राजस्थान पर कर्ज का दबाव: कमाई का 65% तय खर्च, नई उधारी का 82% पुराना कर्ज चुकाने में

Saurabh Mishra | Sept 16, 2026, 18:54 IST
कर्ज में जकड़ा राजस्थान
कर्ज में जकड़ा राजस्थान
नीति आयोग और CAG की रिपोर्ट में राजस्थान की माली हालत पर दबाव सामने आया है। कर्ज ₹6.32 लाख करोड़ पहुंचा, जबकि नई उधारी का 81.98% पुराने भुगतान में गया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नीति आयोग ने वित्तीय दबाव पर चेताया।
  • राजस्थान पर 6.32 लाख करोड़ का कर्ज।
  • जीएसडीपी के 37% बराबर पहुंचा कर्ज।
  • नई उधारी का 82% हिस्सा पुराने भुगतान में जा रहा।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। सरकार की कमाई भी बढ़ी है। इसके बावजूद खजाने पर दबाव कम नहीं हो रहा। वजह है बढ़ता कर्ज और पहले से तय खर्च। ब्याज, वेतन और पेंशन में कमाई का बड़ा हिस्सा जा रहा है। वहीं नई उधारी का ज्यादातर पैसा भी पुराने दायित्व चुकाने में खर्च हो रहा है।



राजस्थान की माली हालत की यह तस्वीर तीन रिपोर्ट से सामने आती है। पहली, इस साल जारी नीति आयोग फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 (NITI Aayog Fiscal Health Index 2026) है। यह वित्त वर्ष 2023-24 की तस्वीर बताती है। दूसरी, CAG की राजस्थान स्टेट फाइनेंस ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 है। यह रिपोर्ट 21 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश हुई। तीसरा आधार राजस्थान का 2026-27 का बजट है। इन तीनों को साथ देखें तो कमाई और अर्थव्यवस्था बढ़ने के बावजूद कर्ज, ब्याज और घाटे का दबाव साफ दिखाई देता।



नीति आयोग ने राजस्थान की माली हालत पर क्या कहा?

नीति आयोग के मुताबिक राजस्थान की वित्तीय स्थिति पर ऊंचे कर्ज, लगातार घाटे और विकास के लिए सीमित होती वित्तीय गुंजाइश का दबाव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान का डेट टू जीएसडीपी रेशियो लगातार 35% से ऊपर रहा है। बार-बार ऊंचे घाटे के कारण देनदारियां बढ़ी हैं। इससे सरकार के पास अपनी प्राथमिकताओं पर खर्च करने की आजादी सीमित होती है।



नीति आयोग के डेट इंडेक्स (कर्जे) में राजस्थान 18 बड़े राज्यों में 15वें स्थान पर है। उसका स्कोर 32.1 रहा और उसे परफॉर्मर कैटेगरी में रखा गया है। हालांकि खर्च की गुणवत्ता यानी क्वालिटी ऑफ एक्सपेंडिचर के मामले में राजस्थान की स्थिति बेहतर हुई और वह फ्रंट रनर कैटेगरी में पहुंचा है।



पांच साल में सरकार का खर्च कितना बढ़ा?

नीति आयोग के मुताबिक 2019-20 से 2023-24 के बीच राजस्थान का कुल खर्च 39.19% बढ़ा। इसी दौरान पूंजीगत खर्च में 34.59% की बढ़ोतरी हुई। आर्थिक सेवाओं पर पूंजीगत खर्च 56.55% बढ़ा। सामाजिक सेवाओं में यह बढ़ोतरी 12.42% रही। लेकिन सरकार की मुश्किल यह है कि उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से तय खर्चों में बंधा हुआ है। 2023-24 में वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे तय खर्च राजस्व प्राप्तियों के 62.34% के बराबर थे। 2019-20 में यह आंकड़ा 66.71% था। 2022-23 में घटकर 59.37% हो गया था। इसके बाद 2023-24 में फिर बढ़कर 62.34% पर पहुंच गया।



2024-25 में राजस्थान पर कितना कर्ज था?

कैग की रिपोर्ट इस तस्वीर को एक साल आगे ले जाती। 2023-24 में राजस्थान का कुल प्रभावी कर्ज और देनदारियां 5 लाख 59 हजार 767 करोड़ थीं। 2024-25 में यह बढ़कर 6 लाख 32 हजार 325 करोड़ हो गईं। इसके साथ कर्ज और जीएसडीपी का अनुपात भी 36.79% से बढ़कर 37.10% हो गया। 2024-25 में मौजूदा कीमतों पर राजस्थान की GSDP 12.02% बढ़ी। इसके मुकाबले कर्ज 12.96% बढ़ा। यानी इस साल अर्थव्यवस्था के मुकाबले कर्ज की रफ्तार थोड़ी ज्यादा रही।



कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि 2020-21, 2023-24 और 2024-25 में कर्ज बढ़ने की रफ्तार मौजूदा कीमतों पर GSDP की बढ़ोतरी से ज्यादा रही।



कर्ज का बोझ


सरकार के 100 में से 65 रुपए कहां जा रहे?

2024-25 में वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे तय खर्च कुल राजस्व खर्च के 55.08 फीसदी के बराबर रहे। राजस्व प्राप्तियों के मुकाबले इनका अनुपात 65.24% था। आसान भाषा में कहें तो सरकार को राजस्व के रूप में मिलने वाले हर 100 रुपए के मुकाबले करीब 65 के बराबर रकम वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे तय खर्चों में गई। हालांकि इस मोर्चे पर सुधार भी हुआ है। 2020-21 में यह अनुपात 77.39% था। 2024-25 में यह घटकर 65.24% रह गया।



कमाई 65% तय खर्चो में


सिर्फ ब्याज पर राजस्थान सरकार का कितना पैसा जा रहा?

राजस्थान पर कर्ज बढ़ने का सीधा असर ब्याज के बिल पर पड़ रहा। 2023-24 में राजस्थान ने करीब 34,128 करोड़ ब्याज चुकाया था। 2024-25 में ब्याज भुगतान बढ़कर करीब 38,345 करोड़ हो गया। राजस्व प्राप्तियों के मुकाबले ब्याज भुगतान पिछले पांच सालों में लगातार 15 फीसदी से ज्यादा रहा। 2024-25 में यह 16.87% था। यानी सरकार की हर 100 की राजस्व प्राप्ति के मुकाबले करीब 17 के बराबर रकम अकेले ब्याज चुकाने में गई।



नये दायित्व में


नई उधारी का पैसा आखिर कहां गया?

राजस्थान की मौजूदा माली हालत को समझने के लिए यह सबसे अहम सवाल है। कैग के मुताबिक 2024-25 में कुल उधारी और अन्य दायित्व 4 लाख 2 हजार 564 करोड़ रहे। इसमें 3 लाख 30 हजार 4 करोड़ पुरानी उधारी की मूल रकम और दूसरी देनदारियां चुकाने में चले गए। यानी कुल उधारी का 81.98 फीसदी पुराने देनदारियों के भुगतान में इस्तेमाल हुआ।



इसके बाद शुद्ध पूंजीगत खर्च 30720 करोड़ रहा। वहीं 42,090 करोड़ की उधारी का इस्तेमाल राजस्व खर्च पूरा करने में हुआ। इसका सीधा मतलब है कि नया कर्ज लेने के बावजूद उसका बड़ा हिस्सा नई संपत्तियां या विकास के नए प्रोजेक्ट बनाने के बजाय पुरानी देनदारियां और चालू खर्च संभालने में जा रहा।



राजस्थान सरकार की कमाई बढ़ी तो परेशानी क्यों है?

2024-25 में राजस्थान की राजस्व प्राप्तियां पिछले साल के मुकाबले 11.79% बढ़ीं। लेकिन बजट में जितनी कमाई का अनुमान लगाया गया था, उससे वास्तविक राजस्व प्राप्तियां 14.07 फीसदी कम रहीं। कुल राजस्व प्राप्तियों में 55.80% पैसा राजस्थान के अपने संसाधनों से आया। बाकी 44.20% केंद्र से मिले करों में हिस्सेदारी और अनुदान से आया। यानी कमाई बढ़ी, लेकिन वह बजट अनुमान तक नहीं पहुंच सकी। दूसरी तरफ तय खर्च और कर्ज का दबाव बना रहा।



राजस्थान पर कर्ज का बोझ


राजस्थान का घाटा कितना बढ़ा?

2024-25 में राजस्थान का राजस्व घाटा 41950 करोड़ रहा। 2023-24 में यह 38,955 करोड़ था। वित्तीय घाटा भी 65,580 करोड़ से बढ़कर 72,420 करोड़ हो गया। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान लगातार 12 सालों से FRBM कानून में तय राजस्व और वित्तीय घाटे के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाया। हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। 2024-25 में कुल देनदारी और जीएसडीपी का अनुपात एफआरबीएम कानून में तय सीमा के भीतर रहा। इसलिए राजस्थान को सभी वित्तीय मानकों पर तय सीमा से बाहर बताना सही नहीं होगा।



2026-27 में कैसी वित्तीय स्थिति रहने का अनुमान?

अब राजस्थान बजट 2026-27 को देखें तो सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए 6 लाख 10 हजार 956 करोड़ का बजट रखा है। वित्तीय घाटा करीब 79,493 करोड़ रहने का अनुमान है। यह अनुमानित जीएसडीपी का 3.69% है। सरकार ने 2026-27 के लिए जीएसडीपी करीब 21.52 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया है। इसी वित्त वर्ष में ब्याज भुगतान करीब 43675 करोड़ रहने का अनुमान है। यानी 2024-25 में करीब 38,345 करोड़ रहा ब्याज का सालाना बोझ, वित्तीय वर्ष 2026-27 में 43 हजार करोड़ से ऊपर पहुंचने का अनुमान है।



क्या राजस्थान कर्ज के जाल में फंस रहा?

रिपोर्ट सीधे तौर पर ऐसा निष्कर्ष नहीं देतीं। लेकिन दोनों रिपोर्ट एक समस्या की ओर जरूर इशारा करती। कर्ज ऊंचा है और ब्याज का खर्च बड़ा। कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से तय देनदारियों में जा रहा। और नई उधारी का बड़ा हिस्सा भी पुराने दायित्व चुकाने में इस्तेमाल हो रहा। नीति आयोग इसे राजस्थान की वित्तीय व्यवस्था में ढांचागत वित्तीय जकड़न से जोड़ता है। उसके मुताबिक ऊंचे कर्ज और तय खर्च के कारण विकास पर अपनी मर्जी से पैसा खर्च करने की गुंजाइश सीमित होती।



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