वन मंत्री के घर में बड़ा पौधरोपण घोटाला, अफसरों ने हरियाली बढ़ाने के नाम पर 18 करोड़ का कर दिया खेल
News In Short
- वन मंत्री संजय शर्मा के गृह जिले अलवर में सामने आया पौधरोपण घोटाला।
- हाईलेवल जांच में हरियाली बढ़ाने के नाम पर 18 करोड़ के घोटाले का खुलासा।
- वन अधिकारियों ने घोटाले के लिए बना दी फर्जी वन समितियां।
- जहां पौधरोपण संभव नहीं था, वहां भी कागजों में दिखा दिया पौधरोपण का काम।
- दो डीएफओ समेत कई अफसरों की भूमिका संदिग्ध, सीबीआई जांच की सिफारिश।
News In Detail
Alwar: राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा के गृह जिले अलवर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने उनके वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरियाली बढ़ाने के नाम पर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाने का खेल कई साल से चल रहा था।
वन मुख्यालय की एक हाईलेवल जांच में 18 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यह पूरा मामला सूचना के अधिकार (RTI) के तहत 300 पन्नों की मिली जांच रिपोर्ट के जरिए सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने फर्जी समितियां बनाकर और सरकारी नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये के सेल्फ चेक काटे।
फर्जी समितियों और सेल्फ चेक का मायाजाल
जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वर्ष 2015-16 से लेकर 2024-25 के बीच वन विभाग के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर फर्जी ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियों का गठन किया। इन समितियों के नाम पर सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया।
जांच के अनुसार केवल समितियों के माध्यम से ही 15 करोड़ 54 लाख 78 हजार 82 रुपये की भारी-भरकम राशि का गबन किया गया। राजगढ़ क्षेत्र में पौधरोपण और मिट्टी के कार्यों के लिए बनाई गई 7 समितियां पूरी तरह अवैध पाई गईं।
पहाड़ों पर कागजी पौधरोपण
घोटाले का एक और पहलू बेहद हैरान करने वाला है। वन मंडल अलवर की राजगढ़ रेंज में वर्ष 2023-24 के दौरान मिट्टी और पौधरोपण के कार्यों के मूल्यांकन में पाया गया कि जिन 11 स्थानों पर कार्य दिखाया गया, वे पौधरोपण के लिए उपयुक्त ही नहीं थे। यानी यह क्षेत्र पहाड़ी था।
कई इलाकों में ढलान 20 प्रतिशत से अधिक थी, जहां नियमानुसार पौधरोपण संभव ही नहीं था, फिर भी वहां कागजों पर काम दिखाकर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए।
कुल 642 हेक्टेयर क्षेत्र में से केवल 249 हेक्टेयर में ही काम हुआ, जबकि बाकी का बजट डकार लिया गया। इससे सरकारी कोष को सीधे तौर पर 2 करोड़ 3 लाख 46 हजार रुपये की वित्तीय हानि हुई है।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्य वन संरक्षक राजीव चतुर्वेदी के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने इस घोटाले में कई बड़े नामों को दोषी पाया है। रिपोर्ट में तत्कालीन अलवर डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, डीएफओ राजेंद्र हुड्डा, राजगढ़ के तत्कालीन क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक मीणा और प्रभारी वनपालों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है।
CBI जांच की सिफारिश
जांच समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिफारिश की है कि दोषी लोकसेवकों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए। गबन की गई करोड़ों की राशि की वसूली की जाए। इस मामले की गहराई और नेटवर्क को देखते हुए इसकी सीबीआई जांच कराई जाए।
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