फर्जी दस्तावेज से पाई सरकारी नौकरी, तीन डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर, कोर्ट के आदेश पर एसओजी का एक्शन
News In Short
- राजस्थान में फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी पाने का मामला उजागर।
- एसओजी ने अदालत के आदेश पर तीन डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर।
- आरोपी डॉक्टरों में से एक डॉक्टर की विदेशी डिग्री संदिग्ध होने का आरोप।
- इन डॉक्टरों की नियुक्ति से चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
- तीनों डॉक्टरों के खिलाफ जयपुर की एक अदालत में दायर किया था केस।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर में फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी पाने का बड़ा मामला सामने आया है। विशेष ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी लेने वाले तीन सेवारत डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई है।
कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच शुरू
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज होने के बाद अब जांच की जिम्मेदारी डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। शिकायतकर्ता अमन कुमार ने न्यायालय में परिवाद पेश कर आरोप लगाया था कि इन डॉक्टरों ने राजस्थान चिकित्सा विभाग में नियुक्ति पाने के लिए मेडिकल काउंसिल पंजीकरण और अपनी शैक्षणिक योग्यताओं में भारी हेराफेरी की है।
किन पर गिजी गाज?
एसओजी की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में मुख्य रूप से तीन डॉक्टरों को नामजद किया गया है। इनमें डॉ. अरविंद गैट, डॉ. मनोज कुमार यादव और डॉ. महेंद्र कुमार गुर्जर शामिल हैं।
शिकायत में लगे गंभीर आरोप
परिवाद के अनुसार इन डॉक्टरों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान न केवल फर्जी दस्तावेज पेश किए, बल्कि गलत घोषणाएं करके नौकरी हासिल की।
डॉ. अरविंद गैट पर आरोप है कि इन्होंने 2013 की भर्ती के दौरान राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अपने पंजीकरण को लेकर गलत जानकारी साझा की। असल में उनका पंजीकरण उनकी नियुक्ति के बाद हुआ था, जबकि नियमों के अनुसार आवेदन के समय वैध पंजीकरण अनिवार्य था।
इसी तरह डॉ. मनोज कुमार यादव पर आरोप है कि वर्ष 2014 की भर्ती में इन्होंने गलत घोषणा की। इन्हें 2015 में नियुक्ति मिल गई, जबकि इनका स्थायी पंजीकरण साल 2019 में जाकर हुआ।
डॉ. महेंद्र कुमार गुर्जर की विदेशी डिग्री और इंटर्नशिप के दस्तावेजों को संदिग्ध माना जा रहा है। परिवादी का दावा है कि इन्होंने चीन की एक यूनिवर्सिटी से प्राप्त प्रमाणपत्रों के आधार पर आवेदन किया था, जिनकी वैधता पूरी तरह से संदेह के घेरे में है।
विभाग की लापरवाही और आगामी कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने न केवल डॉक्टरों, बल्कि चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि नियुक्तियों के समय विभागीय स्तर पर दस्तावेज सत्यापन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण अपात्र व्यक्ति सिस्टम का हिस्सा बन गए।
अब आगे क्या?
एसओजी ने इस मामले की तह तक जाने के लिए कमर कस ली है। जांच अधिकारी अब संबंधित मेडिकल काउंसिल और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से इन डॉक्टरों के मूल दस्तावेज मंगवाएंगे। इन दस्तावेजों की सत्यता की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और इसमें विभाग के किन अधिकारियों की मिलीभगत थी।
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