राजस्थान वन विभाग को 31 अक्टूबर तक मिलेगा नया मुखिया या चलेगा अतिरिक्त प्रभार? चयन समिति की दूसरी बैठक में भी फैसला नहीं
राजस्थान के वन विभाग का अगला मुखिया कौन होगा, इस पर सरकार अब तक फैसला नहीं कर पाई है। मौजूदा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF-HoFF) अरिजीत बनर्जी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लेकिन उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए 27 अक्टूबर को हुई समिति की बैठक भी बिना किसी अंतिम निर्णय के समाप्त हो गई।
इससे पहले 24 सितंबर को प्रस्तावित बैठक कार्मिक विभाग ने अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए स्थगित कर दी थी। अब दूसरी बार भी चयन प्रक्रिया पूरी नहीं होने से वन विभाग के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति का मामला उलझ गया है। जानकारी के अनुसार, चयन समिति ने एक वरिष्ठ दावेदार के खिलाफ शिकायतों से संबंधित अतिरिक्त तथ्य मांगे हैं। विभाग से जवाब मिलने के बाद ही आगे निर्णय लिया जाएगा।
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मौजूदा वन बल प्रमुख की सेवानिवृत्ति की तारीख पहले से तय थी, तो सरकार उत्तराधिकारी का चयन समय रहते क्यों नहीं कर पाई? अगर 31 अक्टूबर तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ तो विभाग की कमान किसे सौंपी जाएगी? क्या किसी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार मिलेगा या मौजूदा प्रमुख को सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव आगे बढ़ेगा?
24 सितंबर को बैठक टली, 28 अक्टूबर को भी नहीं निकला नतीजा
नए वन बल प्रमुख के चयन की प्रक्रिया सितंबर से चल रही है। इसके लिए पहले 24 सितंबर को समिति की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन कार्मिक विभाग ने अपरिहार्य कारण बताते हुए इसे स्थगित कर दिया। इसके बाद 28 अक्टूबर को दोबारा बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ भारतीय वन सेवा अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया, लेकिन किसी एक नाम की अनुशंसा पर अंतिम फैसला नहीं हो सका।
चयन समिति ने एक प्रमुख दावेदार से संबंधित शिकायतों की पड़ताल के लिए वन विभाग से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। अब अगली बैठक अरिजीत बनर्जी के सेवानिवृत्त होने के बाद होने की संभावना जताई जा रही है।
तीन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में
वन बल प्रमुख के पद के लिए तीन वरिष्ठ भारतीय वन सेवा अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। इनमें पवन कुमार उपाध्याय, शिखा मेहरा और अनुराग भारद्वाज शामिल हैं। वन विभाग की आधिकारिक निर्देशिका के अनुसार, पवन कुमार उपाध्याय प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन) हैं। शिखा मेहरा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) और अनुराग भारद्वाज प्रधान मुख्य वन संरक्षक (आईटी) के पद पर दर्ज हैं।
इन अधिकारियों में से किसके नाम पर अंतिम मुहर लगेगी, यह चयन समिति की अनुशंसा और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
पीके उपाध्याय के खिलाफ शिकायत बनी चयन प्रक्रिया में मुद्दा
नए वन बल प्रमुख के चयन से पहले वरिष्ठ अधिकारी पवन कुमार उपाध्याय के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में परिवाद दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह परिवाद अलवर जिले की राजगढ़ वन रेंज में वन समितियों के माध्यम से कराए गए कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।
शिकायत में लगभग 17 से 21 करोड़ रुपए की अनियमितताओं और पूर्व में हुई विभागीय जांच की सिफारिशों पर कार्रवाई में देरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच अधिकारी राजीव चतुर्वेदी ने 7 फरवरी 2025 को रिपोर्ट देकर मामले को ACB के पास भेजने की सिफारिश की थी। शिकायतकर्ता तपेश्वर सिंह भाटी ने मुख्य सचिव को प्रतिवेदन देकर मांग की कि मामले के तथ्यों की जांच किए बिना उपाध्याय की नियुक्ति या उन्हें अंतरिम प्रभार देने का निर्णय नहीं किया जाए।
बनर्जी के खिलाफ कथित आरोपपत्र और सेवा विस्तार की चर्चा
मौजूदा वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। उनके खिलाफ दो मामलों में विभागीय आरोपपत्र तैयार कर कार्मिक विभाग को भेजे गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में यह प्रक्रिया रोक दी गई। इसी बीच बनर्जी को दो महीने का सेवा विस्तार दिए जाने की संभावना की चर्चा भी सामने आई।
वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने क्या कहा?
वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने चयन समिति की अगली बैठक के संबंध में कहा कि इसकी जानकारी कार्मिक विभाग दे सकता है, क्योंकि बैठक उसी विभाग की ओर से बुलाई जाती है। वहीं, मुख्य सचिव कार्यालय ने कहा था कि वन बल प्रमुख के चयन की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा और स्थापित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
लेकिन 28 अक्टूबर तक नए वन बल प्रमुख के नाम की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में 31 अक्टूबर तक नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी या कोई अंतरिम व्यवस्था करनी पड़ेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
वन बल प्रमुख का पद इतना महत्वपूर्ण क्यों?
वन बल प्रमुख राज्य में भारतीय वन सेवा का सर्वोच्च विभागीय पद है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी वन प्रशासन, वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्थान में सरिस्का और रणथंभौर जैसे टाइगर रिजर्व, वन भूमि संरक्षण, पौधरोपण कार्यक्रम और वन विकास परियोजनाएं विभाग की जिम्मेदारी में आती हैं।
ऐसे में शीर्ष पद पर नियुक्ति में देरी का मामला केवल वरिष्ठ अधिकारियों की पदस्थापना तक सीमित नहीं है। यह विभाग के प्रशासनिक नेतृत्व और फैसले लेने की निरंतरता से भी जुड़ा है।
31 अक्टूबर के बाद क्या होगा?
मौजूदा वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी की निर्धारित सेवानिवृत्ति 31 अक्टूबर को है। इसके बाद विभाग के शीर्ष पद की जिम्मेदारी किस अधिकारी को दी जाएगी, इसका आदेश अभी सामने नहीं आया है। अब सरकार के सामने नए वन बल प्रमुख की नियुक्ति और तब तक आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था तय करने का सवाल है। सेवा विस्तार की चर्चा भी है, लेकिन इसे स्वीकृत फैसला नहीं माना जा सकता।
फिलहाल स्थिति यह है कि सेवानिवृत्ति की तारीख तय है, दावेदारों के नाम सामने हैं, लेकिन नए वन बल प्रमुख के नाम पर फैसला बाकी है।