राजस्थान में सरकारी नौकरी का बदला ट्रेंड, इंजीनियर बने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

Jyoti Mahender Bhardwaj | Sept 28, 2026, 12:55 IST
इंजीनियर बने चतुर्थ कर्मचारी
राजस्थान में सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं की पसंद बदल रही है। सीकर में इंजीनियर और उच्च शिक्षित युवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बने, वहीं बांसवाड़ा में कई युवाओं ने पुलिस छोड़कर पटवारी की नौकरी चुनी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सीकर में 710 नवनियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में 267 BEd और 23 BTech डिग्रीधारी हैं।
  • 10 कर्मचारियों के पास NET की योग्यता भी है।
  • न्यूनतम योग्यता 10वीं होने के बावजूद सीकर में 10वीं पास वाला कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं हुआ।
  • बांसवाड़ा में करीब 35 युवाओं ने पुलिस की नौकरी छोड़कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और पटवारी की नौकरी ज्वॉइन की।
  • नौकरी चुनने में स्थिरता के साथ काम का दबाव और निजी जीवन का संतुलन भी अहम होता जा रहा है।

सीकर। राजस्थान में सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ उच्च शिक्षित युवा अपनी योग्यता से नीचे के पद पर भी सरकारी नौकरी स्वीकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ युवा सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी उसे छोड़कर ऐसी नौकरी चुन रहे हैं, जिसमें उन्हें काम के साथ परिवार और निजी जिंदगी के लिए ज्यादा समय मिल सके।



सीकर में हाल ही में हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती के आंकड़ों ने इस बदलाव की तस्वीर सामने रखी है। शिक्षा विभाग में नियुक्त हुए 710 कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जिनके पास स्नातक, स्नातकोत्तर, BEd और BTech जैसी डिग्रियां हैं।



सीकर में 23 BTech और 267 BEd डिग्रीधारी

सीकर जिले में शिक्षा विभाग के नवनियुक्त 710 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में 267 BEd और 23 BTech डिग्रीधारी हैं। इसके अलावा 10 कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके पास NET की योग्यता है और वे कॉलेज व्याख्याता पद के लिए भी पात्रता रखते हैं।



नियुक्त कर्मचारियों में BSTC, स्नातकोत्तर, D.El.Ed, LLB और LLM जैसी योग्यताएं रखने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। यानी कई ऐसे युवा हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता उस पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता से काफी ज्यादा है।



10वीं पास वाला एक भी नियुक्त नहीं

इस भर्ती में एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया कि शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता 10वीं पास थी, लेकिन सीकर में नियुक्त कर्मचारियों में 10वीं पास योग्यता वाला कोई अभ्यर्थी नहीं मिला।



आंकड़ों के मुताबिक 48 कर्मचारी 12वीं पास, 167 BA, 115 BA-MA और 236 BSc योग्यताधारी हैं। इनके अलावा एक-एक कर्मचारी LLB और LLM योग्यताधारी भी है। 23 BTech डिग्रीधारियों में सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से जुड़े युवा भी शामिल हैं।



ओवरएज होने से पहले नौकरी ज्वॉइन करने की मजबूरी

नौकरी पाने वाले कुछ युवाओं के सामने सरकारी नौकरी हासिल करने के साथ-साथ उम्र निकलने का दबाव भी है। एक नियुक्त युवक ने बताया कि ओवरएज होने से पहले नौकरी ज्वॉइन कर ली और इसके साथ दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी जा रही है।



इससे यह संकेत मिलता है कि कई युवा फिलहाल सरकारी नौकरी को सुरक्षा के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं और बेहतर पद हासिल करने की तैयारी भी जारी रखना चाहते हैं।



दूसरी तरफ पुलिस की नौकरी छोड़कर पटवारी बने युवा

सरकारी नौकरी के ट्रेंड की दूसरी तस्वीर बांसवाड़ा से सामने आई है। यहां करीब 35 युवाओं ने पुलिस विभाग की नौकरी छोड़कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और पटवारी की नौकरी ज्वॉइन की।



इनमें कुछ ऐसे युवा भी शामिल हैं, जिन्होंने पुलिस विभाग में नौकरी शुरू करने के कुछ ही समय बाद इस्तीफा दे दिया। इनमें से कुछ ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी चुनी, जबकि कुछ पटवारी बन गए।



24 घंटे की ड्यूटी बनी बड़ी वजह

पुलिस की नौकरी छोड़ने वाले युवाओं के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक 24 घंटे की ड्यूटी, काम का दबाव, लगातार अलर्ट रहने की जिम्मेदारी और परिवार के लिए समय नहीं मिलना प्रमुख कारणों में शामिल हैं।



पुलिस सेवा में त्योहारों और सामूहिक अवकाश के दौरान भी ड्यूटी करनी पड़ती है। सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी और जवाबदेही भी लगातार बनी रहती है। कुछ युवाओं को लगा कि दूसरी सरकारी नौकरी में काम के घंटे अपेक्षाकृत बेहतर होंगे और निजी जीवन के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा।



नौकरी के साथ अब सुकून भी प्राथमिकता

बांसवाड़ा के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप राठौड़ के अनुसार वर्तमान पीढ़ी के लिए सिर्फ कमाई ही प्राथमिकता नहीं रह गई है। काम का दबाव, समय की अनिश्चितता और निजी जिंदगी में संतुलन भी नौकरी चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



पुलिस जैसी सेवाओं में ड्यूटी के समय की निश्चितता कम होने और जिम्मेदारियां अधिक होने के कारण कुछ युवा इसे अपनी जीवनशैली के अनुकूल नहीं मान रहे हैं।



दो तस्वीरें, एक ही सवाल

राजस्थान में सामने आए ये दोनों मामले सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं की अलग-अलग तस्वीर दिखाते हैं।



एक तरफ इंजीनियर और उच्च शिक्षित युवा चतुर्थ श्रेणी की नौकरी स्वीकार कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें स्थिर सरकारी रोजगार चाहिए। दूसरी तरफ कुछ युवा पुलिस जैसी जिम्मेदारी वाली नौकरी छोड़कर पटवारी या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बन रहे हैं, क्योंकि वे काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन चाहते हैं।



यानी सरकारी नौकरी में अब केवल पद और वेतन ही नौकरी चुनने का आधार नहीं रह गए हैं। नौकरी की स्थिरता, काम का दबाव, समय और परिवार के लिए उपलब्धता जैसे पहलू भी युवाओं के फैसले में भूमिका निभा रहे हैं।



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