांगा था। लेकिन, उपभोक्ता आयोग ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जयपुर की जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में जवाब पेश करने व बहस के लिए 18 मार्च की तारीख तय कर दी है।
अवमानना का प्रार्थना पत्र
परिवादी योगेंद्र सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग की रोक के बावजूद भी पान मसाने का प्रचार-प्रसार करने पर सलमान व पान मसाला उत्पादक कंपनी के विरुद्ध अवमानना का प्रार्थना पत्र दायर कर रखा है। परिवादी का आरोप है कि 5 और 20 रुपए के पाउच में 4 लाख रुपए किलो मिलने वाली केसर मिलाना संभव नहीं है। लेकिन,सलमान खान के जरिए पान मसाले को केसर युक्त बताकर आमजन के साथ धोखाधड़ी कर रही है। परिवादी ने भ्रामक प्रचार को रोकने और 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाने की गुहार की है।
जमानती वारंट से तलब हैं सलमान
जयपुर की जिला उपभोक्ता आयोग द्धितीय ने सलमान खान को जमानती वारंट से तलब किया था। आयोग अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा ने जमानती वारंट की जिम्मेदारी जयपुर पुलिस आयुक्त को सौंपी थी। इससे पहले भी आयोग ने परिवादी योगेंद्र सिंह की अवमानना याचिका पर सलमान को वारंट जारी किए थे। लेकिन तामील न होने पर दोबारा वारंट जारी हुए थे। आयोग ने सलमान के जमानती वारंट रद्ध करने के प्रार्थना पत्र को भी खारिज कर दिया था।
रोक के बावजूद होर्डिंग्स क्यों ?
पिछली सुनवाई में सलमान और पान मसाला कंपनी के वकीलों ने दावा किया कि उन्होंने आयोग की अवमानना नहीं की। उनका कहना था कि अदालत ने जवाब पेश न होने तक प्रचार रोकने का आदेश दिया था। 15 जनवरी को जवाब दाखिल कर दिया गया। साथ ही, विज्ञापन पान मसाले का नहीं बल्कि सिल्वर कोटेड इलायची का था।
इस पर परिवादी के वकील इंद्र मोहन सिंह हनी ने कहा कि 6 जनवरी को आयोग ने भ्रामक विज्ञापन पर अस्थाई रोक लगाई थी। इसके बावजूद 9 जनवरी को जयपुर, कोटा समेत शहरों में बड़े होर्डिंग्स लगाए गए। यह अदालती आदेश की अवमानना का स्पष्ट मामला है।
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