राजस्थान में नकली मसालों का बड़ा खुलासा, मिर्च और हल्दी में मिले खतरनाक केमिकल; लैब जांच में सैंपल फेल

Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 01, 2026, 10:44 IST
राजस्थान की मसाला फैक्ट्रियों में मिलावट का खेल
120 रुपए किलो में बिक रहा मिलावटी मसाला
पाली जिले के सुमेरपुर में मसाला फैक्ट्रियों की पड़ताल के दौरान लाल मिर्च और हल्दी के सैंपल जांच में असुरक्षित पाए गए। लाल मिर्च में सूडान-II और मेटानिल येलो मिले, जबकि हल्दी में मेटानिल येलो के साथ 80.73 प्रतिशत स्टार्च पाया गया। खाद्य विभाग ने कुछ फैक्ट्रियों के सैंपल फेल होने और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी है।

राजस्थान में रोजाना इस्तेमाल होने वाले रेडिमेड मसालों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पाली जिले के सुमेरपुर में मसाला फैक्ट्रियों की पड़ताल के दौरान लाल मिर्च और हल्दी पाउडर में मिलावट का मामला सामने आया है। जांच में कुछ सैंपलों में सूडान-II और मेटानिल येलो जैसे प्रतिबंधित औद्योगिक रंग पाए गए। ये रसायन कपड़े और चमड़े को रंगने में इस्तेमाल किए जाते हैं। राजस्थान सरकार की पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी, उदयपुर में हुई जांच में दोनों सैंपल इंसानी सेहत के लिए असुरक्षित पाए गए। इस खुलासे के बाद खाद्य सुरक्षा और बाजार में बिकने वाले मसालों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।



सुमेरपुर की दो मसाला फर्मों के सैंपल जांच में असुरक्षित

पड़ताल के दौरान सुमेरपुर की हंसा मसाला उद्योग और चामुंडा ट्रेडिंग कंपनी से होलसेल खरीदार बनकर संपर्क किया गया। दोनों फर्मों से 110 से 120 रुपए प्रति किलो के भाव पर मिर्च, हल्दी और धनिया उपलब्ध कराने की बात हुई।



इसके बाद लिए गए सैंपल राजस्थान सरकार की पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी, उदयपुर भेजे गए। जांच रिपोर्ट में लाल मिर्च और हल्दी के नमूनों में मिलावट और प्रतिबंधित रासायनिक रंगों की मौजूदगी सामने आई।



इन मसालों को बाजार में 250 से 400 रुपए प्रति किलो तक बेचने की जानकारी भी सामने आई है।



लाल मिर्च पाउडर में मिला सूडान-II और मेटानिल येलो

सुमेरपुर में शीतला माता मंदिर के पास संचालित चामुंडा ट्रेडिंग कंपनी से लाल मिर्च का सैंपल लिया गया था। प्रयोगशाला जांच में इसमें सूडान-II और मेटानिल येलो की मौजूदगी पाई गई।



इसके अलावा गुणवत्ता जांच के एक मानक नॉन-वोलेटाइल ईथर एक्सट्रैक्ट की मात्रा 11.09 प्रतिशत मिली, जबकि निर्धारित न्यूनतम सीमा 12 प्रतिशत बताई गई है। ये परिणाम मसाले की गुणवत्ता और शुद्धता पर सवाल खड़े करते हैं।



हल्दी पाउडर में 80.73 प्रतिशत मिला स्टार्च

हंसा मसाला उद्योग से लिए गए हल्दी पाउडर के सैंपल में भी गंभीर मिलावट सामने आई। जांच में प्रतिबंधित मेटानिल येलो रंग के साथ स्टार्च यानी आटे की मात्रा 80.73 प्रतिशत पाई गई।



उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार निर्धारित सीमा 60 प्रतिशत बताई गई है। यानी नमूने में स्टार्च की मात्रा तय मानक से काफी अधिक थी। इससे हल्दी पाउडर में चावल और मक्के के आटे जैसे सस्ते पदार्थ मिलाकर वजन बढ़ाने की आशंका सामने आई है।



ऐसे तैयार किया जाता है मिलावटी मसाला

पड़ताल में सामने आए विवरण के अनुसार मिलावटी मसाले तैयार करने के लिए गेहूं और चावल की भूसी, खराब स्टार्च और रंग खो चुकी पुरानी मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है।



इन पदार्थों को पीसकर उनमें औद्योगिक रंग मिलाए जाते हैं।



  • लाल मिर्च में गहरा रंग देने के लिए सूडान-II का इस्तेमाल किया जाता है।
  • चमकीला नारंगी-लाल रंग दिखाने के लिए मेटानिल येलो मिलाया जाता है।
  • हल्दी में चावल और मक्के का आटा मिलाकर वजन बढ़ाया जाता है।
  • पीला रंग गहरा दिखाने के लिए प्रतिबंधित रासायनिक डाई का इस्तेमाल किया जाता है।

इस तरह तैयार मसाला देखने में आकर्षक दिखाई दे सकता है, लेकिन उसकी वास्तविक गुणवत्ता और शुद्धता प्रभावित होती है।



120 से 130 रुपए किलो में मिल रहा था मसाला

पड़ताल के दौरान चामुंडा ट्रेडिंग कंपनी के व्यापारी से बातचीत में सामने आया कि 120 रुपए प्रति किलो में हल्दी, मिर्च और धनिया उपलब्ध कराने की बात कही गई।



जब मसाले में मिलावट के बारे में सवाल किया गया तो व्यापारी ने कथित तौर पर कहा कि थोड़ा अच्छा माल लेकर सस्ते मसाले को उसमें मिलाकर बेचा जा सकता है।



वहीं हंसा मसाला उद्योग के मालिक हितेश प्रजापत से फैक्ट्री का पता पूछने पर उन्होंने सुमेरपुर की फैक्ट्री में आने से इनकार किया और शिवगंज आने को कहा। रिपोर्ट के अनुसार वे सैंपल लेकर शिवगंज पहुंचे और वहां डील की बातचीत हुई।



एक अन्य बातचीत में व्यापारी ने 130 से 300 रुपए प्रति किलो तक के मसाले उपलब्ध कराने की बात कही। सस्ते मसाले की गुणवत्ता की गारंटी नहीं होने की बात भी कथित बातचीत में सामने आई।



खाद्य विभाग ने कही कार्रवाई की बात

सुमेरपुर में मसाला फैक्ट्रियों पर समय-समय पर जांच और दबिश की जाती है। फूड इंस्पेक्टर दिलीप सिंह के अनुसार कुछ फैक्ट्रियों के सैंपल फेल हुए हैं और संबंधित मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। उपलब्ध जानकारी में दोनों फर्मों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई या कानूनी निर्णय का विवरण नहीं दिया गया है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

मिर्च, हल्दी और धनिया भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसाले हैं। ऐसे में इनमें प्रतिबंधित औद्योगिक रंग और अधिक मात्रा में स्टार्च मिलने की जानकारी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है। खासकर खुले या बेहद सस्ते मसाले खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और प्रमाणिकता पर ध्यान देना जरूरी है।



उपभोक्ताओं को पैक्ड मसाले खरीदते समय FSSAI लाइसेंस, निर्माता का नाम, बैच नंबर और पैकिंग की जानकारी जांचनी चाहिए। केवल रंग या कीमत देखकर मसाले की शुद्धता तय नहीं की जा सकती।



आगे क्या?

अब निगरानी इस बात पर रहेगी कि खाद्य सुरक्षा विभाग संबंधित फैक्ट्रियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है। साथ ही मिलावटी मसालों की सप्लाई रोकने के लिए बाजार में जांच और सैंपलिंग कितनी प्रभावी होती है। उपभोक्ताओं को भी संदिग्ध मसालों की शिकायत खाद्य सुरक्षा विभाग से करनी चाहिए।



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