राजस्थान के सरकारी स्कूलों में छुट्टियों का भी डिजिटल रिकॉर्ड, रोजाना दोपहर 1:30 बजे तक दर्ज करनी होगी उपस्थिति

Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 03, 2026, 16:07 IST
सरकारी स्कूलों पर बढ़ेगी ऑनलाइन निगरानी
सरकारी स्कूलों में मनमानी छुट्टियों पर लगेगी लगाम
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है। अब स्कूलों में घोषित छुट्टियों का पूरा विवरण शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज करना होगा। इसके लिए छुट्टी की तारीख के साथ उसका कारण भी ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। नई व्यवस्था से अधिकारियों को स्कूलों में अवकाश की स्थिति की ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी और नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर निगरानी बढ़ेगी।

शाला दर्पण पोर्टल पर शुरू हुआ हॉलिडे एंट्री मॉड्यूल

शिक्षा विभाग ने स्कूलों में छुट्टियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के लिए शाला दर्पण पोर्टल पर नया हॉलिडे एंट्री मॉड्यूल शुरू किया है। इसके तहत संस्था प्रधानों को स्कूल में घोषित अवकाश की तारीख और उसके कारण की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।



इस डिजिटल व्यवस्था से उच्चाधिकारी किसी भी सरकारी स्कूल में घोषित छुट्टी का रिकॉर्ड ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे बिना स्पष्ट कारण छुट्टी रखने और नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की पहचान करना आसान होगा।



दोपहर 1:30 बजे तक अपलोड करनी होगी उपस्थिति

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है। अब रोजाना दोपहर 1:30 बजे तक विद्यार्थियों और स्टाफ की उपस्थिति का पूरा डेटा शाला दर्पण पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।



इस व्यवस्था से स्कूलों में वास्तविक उपस्थिति और पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जा सकेगा। साथ ही लगातार अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों की स्थिति का भी पता लगाया जा सकेगा।



छुट्टियों का पूरा रिकॉर्ड रहेगा ऑनलाइन

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी स्कूलों में घोषित छुट्टियों का रिकॉर्ड एक ही पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। अधिकारी बिना स्कूल पहुंचे अवकाश की तारीख और उसके कारण की जांच कर सकेंगे।



डिजिटल रिकॉर्ड से मनमाने तरीके से छुट्टी घोषित करने, उपस्थिति में गड़बड़ी करने और कागजी रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका कम हो सकती है। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति का विश्लेषण करके लगातार स्कूल नहीं आने वाले बच्चों पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।



संस्था प्रधानों और स्कूल स्टाफ का बढ़ेगा काम

नई व्यवस्था से संस्था प्रधानों और स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी बढ़ेगी। उन्हें नियमित रूप से ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना होगा और निर्धारित समय तक उपस्थिति दर्ज करनी होगी।



ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या, बिजली बाधित होने या पोर्टल में तकनीकी दिक्कत आने पर समय सीमा में डेटा अपलोड करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में तकनीकी समस्याओं के समाधान और वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत भी रहेगी।



यह खबर क्यों जरूरी है

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में डिजिटल निगरानी बढ़ने से छुट्टियों और उपस्थिति के रिकॉर्ड में पारदर्शिता आ सकती है। इससे स्कूलों की जवाबदेही तय करने और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा तभी मिलेगा जब डिजिटल रिकॉर्ड के साथ स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाए।



आगे क्या?

शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था के तहत स्कूलों को छुट्टियों और उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट करना होगा। अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच से स्कूलों में नियमों के पालन और विद्यार्थियों की उपस्थिति पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। तकनीकी समस्याओं के समाधान और शिक्षकों पर डेटा एंट्री का अतिरिक्त बोझ कम करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।



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