गलत खाते में हो गया UPI ट्रांजेक्शन? घबराएं नहीं, इन 4 स्टेप्स से आपकी रकम आएगी वापस
News In Short
- राजस्थान साइबर क्राइम पुलिस ने UPI ट्रांजेक्शन पर जारी की एडवाइजरी।
- गलत UPI ट्रांजेक्शन होने पर प्रभावित लोगों के लिए सुझाए जरूरी कदम।
- UPI ऐप के माध्यम से दर्ज करें शिकायत और संबंधित बैंक को दें सूचना।
- जरूरी कदम उठाने से गलत ट्रांजेक्शन की राशि आ सकती है वापस।
- पुलिस ने की लोगों से डिजिटल भुगतान करते समय सतर्क रहने की अपील
News In Detail
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के साथ UPI (Unified Payments Interface) लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि कई बार जल्दबाजी या गलत नंबर डल जाने की वजह से पैसा किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हो जाता है।
राजस्थान साइबर पुलिस ने कहा है कि ऐसे मौके पर घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाने से आपकी रकम वापस आपके खाते में आ सकती है। इसी को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आम लोगों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें गलत UPI ट्रांजेक्शन होने पर अपनाए जाने वाले जरूरी कदम बताए गए हैं।
इन 4 तरीकों से वापस मिल सकता है पैसा
तुरंत सुरक्षित करें डिजिटल सबूत
अगर गलती से पैसा किसी दूसरे खाते में चला जाए तो सबसे पहले उस ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट ले लें और UTR (Unique Transaction Reference) नंबर नोट कर लें। यह 12 अंकों का नंबर ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने और पैसे की रिकवरी में सबसे महत्वपूर्ण होता है।
UPI ऐप के माध्यम से दर्ज करें शिकायत
जिस UPI ऐप, जैसे Google Pay, PhonePe या Paytm से भुगतान किया है, उसकी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री में जाकर “Report a Problem” या “Raise a Dispute” विकल्प चुनकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इससे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तुरंत जानकारी मिल जाती है।
बैंक को तुरंत सूचना प्रदान करें
गलत ट्रांजेक्शन की जानकारी अपने बैंक की शाखा या कस्टमर केयर को तुरंत दें। बैंक को लाभार्थी की UPI ID, ट्रांजेक्शन का समय और राशि का पूरा विवरण लिखित में देना चाहिए। समय पर सूचना देने से रिफंड प्रक्रिया तेज हो सकती है।
NPCI पोर्टल पर दर्ज करें शिकायत
अगर ऐप या बैंक से समाधान नहीं मिलता है तो NPCI (National Payments Corporation of India) के पोर्टल या हेल्पलाइन 1800-120-1740 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
साइबर पुलिस की विशेष सलाह
साइबर क्राइम शाखा ने लोगों से डिजिटल भुगतान करते समय सतर्क रहने की अपील की है। भुगतान करने से पहले मोबाइल नंबर या QR कोड स्कैन करने के बाद दिखाई देने वाले नाम को जरूर जांच लें। किसी भी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर तुरंत भुगतान न करें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि पैसा प्राप्त करने के लिए कभी भी UPI PIN डालने या QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती।
मदद के लिए यहां करें संपर्क
अगर किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की आशंका हो तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
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