किसानों को थमाए खजूर के बांझ पौधे, 10 महीने बाद भी नहीं आए फल, 35 करोड़ का हो गया फर्जीवाड़ा
News In Short
- राजस्थान में खजूर के पौध वितरण में सामने आया 35 करोड़ का घोटाला।
- किसानों को मादा पौधों की जगह थमाए नर पौधे। इसमें फल ही नहीं आए।
- पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाके तहत वितरित किये गए थे खजूर के पौधे।
- हॉर्टिकल्चर विभाग ने इस घोटाले में NFCD अधिकारीयों पर कराई एफआईआर।
- किसानों को अब मिलेगा ₹2.10 करोड़ का मुआवजा और नए पौधे।
News In Detail
राजस्थान के 17 जिलों में खजूर के खराब पौधे बांटने का मामला सामने आया है। 10 महीने बाद जब फूल नहीं आए तो किसानों की शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि अधिकांश पौधे नर थे, जो फूल नहीं दे सकते थे। अब किसानों को मुआवजा और पौधों के रिप्लेसमेंट के आदेश दिए गए हैं। प्रदेश के 17 जिलों में इस पूरे मामले में 35 करोड़ रुपये का घोटाला हो गया।
क्या था पूरा खेल?
राजस्थान के विभिन्न जिलों के किसानों को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 2022 में खजूर के पौधे दिए गए थे। सरकार ने मेडजूल, खुनैजी और बरही जैसी कीमती किस्मों के पौधों के लिए भारी सब्सिडी भी दी थी। योजना के तहत प्रति पौधा करीब 4,700 रुपये का भुगतान हुआ। इसमें सरकार ने 3,000 रुपये प्रति पौधा अनुदान दिया था। इन्हें सप्लायर फर्म भारतीय राष्ट्रीय निर्माण एवं विकास सहकारी संघ (NFCD) द्वारा उच्च गुणवत्ता का बताकर सप्लाई कर दिया था।
मादा पौधे में आते हैं फल
खजूर की खेती में केवल मादा पौधों पर ही फल आते हैं। नर पौधों की जरूरत केवल पोलिनेशन के लिए होती है। पोलिनेशन के बाद मादा पौधों पर फल आना शुरू हो जाता है। गंभीर बात यह रही कि सप्लायर फर्म भारतीय राष्ट्रीय निर्माण एवं विकास सहकारी संघ (NFCD) ने मादा की जगह नर पौधे सप्लाई कर दिए। करीब 35.25 करोड़ रुपये का यह पूरा टेंडर अब जांच के घेरे में है।
श्रीगंगानगर से बाड़मेर तक किसान परेशान
सबसे पहले श्रीगंगानगर के किसानों ने देखा कि उनके लगाए पौधों में फूल ही नहीं आ रहे। इसके बाद शिकायतों का अंबार लग गया। श्रीगंगानगर, बाड़मेर, जैसलमेर, अजमेर, बीकानेर, हनुमानगढ़, झुंझुनूं और पाली सहित 17 जिलों के किसान इस अवैज्ञानिक पौध वितरण से परेशान हैं। यह घोटाला सूरतगढ़ के किसान शीशपाल और छगन लाल की शिकायतों के बाद सामने आया।
NFCD के अधिकारियों पर एफआईआर
उद्यान विभाग की उप निदेशक प्रीति बाला गर्ग की शिकायत पर दिल्ली और जयपुर के 6 बड़े अधिकारियों (NFCD के चेयरमैन और अन्य) के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। अनुबंध के मुताबिक खराब पौधे निकलने पर कंपनी को 800 रुपये प्रति वर्ष प्रति पौधा हर्जाना देना था, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद न हर्जाना दिया गया, न पौधे बदले गए।
अब हॉर्टिकल्चर विभाग ने फैसला लिया है कि प्रभावित किसानों को मुआवजा के साथ रिप्लेसमेंट पौधे भी दिए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए 2.10 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर किया है। इसमें से 1.10 करोड़ केवल श्रीगंगानगर के किसानों को इस मार्च के अंत तक DBT के माध्यम से मिल जाएंगे।
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