राख से पैदा हुए फर्जी दस्तावेज, सोलर कंपनी को 30 करोड़ में बेच दी 1491 बीघा सरकारी जमीन

Mukesh Sharma | May 01, 2026, 13:14 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक सरकारी जमीन फर्जी दस्तावेज तैयार कर सोलर कंपनी को बेच दी। गंभीर बात यह हुई कि यह जमीन आज भी रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है।

News In Short

  • जैसलमेर जिले में सरकारी जमीन को सोलर कंपनी को बेचने का मामला आया सामने।
  • नाचना क्षेत्र में नौ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन को कराया अपने नाम।
  • बाद में इस जमीन को 30 करोड़ रुपए में सोलर कंपनी को कर दिया सौदा।
  • 2021 में नाचना उपनिवेशन कार्यालय में आग लगने से रिकॉर्ड हो गया था खाक।
  • इससे पहले भी नाचना क्षेत्र में हजारों बीघा जमीन के बंदरबांट के मामले आए सामने।

News In Detail

Jaisalmer: राजस्थान में सरहदी जिले जैसलमेर के नाचना क्षेत्र में भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सरकार की नींद उड़ा दी है। इस क्षेत्र में 9 किसानों ने सरकारी जमीन को अपना बताकर एक निजी कंपनी को करोड़ों रुपये में बेच दिया।



​यह मामला 1491 बीघा सरकारी जमीन का है। इसकी बाजार में कीमत 30 करोड़ रुपये आंकी गई है। अधिकारियों की मिलिभगत से फर्जी दस्तावेजों के दम पर इसे खुर्द-बुर्द कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण ने उपनिवेशन विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।



​आग का 'फायदा' और जालसाजी की शुरुआत

​इस घोटाले की जड़ें 5 साल पुरानी एक घटना से जुड़ी हैं। अप्रैल 2021 में नाचना उपनिवेशन कार्यालय में भीषण आग लगी थी। इसमें जमीन से जुड़े दशकों पुराने सरकारी रिकॉर्ड जलकर खाक हो गए थे। उस वक्त इसे महज एक हादसा माना गया था, लेकिन अब सामने आ रहा है कि इस हादसे का इस्तेमाल भू-माफियाओं ने एक सोची-समझी साजिश के तहत किया।



​पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का फायदा उठाते हुए नाचना के पांचे का तला इलाके के 9 किसानों ने साठगांठ कर फर्जी खातेदारी और गिरदावरी तैयार करवा ली। ताज्जुब की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड (जमाबंदी) में आज भी यह जमीन अराजीराज यानी सरकारी दर्ज है, लेकिन सिस्टम की मिलीभगत से कागजों पर इसे निजी संपत्ति घोषित कर दिया गया।



​30 करोड़ का सौदा

इन 9 किसानों ने मिलकर 1491 बीघा सरकारी जमीन का सौदा एक निजी कंपनी के साथ किया। यह सौदा 2 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से तय हुआ, जिसकी कुल राशि लगभग 30 करोड़ रुपये बैठती है। फर्जीवाड़े को पुख्ता करने के लिए जालसाजों ने अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर किए और रिकॉर्ड में इस सफाई से हेरफेर किया कि बाहर से सब कुछ सामान्य दिखे। ​इस खेल में कसम खान, गुलशेर खान, अलीशेर, हनीफ, अला बसाया, ताज मोहम्मद, फैज मोहम्मद, नबी खान और हसन खान के नाम सामने आए हैं।



सरकारी दफ्तर में है ही नहीं रिकॉर्ड बुक

​घोटाले की परतें तब खुलीं, जब उपनिवेशन विभाग ने आंतरिक जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि जिस बुक नंबर 332 के आधार पर खातेदारी जारी करने का दावा किया गया है, वह सरकारी रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही नहीं है। इतना ही नहीं, जालसाजों ने जनवरी 2026 की जो गिरदावरी पेश की है, उसमें सीरियल नंबर 8648 अंकित है।



हकीकत यह है कि पांचे का तला की मूल गिरदावरी पुस्तक (P-35) में अब तक केवल 1100 किसानों की ही एंट्री हुई है। 8648 के आंकड़े तक पहुंचने में विभाग को कम से कम 30-40 साल और लगेंगे। इससे साफ जाहिर होता है कि ये दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत हैं।



'साजिश' या 'हादसा'?

​नाचना में जमीन घोटाला कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी हजारों बीघा जमीन के बंदरबांट के मामले सामने आए हैं, लेकिन हर बार जांच की आंच असली गुनहगारों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती है। 2021 की आगजनी के बाद पुराने रिकॉर्ड न होना अब जालसाजों के लिए एक सुरक्षित ढाल बन गया है।



रिकॉर्ड को डिजिटल बनाया जाए

जैसलमेर का यह 30 करोड़ का भूमि घोटाला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक बड़ा स्मारक है। अगर समय रहते सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड को डिजिटल और सुरक्षित नहीं किया गया, तो सीमावर्ती इलाकों में अराजीराज जमीनें इसी तरह कागजों पर बिकती रहेंगी।



​तहसीलदार का पक्ष

नाचना उपनिवेशन के तहसीलदार रतन भवानी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला फर्जीवाड़े का लग रहा है। म्यूटेशन रजिस्टर में जमीन आज भी सरकारी दर्ज है। फर्जी दस्तावेजों में जो सीरियल नंबर और बुक नंबर इस्तेमाल किए गए हैं, वे हमारे रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



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