राजस्थान में DAP-यूरिया के साथ दूसरा सामान खरीदने की मजबूरी खत्म, 9 हजार दुकानों की जांच, 250 से ज्यादा पर कार्रवाई

Raghvendra Singh Rathore | Oct 26, 2026, 22:14 IST
राजस्थान में DAP-यूरिया के साथ जबरन सामान बेचा तो होगी कार्रवाई
राजस्थान में खाद के साथ जबरन दूसरे उत्पाद बेचने पर सख्ती। कृषि विभाग ने 9 हजार से ज्यादा निरीक्षण किए और 250 से अधिक विक्रेताओं पर कार्रवाई की।
राजस्थान में किसानों को यूरिया और डीएपी के साथ जबरन दूसरे उत्पाद बेचने पर कृषि विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग के मुताबिक मोबाइल ऐप से 9 हजार से ज्यादा निरीक्षण हुए और 250 से अधिक विक्रेताओं पर कार्रवाई की गई। अब थोक विक्रेताओं और कंपनियों की भूमिका भी जांची जाएगी। शिकायत पर 24 घंटे में शुरुआती कार्रवाई होगी।

राजस्थान में किसानों को यूरिया और डीएपी खाद के साथ जबरन दूसरे कृषि उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कृषि विभाग ने साफ किया है कि कोई भी विक्रेता किसान को खाद खरीदने के लिए जिंक, सल्फर, कीटनाशक या दूसरे उत्पाद लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। ऐसा करने वालों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए जा सकते हैं। गंभीर मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकेगी।



प्रदेश में खाद की कालाबाजारी, ज्यादा कीमत वसूलने और जबरन दूसरे उत्पाद बेचने की शिकायतों पर निगरानी बढ़ाई गई है। कृषि विभाग के अनुसार, अब तक 9 हजार से ज्यादा कृषि आदान विक्रेताओं का निरीक्षण किया गया है। इनमें अनियमितताएं मिलने पर 250 से अधिक विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है।



DAP-यूरिया चाहिए तो दूसरा सामान लेना जरूरी नहीं

कई बार किसानों को खाद खरीदते समय दूसरे कृषि उत्पाद भी लेने के लिए कहा जाता है। इसे कृषि विभाग ने जबरन टैगिंग की श्रेणी में रखा है। कृषि आयुक्तालय ने 23 अक्टूबर को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया है कि किसानों को यूरिया, डीएपी या अन्य अनुदानित खाद के साथ कोई अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।



9 हजार से ज्यादा निरीक्षण, 250 विक्रेताओं पर कार्रवाई

कृषि विभाग ने खाद और अन्य कृषि उत्पाद बेचने वाले विक्रेताओं की निगरानी के लिए विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है। विभाग के अनुसार, इस ऐप के जरिए प्रदेश में अब तक 9 हजार से ज्यादा निरीक्षण किए गए हैं। विभिन्न अनियमितताओं के मामलों में 250 से अधिक विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई हुई है।



ऐप में निरीक्षण से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाती है। इससे अधिकारियों को जांच रिपोर्ट की निगरानी और समीक्षा करने में मदद मिलेगी।



केवल दुकानदार नहीं, खाद कंपनियां भी जांच के दायरे में

कृषि विभाग ने जबरन टैगिंग के मामलों में पूरी सप्लाई चेन की जांच करने के निर्देश दिए हैं। अगर कोई दुकानदार किसान को खाद के साथ दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो यह भी देखा जाएगा कि कहीं थोक विक्रेता या आपूर्तिकर्ता कंपनी की ओर से ऐसा दबाव तो नहीं बनाया गया।



इससे उन मामलों की जांच का रास्ता खुलेगा, जहां खुदरा विक्रेता कंपनियों या थोक आपूर्तिकर्ताओं की शर्तों का हवाला देकर किसानों को अतिरिक्त सामान बेचते हैं।



लाइसेंस रद्द होने से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई

कृषि विभाग ने अधिकारियों को उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।अनियमितता की पुष्टि होने पर विक्रेता का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है। गंभीर मामलों में कानूनी प्रावधानों के अनुसार एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी होगी।



हर जिले में विशेष टीमें करेंगी औचक जांच

प्रदेश के सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें खाद की दुकानों, गोदामों, थोक विक्रेताओं और कंपनियों के प्रतिष्ठानों की जांच करेंगी। जांच के दौरान खाद का उपलब्ध स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड, बिल और दूसरे कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री के दस्तावेज देखे जाएंगे।



शिकायत मिलने पर 24 घंटे में शुरू होगी कार्रवाई

किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक जिले में उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ या हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग ने कहा है कि जबरन टैगिंग, ज्यादा कीमत वसूली या अन्य अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की जाए।



यह समयसीमा शिकायत पर कार्रवाई शुरू करने के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर शिकायत का अंतिम निस्तारण 24 घंटे में ही हो जाएगा।



कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

कृषि विभाग ने निरीक्षण और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। अगर किसी जिले में शिकायतों के बावजूद जांच नहीं होती या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में अनावश्यक देरी की जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।



किसानों को कितनी राहत मिलेगी?

राजस्थान में रबी सीजन के दौरान यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ती है। ऐसे समय खाद की उपलब्धता किसानों के लिए अहम होती है। अगर किसी किसान को जरूरी खाद लेने के लिए अतिरिक्त उत्पाद खरीदने पड़ें, तो उसकी खेती की लागत बढ़ सकती है।



सरकार के नए निर्देशों से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जिला स्तर पर कितनी नियमित जांच होती है, शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और दोषी पाए गए विक्रेताओं के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।



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