राजस्थान में रिटायर्ड अधिकारी से 2.12 करोड़ की ठगी, महाराष्ट्र से 3 आरोपी गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
- 9 दिन तक डिजिटल अरेस्ट, रिटायर्ड अधिकारी से 2.12 करोड़ की ठगी।
- पुलिस अधिकारी बनकर धमकाया, दो बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए करोड़ों रुपए।
- राजस्थान साइबर पुलिस की महाराष्ट्र में दबिश, 3 आरोपी गिरफ्तार।
- मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर ऐंठे 2 करोड़ से ज्यादा।
- बैंक अकाउंट और OTP के जरिए ठगी का नेटवर्क, पुलिस की जांच जारी।
जयपुर। सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए ठगने के मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने महाराष्ट्र में छापेमारी कर डिजिटल अरेस्ट गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर अधिकारी को करीब 9 दिन तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखने, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम दो बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई थी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई।
9 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर धमकाया
एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह के अनुसार, सेंट्रल साइबर क्राइम थाने में रिटायर्ड अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 9 अगस्त से 18 अगस्त के बीच साइबर अपराधियों ने मोबाइल कॉल और वॉट्सऐप के जरिए संपर्क किया।
आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताया। इसके बाद अधिकारी को गिरफ्तारी वारंट जारी होने और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसने का डर दिखाया गया।
ठगों ने अधिकारी को वीडियो कॉल पर रहने, किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने और लाइव लोकेशन चालू रखने के लिए कहा। इस तरह करीब 9 दिन तक उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया।
फर्जी दस्तावेज भेजकर जेल का डर दिखाया
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने वॉट्सऐप पर कई फर्जी दस्तावेज भेजे। इन दस्तावेजों के जरिए रिटायर्ड अधिकारी को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि वे किसी गंभीर वित्तीय अपराध में फंस चुके हैं।
आरोपियों ने गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर अधिकारी से पैसे ट्रांसफर करवाए। शिकायत के अनुसार, कुल 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए दो बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए।
डिजिटल अरेस्ट के दौरान पीड़ित को लगातार ठगों के निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया। मामले की जांच में पुलिस बैंक खातों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है।
बैंक अकाउंट और तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, केवाईसी दस्तावेजों, मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की।
जांच के दौरान बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों के आधार पर रोहित रेवण कटकधोंड और आंबादास कालू जाधव की भूमिका सामने आई। इसके साथ ही आमोल जगन्नाथ पवार का नाम भी जांच में सामने आया।
पुलिस की विशेष टीम ने महाराष्ट्र में दबिश देकर रोहित रेवण कटकधोंड, आंबादास कालू जाधव और आमोल जगन्नाथ पवार को गिरफ्तार किया। तीनों महाराष्ट्र के रहने वाले बताए गए हैं।
रोहित ने कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराए
पुलिस के अनुसार, रोहित कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री का कारोबार करता है और एक फर्म चलाता है। पूछताछ में उसने बताया कि उसे एक अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर से कॉल आया था।
कॉल करने वाले ने चावल के ऑर्डर, 100% एडवांस इंटरनेशनल पेमेंट और कमीशन का लालच दिया। इसी बहाने रोहित को बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया।
आरोप है कि मुंबई पहुंचने के बाद देवा नाम के व्यक्ति ने रोहित के बैंक खातों की नेट बैंकिंग आईडी-पासवर्ड, डेबिट कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लिए।
इसके बाद देवा और उसके साथियों ने बैंक खातों से कई लेन-देन किए। बैंक लॉगिन आईडी और पासवर्ड बदल दिए गए, जिससे रोहित को अपने खातों की गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल सकी।
आमोल पवार पर कंपनी के नाम से बैंक खाता उपलब्ध कराने का आरोप
पुलिस की जांच में आमोल जगन्नाथ पवार की भूमिका भी सामने आई। जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति ने कंपनी में निवेश के नाम पर 20 लाख रुपए और कंपनी के दस्तावेज लिए थे।
इसके बाद कंपनी को प्री-लिस्टेड कराने और बड़े बैंक ट्रांजेक्शन से मुनाफा दिलाने का झांसा दिया गया। इसी लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
एक महिला ने खुद को बांद्रा, मुंबई स्थित सेबी शेयर मार्केट कार्यालय से संबंधित बताया। आरोप है कि उसने इंटरनेट बैंकिंग शुरू करवाने और OTP उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया।
जांच में बैंक खातों और बड़े लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
आंबादास जाधव को बड़े ट्रांजेक्शन और मुनाफे का लालच
आंबादास कालू जाधव, आमोल पवार का परिचित और उसकी कंपनी में पहले काम कर चुका था। पुलिस के अनुसार, शेयर बाजार में निवेश और बड़े बैंक ट्रांजेक्शन से मुनाफे का लालच देकर उसे भी इस नेटवर्क में शामिल किया गया।
10 सितंबर को आमोल पवार की ओर से ओरिएंट मेटल्स के नाम पर नासिक शाखा में बिजनेस अकाउंट खोला गया। इसमें आंबादास और आकाश को पार्टनर बनाया गया। बैंक किट आमोल पवार को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके बाद इंटरनेट बैंकिंग शुरू करवाने, OTP हासिल करने और लाभार्थी जोड़ने की प्रक्रिया पूरी करने का आरोप है। खाते में रकम आने और अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी आंबादास के मोबाइल पर मिलने की बात कही गई है।
पुलिस की जांच में आगे क्या?
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का उद्देश्य ठगी के पूरे नेटवर्क, बैंक खातों के इस्तेमाल और रकम के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करना है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना बनाया था या नहीं।
साइबर सुरक्षा सलाह: किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर धमकाने वाले व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वीडियो कॉल पर रोकना और पैसे मांगना ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या संबंधित पुलिस थाने से संपर्क करें।
ये भी पढ़ें:-
अजमेर मेयर चुनाव: क्या खारिज होगा कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन? जानिए पूरा सच
भीलवाड़ा नगर निगम: भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध निर्वाचित, बनीं नई महापौर
निकाय चनाव: विधायकों की मनमर्जी पर कांग्रेस का अंकुश, बदला टिकट वितरण पैटर्न
जयपुर निगम चुनाव, कैंडिडेट की सुविधा के लिए 15 केंद्रों पर खुलेंगे नामांकन ऑफिस