खाकी पर दाग, बेटों की दबंगई और टूटते भरोसे की दास्तान, दे गई मरुधरा को बड़ा संदेश
यह हफ्ता राजस्थान की सियासत और नौकरशाही के लिए किसी रोलर कोस्टर से कम नहीं रहा। कहीं खाकी पर दाग लगे हैं तो कहीं सरकार में बैठे लोगों को अपने ही बेटों को सुधारने की नसीहतें दी जा रही हैं। आइए, सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं प्रदेश की बड़ी खबरों को।
उदयपुर आईजी पर लगे दाग
इस सप्ताह उदयपुर से आई खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव पर एक आदिवासी की जमीन की जबरन रजिस्ट्री करने के गंभीर आरोप लगे। चित्तौड़गढ़ के आदिवासी गोपाललाल भील ने आरोप लगाया है कि उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव, आरपीएस राजेश यादव और सुखेर थानाधिकारी रविंद्र चारण ने मिलकर उसकी करोड़ों की जमीन की जबरन रजिस्ट्री करा दी। कोर्ट के आदेश पर इन पुलिस अधिकारियों के मामला दर्ज हुआ है। इसकी जांच डीएसपी नीतू राठौड़ को सौंपी गई है।
दरअसल, यह मामला खाकी की साख पर काला धब्बा है। अगर आईजी स्तर के अधिकारी पर ऐसे आरोप लगते हैं तो आम आदमी न्याय के लिए किसके पास जाएगा। पुलिस का काम जमीन की दलाली करना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करना है। इस मामले की निष्पक्ष जांच नजीर बननी चाहिए।
गहलोत की बेटों को सत्ता से दूर रखने की सलाह
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी जादूगरी और सियासी तंजों के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने सत्ता पक्ष के मंत्रियों और विधायकों को ऐसी सलाह दी है, जो राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। गहलोत ने साफ कह डाला कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों को अपने बेटों को सरकार से दूर रखना चाहिए। बेटा कब बिगड़ जाएगा और पता भी नहीं चलेगा कि उसने आपको कहां बदनाम करवा दिया।
गहलोत की यह नसीहत भीम विधायक हरिसिंह रावत के बेटे रणजीत सिंह रावत पर बुलडोजर चलाकर तीन गरीब परिवारों के मकान ढहाने के लगे आरोपों के बाद आई। इससे कुछ दिन पहले मांडलगढ़ के भाजपा विधायक गोपाल खंडेलवाल के बेटे मुकेश पर असम में टेंडर दिलाने के नाम पर 4.81 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप लगे।
राजनीति में पुत्र मोह कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब सत्ता की हनक बेटों के सिर चढ़कर बोलने लगे तो वह सरकार की छवि खराब करती है। गहलोत की यह नसीहत केवल भाजपा के लिए नहीं, बल्कि हर उस राजनेता के लिए है जो अपने परिजनों को समानांतर सत्ता चलाने की छूट देता है। संस्कार घर की चारदीवारी तक ठीक हैं, सचिवालय में नहीं। हालांकि, बाद में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत पर पलटवार भी किया।
संसद में गूंजा प्रतापगढ़ कलेक्टर का अहंकार
उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत इस सप्ताह काफी आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने लोकसभा में महिला आईएएस अधिकारी अंजलि राजौरिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रावत का आरोप है कि प्रतापगढ़ कलेक्टर अंजलि अपने अहंकार के कारण विकास कार्यों को रोक रही हैं। डीएमएफ बैठक में मंजूर किए गए 54 कामों में से कलेक्टर ने केवल 3 को हरी झंडी दी है।
सांसद ने मांग की है कि डीएमएफ का अध्यक्ष सांसद को बनाया जाए ताकि काम न रुकें। लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि और नौकरशाही के बीच सामंजस्य होना अनिवार्य है। यदि एक सांसद को अपनी ही सरकार के अधिकारी के खिलाफ संसद में बोलना पड़ रहा है तो यह जिला प्रशासन में संवाद की कमी को दर्शाता है।
मानगढ़ धाम को लेकर उम्मीदों पर फिरा पानी
इस हफ्ते मानगढ़ धाम को लेकर आदिवासी समुदाय की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आया। राजस्थान में आदिवासियों के लिए मानगढ़ धाम किसी तीर्थ से कम नहीं है। 1913 के ऐतिहासिक नरसंहार की यादें आज भी यहां की मिट्टी में दबी हैं। लेकिन केंद्र सरकार के ताजा जवाब ने आदिवासियों को निराश किया है।
लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। यह तब है, जब 2022 में प्रधानमंत्री मोदी खुद वहां गए थे और 1500 आदिवासियों के बलिदान को याद किया था।
मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देना केवल एक तकनीकी बिंदु नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के बलिदान को राष्ट्र की मुख्यधारा में सम्मान देने जैसा है। सरकार को अपनी इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रतीकों की राजनीति से आगे बढ़कर सम्मान की राजनीति करने का यह सही समय है।
अंजाम पर पहुंची फर्जी डॉक्टरों की जांच
एसओजी ने इस हफ्ते एक और बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। मामला फर्जी डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन का है। एसओजी ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा और 17 अन्य लोगों को पकड़ा है। आरोप है कि बिना मेडिकल पढ़ाई और बिना इंटर्नशिप के 98 लोगों को डॉक्टर बना दिया गया। फर्जी ई-मेल और जाली दस्तावेजों के आधार पर इनका रजिस्ट्रेशन हुआ।
बिना डिग्री के डॉक्टर अगर अस्पताल में बैठेंगे, तो मरीजों की जान के साथ क्या होगा। राजस्थान मेडिकल काउंसिल जैसी संस्थाओं में बैठा यह भ्रष्टाचार का दीमक पूरे समाज को खोखला कर रहा है। एसओजी को इस मामले की जड़ तक जाना चाहिए।
अब पान मसाला बना सलमान की मुसीबत
बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान के लिए राजस्थान फिर मुश्किलों का सबब बन रहा है। इस बार मामला काला हिरण नहीं, बल्कि पान मसाला है। पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन मामले में जयपुर के उपभोक्ता आयोग ने सलमान खान और कंपनी के निदेशकों के खिलाफ तीसरी बार जमानती वारंट जारी किया है। 6 अप्रैल तक पेश नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट की चेतावनी दी गई है।
सेलिब्रिटीज की जिम्मेदारी केवल पैसे कमाना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि वे किस उत्पाद का प्रचार कर रहे हैं। भ्रामक विज्ञापनों पर अदालत की यह सख्ती स्वागत योग्य है। उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा के लिए 'सितारों' को भी कानून के कटघरे में आना ही होगा।
अगले सप्ताह फिर मिलेंगे नई चिट्ठी के साथ।
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