साइबर ठगी में राजस्थान को दोहरी राहत: 134 करोड़ रुपए फ्रीज, 11 हजार पीड़ितों को 7.52 करोड़ लौटाने के आदेश

Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 03, 2026, 10:39 IST
ठगों के खातों में फंसे पैसे मिलेंगे वापस
साइबर ठगी का पैसा वापस पाने के नियम बदले
साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर है। अब ठगी की रकम वापस पाने के लिए हर बार कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, बिना जानकारी खाते में ठगी का पैसा आने से फ्रीज हुए बैंक खाते भी जांच के बाद खुल सकेंगे। राजस्थान में इन नई व्यवस्थाओं के जरिए 11 हजार से ज्यादा पीड़ितों को 7.52 करोड़ रुपए लौटाने के आदेश जारी किए गए हैं। पुलिस और बैंकों के तालमेल से संदिग्ध खातों में 134.43 करोड़ रुपए सुरक्षित किए गए हैं।

50 हजार से कम की ठगी में कोर्ट के चक्कर नहीं

पहले साइबर ठगी की रकम आरोपी के खाते में फ्रीज होने के बाद भी पीड़ित को पैसे वापस पाने के लिए पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) के जरिए 50 हजार रुपए से कम की ठगी के मामलों में कोर्ट आदेश की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। शिकायत मिलने पर बैंक और जांच एजेंसी प्राथमिक जांच व सत्यापन कर रकम सीधे पीड़ित के मूल बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं।



राजस्थान में 17 हजार 147 पीड़ितों ने 10.53 करोड़ रुपए वापस पाने के लिए आवेदन किए थे। इनमें 11 हजार 175 पीड़ितों के 7.52 करोड़ रुपए लौटाने के आदेश जारी हो चुके हैं। रकम वापसी की दर 71 प्रतिशत है। इस मामले में राजस्थान देश में 13वें स्थान पर है।



बिना जानकारी खाते में पैसा आया तो फ्रीज खाता खुल सकेगा

कई बार साइबर अपराधी किसी व्यक्ति के बैंक खाते में उसकी जानकारी के बिना ठगी की रकम भेज देते हैं। ऐसे में संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक खाता फ्रीज हो सकता है।



अब ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल (GRM) के जरिए खाताधारक बैंक के माध्यम से शिकायत दर्ज करवा सकता है। बैंक और जांच एजेंसी खाते की KYC और ट्रांजेक्शन की जांच करेंगे। शिकायत सही पाए जाने पर खाता अनफ्रीज किया जा सकता है। शिकायत खारिज होने पर राज्य स्तर पर अपील का विकल्प भी मिलेगा।



राजस्थान में डेबिट फ्रीज के 1 हजार 478 अनुरोध मिले थे। इनमें से 1,073 का निस्तारण हो चुका है। संदिग्ध मामलों में 134.43 करोड़ रुपए ब्लॉक कर सुरक्षित किए गए हैं।



साइबर ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये 6 कदम

अगर आपके बैंक खाते से पैसे निकल गए हैं या ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। शिकायत जितनी जल्दी होगी, रकम रोकने की संभावना उतनी बढ़ सकती है।



1. तुरंत 1930 पर कॉल करें

साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। ठगी की रकम, समय और ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी दें। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे रोकने की संभावना उतनी बढ़ सकती है।



2. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें

सरकार की आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाकर शिकायत दर्ज करें। शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाला नंबर सुरक्षित रखें। आगे की कार्रवाई में यह काम आएगा।



3. बैंक को तुरंत सूचना दें

अपने बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन पर कॉल करके ठगी की जानकारी दें। जरूरत पड़ने पर बैंक खाता, डेबिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएं। बैंक से शिकायत का नंबर भी जरूर लें।



4. ठगी से जुड़े सबूत संभालकर रखें

ठग का मोबाइल नंबर, चैट, SMS, बैंक ट्रांजेक्शन ID, UPI ID और भुगतान के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। इन सबूतों को डिलीट न करें। जांच में इनकी जरूरत पड़ सकती है।



5. पासवर्ड और UPI PIN बदलें

अगर बैंकिंग जानकारी या पासवर्ड ठगों तक पहुंच गया है, तो तुरंत उसे बदलें। किसी को भी OTP, PIN या पासवर्ड न बताएं। अनजान लिंक पर क्लिक करने से भी बचें।



6. रकम वापस पाने के लिए बैंक और पुलिस से संपर्क रखें

शिकायत के बाद बैंक और पुलिस से संपर्क बनाए रखें। अगर ठगी की रकम किसी संदिग्ध खाते में रोक दी गई है, तो जांच और सत्यापन के बाद उसे वापस पाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।



क्या साइबर ठगी के पैसे वापस मिल सकते हैं?

हां, ठगी की रकम वापस मिल सकती है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि शिकायत कितनी जल्दी दर्ज हुई, पैसा कहां पहुंचा और कितनी रकम रोकने में सफलता मिली।



अगर रकम आरोपी के खाते में फ्रीज हो चुकी है, तो उसे वापस पाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। 50 हजार रुपए से कम के मामलों में अब कोर्ट आदेश की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।



पैसे वापस दिलाने के नाम पर दूसरी ठगी से बचें

साइबर ठगी के बाद कुछ लोग पैसे वापस दिलाने का दावा करते हैं। ऐसे अनजान लोगों या एजेंटों को कोई शुल्क न दें। वे रकम वापस दिलाने के बहाने दोबारा ठगी कर सकते हैं।



साइबर ठगी की शिकायत के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।



  • राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930
  • ऑनलाइन शिकायत: cybercrime.gov.in

पुलिस और बैंकों ने बढ़ाई निगरानी

राजस्थान में साइबर ठगी की शिकायतों के निस्तारण के लिए पुलिस और बैंकों ने मिलकर काम किया है। बैंकों में नोडल अधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर जिलों के काम की साप्ताहिक समीक्षा हो रही है।



वरिष्ठ अधिकारी फील्ड अधिकारियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। जिलों में तकनीकी रूप से सक्षम कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है। इन प्रयासों से शिकायतों के निस्तारण में राजस्थान की स्थिति सुधरकर ग्रीन जोन में पहुंच गई है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

साइबर ठगी होने पर समय पर शिकायत करना सबसे जरूरी है। नई व्यवस्था से पीड़ितों को रकम वापस पाने में राहत मिल सकती है। वहीं, बिना जानकारी खाते में ठगी का पैसा आने पर फ्रीज हुए खाते को जांच के बाद खुलवाने का रास्ता भी आसान हुआ है।



आगे क्या?

अब बैंक और पुलिस शिकायतों की जांच के आधार पर रकम वापसी और फ्रीज खाते खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। अगर आपके साथ साइबर ठगी हुई है, तो देर न करें। तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी कार्रवाई होगी, रकम रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।

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