राजस्थान में बनेगा ‘हवाई टैक्सी’ जैसा ड्रोन, 200 किलो तक उठा सकेगा वजन

Saurabh Mishra | Aug 16, 2026, 12:25 IST
राजस्थान में जल्द उड़ेगी एयर टैक्सी, जोधपुर में बनेगी हाईटेक ड्रोन लैब
राजस्थान के जोधपुर में देश का पहला पैसेंजर ड्रोन तैयार होगा। यहां एक अत्याधुनिक AI ड्रोन लैब और मैन्युफैक्चरिंग हब भी बनेगा। छात्रों को ड्रोन बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान में जल्द पैसेंजर ड्रोन तैयार होंगे।
  • जोधपुर में इसके लिए हाईटेक लैब बनेगी।
  • यहां ड्रोन डिजाइन और टेस्टिंग दोनों होंगे।
  • एंटी-ड्रोन तकनीक पर भी काम चल रहा है।
  • छात्रों को भी ड्रोन बनाने की ट्रेनिंग भी मिलेगी।

राजस्थान में यात्रियों को ले जाने वाले पैसेंजर ड्रोन तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई । इसके लिए जोधपुर में एक अत्याधुनिक लैब बनाई जाएगी। यहां ड्रोन की डिजाइनिंग और टेस्टिंग होगी।



'ऋगवामिनिकी' नाम की कंपनी पिछले 18 महीने से एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजीपर काम कर रही। कंपनी का दावा है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक है, जो भारत में ही विकसित की जा रही।



जोधपुर में तैयार होगा पैसेंजर ड्रोन

पैसेंजर ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के स्कूल-कॉलेज के बच्चों को भी ड्रोन बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही। उन्हें फ्लाइंग ट्रेनिंग भी मिलेगी। इसके लिए एक खास एआई-बेस्ड मॉड्यूल तैयार किया गया। यह मॉड्यूल घर बैठे ही ड्रोन डिजाइन और निर्माण की पूरी जानकारी देगा।



जोधपुर बनेगा ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब

'ऋगवामिनिकी' कंपनी के सीईओ जितेश त्रिवेदी के मुताबिक फरवरी 2026 में राइजिंग राजस्थान समिट के तहत राज्य सरकार के साथ एमओयू हुआ था। इसी प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर में अत्याधुनिक लैब तैयार हो रही।



जोधपुर में एक विशाल ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब भी तैयार किया जाएगा। इसके लिए नागौर रोड पर नेतड़ा के पास और पाली रोड पर जमीन देखी गई है। यहां पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन तैयार किए जाएंगे।



ड्रोन के पार्ट्स के लिए छोटी-छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भी लगाई जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इन यूनिट्स में काम करने वालों को पहले खास ट्रेनिंग दी जाएगी।



राजस्थान में जल्द उड़ेगी एयर टैक्सी, जोधपुर में बनेगी हाईटेक ड्रोन लैब


200 किलो तक वजन उठाएगा पैसेंजर ड्रोन

जितेश त्रिवेदी के मुताबिक, टीम ने हाल ही में एक हैवी वेट लिफ्टिंग ड्रोन तैयार किया है। यह 15 से 20 किलो तक वजन उठा सकता। इसका इस्तेमाल मेडिकल इमरजेंसी, इंडस्ट्री और प्रोडक्ट डिलीवरी जैसे कामों में होगा।



सितंबर या अक्टूबर से टीम पैसेंजर ड्रोन पर काम शुरू करेगी। इसकी क्षमता 150 से 200 किलोग्राम तक होगी, यानी यह ड्रोन इंसानों को हवा में लेकर उड़ सकेगी, बिल्कुल एयर टैक्सी की तरह। डिजाइन पहले ही तैयार हो चुकी है। अगले दो महीनों में जमीनी काम शुरू होगा। करीब 6 महीने में यह ड्रोन बनकर तैयार हो जाएगा।



बादलों में छिपने वाले ड्रोन पर भी चल रहा काम

राजस्थान की कंपनी एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी के साथ-साथ हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन पर भी काम कर रही। ये ड्रोन बहुत ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ सकते। इनकी रेंज भी बहुत ज्यादा होगी। ये इतने ऊंचे उड़ेंगे कि बादलों में छिपे रहेंगे और नीचे से दिखाई नहीं देंगे।



अभी सामान्य ड्रोन की रेंज सिर्फ 5 किलोमीटर तक होती है, लेकिन टीम अब 500 किलोमीटर रेंज और 1500 मीटर ऊंचाई तक उड़ने वाले ड्रोन पर काम कर रही है।



जोधपुर में तैयार हो रही देश की पहली एआई ड्रोन लैबोरेट्री

जोधपुर में देश की पहली एआई ड्रोन लैबोरेट्री तैयार हो रही। यहां युवाओं को ड्रोन डिजाइन और डेवलपमेंट सिखाया जाएगा। कंपनी ने एक एआई टूल भी बनाया है, जो घर बैठे ही लोगों को ड्रोन बनाना सिखाएगा।



इस टूल को ड्रोन कैलकुलेटर कहा जाता। यूजर वेबसाइट पर जाकर ड्रोन का प्रकार, मोटर और प्रोपेलर जैसे विकल्प चुन सकता है। जानकारी भरते ही एआई टूल तुरंत बता देगा कि ड्रोन में कौन-कौन से पार्ट्स लगेंगे और यह उड़ पाएगा या नहीं।



इसी वेबसाइट पर दुनिया भर के 1000 से ज्यादा ड्रोन्स का लाइव डेटा भी मौजूद है। यहां कोई भी यूजर मुफ्त में इनकी डिजाइन और तकनीक की जानकारी ले सकता है।



छात्रों और शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

पैसेंजर ड्रोन प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के अलग-अलग स्कूल-कॉलेज में छात्रों को ड्रोन बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम भी चलाया जा रहा है। इससे टीचर और प्रोफेसर खुद ड्रोन तकनीक सीखकर आगे बच्चों को सिखा सकेंगे।



FAQ

  1. राजस्थान में पैसेंजर ड्रोन कहां बनेगा?
    यह जोधपुर में तैयार होगा, जहां एक हाईटैक लैब और मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार हो रहा है। करीब 6 महीने में यह ड्रोन बनकर तैयार होगा।
  2. पैसेंजर ड्रोन तैयार करने का प्रोजेक्ट कब शुरू हुआ था?
    इसकी शुरुआत फरवरी 2026 में राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान राज्य सरकार के साथ हुए एमओयू से हुई। पैसेंजर ड्रोन पर काम सितंबर-अक्टूबर 2026 से शुरू होगा।
  3. छात्रों को कैसे ड्रोन बनाने की ट्रेनिंग मिलेगी?
    राजस्थान के स्कूल-कॉलेज के छात्रों को ड्रोन बनाने और फ्लाइंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके लिए एक एआई-बेस्ड मॉड्यूल भी तैयार किया गया है।

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