FMGE परीक्षा में फेल हुए तो लाखों में खरीदे फर्जी सर्टिफिकेट, राजस्थान में SOG ने 4 डॉक्टरों को किया गिरफ्तार

Saurabh Mishra | Oct 15, 2026, 16:15 IST
फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से इंटर्नशिप
राजस्थान में विदेश से MBBS करने के बाद फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले चार युवकों को फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने के आरोप में SOG ने गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन्होंने 27 से 30 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की। इस मामले में 100 से ज्यादा विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट जांच के घेरे में हैं।

जयपुर। विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले कुछ छात्र भारत में डॉक्टर बनने के लिए जरूरी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) परीक्षा पास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने 27 से 30 लाख रुपए देकर परीक्षा पास करने के फर्जी सर्टिफिकेट बनवा लिए। इन सर्टिफिकेट के जरिए राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी कर ली। इस फर्जीवाड़े में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में 100 से ज्यादा विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट भी शक के घेरे में हैं।



भरतपुर और डीग के रहने वाले हैं चारों आरोपी

एडीजी एसओजी विशाल बंसल के मुताबिक, फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के मामले में जयपुर के SOG थाने में 4 फरवरी को केस दर्ज किया गया था। इसकी जांच के दौरान चार और आरोपियों की भूमिका सामने आई। गिरफ्तार आरोपियों में डीग के भारत भूषण शर्मा (26), भरतपुर के वैर निवासी सौरव शर्मा (29), हलैना निवासी हिमांशु शर्मा (26) और डीग के पहाड़ी निवासी शिवम चौधरी (28) शामिल हैं।



चारों ने विदेश से एमबीबीएस किया था। भारत लौटने के बाद FMGE परीक्षा दी लेकिन उसमें पास नहीं हो सके। एसओजी के एडीजी बंसल का आरोप है कि इसके बाद इन्होंने दलालों से संपर्क किया और लाखों रुपए देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए।



क्या है FMGE परीक्षा और इसे पास करना क्यों जरूरी?

FMGE का पूरा नाम फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन है। इसे हिंदी में विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा भी कहा जाता है। यह एक स्क्रीनिंग परीक्षा है। इसे नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) आयोजित करता है।



भारत के ऐसे नागरिक और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI), जिन्होंने विदेश से मेडिकल की डिग्री ली है, उन्हें भारत में डॉक्टर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आम तौर पर यह परीक्षा पास करनी होती है। हालांकि, कुछ निर्धारित श्रेणियों को नियमों के तहत छूट मिलती है। इस परीक्षा में 300 बहुविकल्पीय सवाल (MCQ) होते हैं। पास होने के लिए कम से कम 150 अंक लाना जरूरी है।



FMGE पास करने के बाद उम्मीदवार को लागू नियमों के अनुसार मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और जरूरी इंटर्नशिप की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सिर्फ विदेश से MBBS की डिग्री लेने से भारत में मरीजों का इलाज करने की अनुमति नहीं मिल जाती। इस मामले में आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने परीक्षा पास किए बिना ही पास होने के फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए।



किर्गिस्तान से MBBS किया, 30 लाख में बनवाया सर्टिफिकेट

आईजी एसओजी अजयपाल लांबा के मुताबिक, भारत भूषण शर्मा ने किर्गिस्तान से एमबीबीएस किया था। वह 2022 में भारत लौटा। इसके बाद उसने कई बार FMGE परीक्षा दी लेकिन सफलता नहीं मिली। जांच के मुताबिक, उसने दौसा निवासी शुभम गुर्जर से संपर्क किया।



आरोप है कि शुभम ने 30 लाख रुपए लेकर भारत भूषण का फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाया। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर भारत भूषण ने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में इंटर्नशिप की। शुभम गुर्जर को SOG पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वह फिलहाल जेल में है।



रूस से लौटे दो युवकों ने 27-27 लाख रुपए दिए

सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा ने 2017 से 2023 के बीच रूस में MBBS की पढ़ाई की थी। दोनों 2023 में भारत लौटे। यहां FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाए। इसके बाद दोनों ने वैर निवासी गजेंद्र के जरिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए।



फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की

सौरव ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर में इंटर्नशिप की। वहीं, हिमांशु ने जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की। दोनों ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन भी किया था। जांच में यह भी सामने आया कि सौरव और हिमांशु आपस में रिश्तेदार हैं। दोनों मामा-बुआ के बेटे हैं।




कजाकिस्तान से MBBS करने वाले शिवम ने दिए 30 लाख

चौथे आरोपी शिवम चौधरी ने 2016 से 2021 तक कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की थी। वह 2021 में भारत लौटा। FMGE परीक्षा में सफल नहीं होने के बाद उसने भी गजेंद्र से संपर्क किया। SOG के मुताबिक, गजेंद्र कजाकिस्तान में हॉस्टल चलाता था। वह भारतीय छात्रों को विदेश में MBBS कराने से जुड़े काम में भी शामिल था।



आरोप है कि शिवम ने 30 लाख रुपए देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाया। इसके आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप की।इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया।




SOG ने अब तक 37 को गिरफ्तार किया

SOG के मुताबिक, इस मामले में चार नई गिरफ्तारियों से पहले 33 लोग पकड़े जा चुके थे। इस तरह गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या अब 37 हो गई है। पहले गिरफ्तार लोगों में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, UDC अखिलेश माथुर, LDC फरहान हसन और कथित मुख्य आरोपी भानाराम माली भी शामिल हैं।



जांच एजेंसी ने ऐसे 100 से ज्यादा विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट की पहचान की है, जिन पर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए इंटर्नशिप या रजिस्ट्रेशन कराने का संदेह है। SOG अब इनके दस्तावेजों और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।



दलालों से लेकर मेडिकल काउंसिल तक कैसे पहुंचा मामला ?

जांच में सामने आया है कि यह मामला सिर्फ फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने तक सीमित नहीं। आरोप है कि कुछ दलालों ने उम्मीदवारों से 20 से 30 लाख रुपए तक वसूले। इसके बदले परीक्षा पास करने के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। इन्हीं दस्तावेजों की मदद से मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।



SOG मेडिकल काउंसिल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेज जांच के दौरान कैसे स्वीकार किए गए और इस काम में किन लोगों की भूमिका रही।



अब आगे क्या करेगी SOG ?

चारों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। SOG उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किए और मेडिकल कॉलेजों या काउंसिल में उनका इस्तेमाल कराने में मदद की।



इस मामले ने मेडिकल रजिस्ट्रेशन की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। विदेश से MBBS करने वाले उम्मीदवारों के लिए FMGE पास करना जरूरी है। ऐसे में बिना परीक्षा पास किए इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तक पहुंचने के आरोप गंभीर हैं। अब जांच से साफ होगा कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

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