राजस्थान फसल बीमा भुगतान में दूसरे नंबर पर, किसानों को मिले 8 हजार 697 करोड़ रुपए; 800 करोड़ से ज्यादा के दावे अब भी लंबित

Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 03, 2026, 16:22 IST
फसल बीमा भुगतान में राजस्थान दूसरे नंबर पर
जानिए किसानों के क्लेम क्यों अटकते हैं
राजस्थान के किसानों के लिए फसल बीमा योजना से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है। वित्त वर्ष 2023-24 से जुलाई 2026 तक प्रदेश के किसानों को फसल बीमा के तहत करीब 8 हजार 697 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। इस अवधि में राजस्थान से लगभग 11 करोड़ दावे प्राप्त हुए, जिनमें से बड़ी संख्या का निस्तारण किया गया। हालांकि, करीब 800 करोड़ रुपए से अधिक के दावे अब भी लंबित हैं। दावों के भुगतान में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि लंबित राशि के मामले में आंध्र प्रदेश के बाद प्रदेश दूसरे नंबर पर है।

राजस्थान में किसानों को मिला 8 हजार 697 करोड़ रुपए का फसल बीमा क्लेम

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 से जुलाई 2026 तक राजस्थान के किसानों को फसल बीमा योजना के तहत 8 हजार 697 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।



इस अवधि में प्रदेश से करीब 11 करोड़ दावे प्राप्त हुए। किसानों से लगभग 2 हजार 988 करोड़ रुपए प्रीमियम के रूप में जमा किए गए। बड़ी संख्या में दावों का भुगतान किया गया, लेकिन कुछ दावे अब भी लंबित हैं।



महाराष्ट्र पहले, राजस्थान दूसरे नंबर पर

फसल बीमा भुगतान के मामले में महाराष्ट्र देश में पहले स्थान पर है। महाराष्ट्र में 5.72 करोड़ से ज्यादा दावों के बदले 17 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया।



राजस्थान 8 हजार 697 करोड़ रुपए के भुगतान के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं कर्नाटक तीसरे नंबर पर रहा, जहां 1.04 करोड़ दावों पर 7 हजार 643 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया गया।



लंबित क्लेम में आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान

दावों की लंबित राशि के मामले में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है। यहां करीब 2 हजार 700 करोड़ रुपए के दावे लंबित हैं। राजस्थान दूसरे नंबर पर है, जहां 800 करोड़ रुपए से अधिक के दावों का भुगतान अभी बाकी बताया गया है। वहीं अंडमान निकोबार और मिजोरम में लंबित दावों की राशि शून्य है।



किसानों के फसल बीमा क्लेम क्यों अटकते हैं?

फसल बीमा का भुगतान कई बार आवेदन में गलत जानकारी या दस्तावेजों की कमी के कारण अटक जाता है। प्रमुख कारण ये हो सकते हैं।



  • बैंक खाते की गलत जानकारी या खाता बंद होना
  • आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी में अंतर
  • फसल का नाम या रबी-खरीफ का विवरण गलत भरना
  • फसल नुकसान की सूचना समय पर नहीं देना
  • जमीन के दस्तावेज या जरूरी प्रमाण उपलब्ध नहीं होना
  • फसल नुकसान के विवरण और आवेदन में अंतर
  • बीमा कंपनी की ओर से सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होना
  • फसल नुकसान का आकलन या संबंधित रिकॉर्ड अधूरा होना

ऐसी स्थिति में किसानों को आवेदन की स्थिति जांचनी चाहिए और संबंधित बीमा कंपनी या कृषि विभाग से संपर्क करके कमी दूर करनी चाहिए।



फसल बीमा क्लेम कैसे करें?

फसल बीमा योजना के तहत नुकसान होने पर किसान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचना और आवेदन देना होता है।



1. फसल खराब होने की सूचना दें

फसल नुकसान होने पर किसान को टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देनी चाहिए। नुकसान की जानकारी समय पर देना जरूरी है, ताकि संबंधित एजेंसी आवश्यक जांच कर सके।



2. जरूरी जानकारी तैयार रखें

किसान को फसल का नाम, रबी या खरीफ का विवरण, मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और नुकसान का सही विवरण तैयार रखना चाहिए।



3. जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएं

आवश्यकतानुसार आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, जमीन से जुड़े दस्तावेज और फसल नुकसान के फोटो या अन्य प्रमाण जमा करने पड़ सकते हैं।



4. आवेदन और नुकसान का विवरण सही भरें

क्लेम आवेदन में फसल का नाम, क्षेत्र और नुकसान की जानकारी सही दर्ज करें। गलत जानकारी के कारण आवेदन में देरी हो सकती है।



5. क्लेम की स्थिति जांचते रहें

आवेदन के बाद किसान अपने क्लेम की स्थिति संबंधित बीमा कंपनी, कृषि विभाग या उपलब्ध ऑनलाइन माध्यम से जांच सकते हैं। यदि आवेदन लंबित है तो उसकी वजह पता करके जरूरी सुधार करवाना चाहिए।



फर्जी फसल बीमा क्लेम के मामले भी सामने आए

राजस्थान में फसल बीमा योजना के तहत फर्जी तरीके से क्लेम लेने के मामले भी सामने आए हैं। नागौर जिले में इस संबंध में पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां हुई थीं।



ऐसे मामलों में दावों का सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है। बीमा कंपनियां और संबंधित एजेंसियां आवेदन तथा नुकसान की जानकारी की जांच के बाद भुगतान करती हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है

राजस्थान में बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा योजना से जुड़े हैं। करीब 800 करोड़ रुपए से अधिक के लंबित दावे किसानों के लिए चिंता का विषय हैं। सही समय पर नुकसान की सूचना देने और सही दस्तावेज जमा करने से क्लेम प्रक्रिया में देरी कम हो सकती है। किसानों को आवेदन की प्रक्रिया और लंबित भुगतान के कारणों की जानकारी होना जरूरी है।



आगे क्या?

किसानों को लंबित क्लेम की स्थिति जांचकर जरूरी दस्तावेज और जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए। कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को भी लंबित दावों का समय पर निस्तारण करना होगा। फसल नुकसान की सूचना समय पर देने और आवेदन सही भरने से भुगतान प्रक्रिया आसान हो सकती है।



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