राजस्थान में अपराध घटने का दावा, पुलिस के ही आंकड़ों में 2,529 ज्यादा केस, घरेलू प्रताड़ना भी बढ़ी
राजस्थान में अपराध कम हो रहे हैं या आंकड़ों में अपराध की अलग-अलग श्रेणियां दिखाकर राहत की तस्वीर पेश की जा रही है? पुलिस मुख्यालय के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अपराध घटने का दावा किया है। लेकिन इन्ही आंकड़ों से कई सवाल खड़े कर रहे हैं। पुलिस ने बीएनएस और आईपीसी के तहत दर्ज मामलों में 1,753 की कमी बताई है।
वहीं, विशेष कानूनों के तहत 4,282 ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। दोनों श्रेणियों के आंकड़े जोड़ें तो पिछले साल के मुकाबले 2,529 अधिक मामले सामने आते हैं। सबसे बड़ा सवाल महिला सुरक्षा से जुड़ा है। पुलिस ने दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में कमी को उपलब्धि बताया है, लेकिन घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और महिलाओं से जुड़े पारिवारिक विवादों के मामले बढ़ गए हैं।
जनवरी से सितंबर 2026 के बीच ऐसे 10,562 मामले दर्ज हुए। पिछले साल इसी अवधि में 9,979 मामले दर्ज हुए थे। यानी 583 मामले ज्यादा। इसके बावजूद पुलिस इस बढ़ोतरी को महिलाओं में बढ़ती जागरूकता और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास से जोड़ रही है।
कुल अपराध घटने का दावा, फिर 2,529 ज्यादा मामले कैसे?
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक जनवरी से सितंबर 2025 के बीच आईपीसी और बीएनएस के तहत 1,47,534 मामले दर्ज हुए थे। इस साल समान अवधि में 1,45,781 मामले दर्ज हुए। यानी 1,753 मामले कम हुए।
लेकिन विशेष कानूनों के आंकड़े दूसरी तस्वीर दिखाते हैं। पिछले साल इन कानूनों के तहत 65,753 मामले दर्ज हुए थे। इस साल यह संख्या बढ़कर 70,035 हो गई। इन दोनों श्रेणियों का संयुक्त आंकड़ा देखें तो 2025 में 2,13,287 और 2026 में 2,15,816 मामले बनते हैं। यानी 2,529 की बढ़ोतरी।
घरों में महिलाओं की प्रताड़ना बढ़ी
महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस के दावों के बीच घरेलू प्रताड़ना के आंकड़े चिंता बढ़ाते हैं। इस साल सितंबर तक घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और संबंधित पारिवारिक विवादों के 10,562 मामले दर्ज हुए। यानी औसतन हर दिन करीब 39 मामले पुलिस तक पहुंचे।
पिछले साल की तुलना में ऐसे मामलों में 5.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पुलिस का तर्क है कि महिलाएं अब बिना डर के शिकायत दर्ज करा रही हैं। इसे पुलिस न्याय व्यवस्था के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मान रही है।
लेकिन सवाल यह है कि शिकायत दर्ज कराने वाली महिलाओं को कितनी सुरक्षा मिली? कितने मामलों में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और कितनी महिलाओं को दोबारा प्रताड़ना से बचाया जा सका? सिर्फ ज्यादा शिकायतें दर्ज होने से यह साबित नहीं होता कि प्रताड़ना की वास्तविक घटनाएं बढ़ी हैं। लेकिन बढ़ते मामलों को केवल पुलिस पर विश्वास का नतीजा बताने के लिए भी अलग सबूत चाहिए।
दुष्कर्म और छेड़छाड़ में कमी, घरेलू प्रताड़ना पर जवाब अधूरा
पुलिस के मुताबिक पिछले साल की तुलना में दुष्कर्म के 356, छेड़छाड़ के 603 और पॉक्सो एक्ट के 478 मामले कम दर्ज हुए हैं। पुलिस ने कालिका यूनिट और एंटी रोमियो स्क्वॉड जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए महिला सुरक्षा के लिए की गई कार्रवाई को प्रभावी बताया है।
लेकिन इसी अवधि में घरेलू प्रताड़ना और संबंधित मामलों में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि महिला सुरक्षा के लिए चल रही योजनाओं का असर घरों के भीतर होने वाली प्रताड़ना पर कितना पड़ा है?
ड्रग्स के 35 प्रतिशत ज्यादा केस, बड़े तस्करों पर कार्रवाई का हिसाब नहीं
प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले साल से 1,815 ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। यह 35.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। आर्म्स एक्ट के तहत 538 और आबकारी एक्ट में 908 मामले ज्यादा दर्ज हुए।
पुलिस इसे सक्रिय कार्रवाई का परिणाम बता रही है। विशेष कानूनों में ज्यादा एफआईआर दर्ज होना पुलिस की बढ़ी हुई कार्रवाई का संकेत हो सकता है, लेकिन इससे अकेले यह साबित नहीं होता कि ड्रग्स या अवैध हथियारों से जुड़े अपराध वास्तव में बढ़ गए हैं।
गंभीर अपराधों में कमी
पुलिस के अनुसार हत्या के 23 और हत्या के प्रयास के 174 मामले कम दर्ज हुए हैं। डकैती में 19.67 प्रतिशत, लूट में 16.40 प्रतिशत और नकबजनी में 4.63 प्रतिशत की कमी आई है। एससी-एसटी एक्ट के तहत भी 954 मामले कम दर्ज हुए हैं।