विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा में बड़ी कटौती, जनआंदोलन का असर या प्रशासनिक प्रक्रिया?
News In Short
- सरकार ने विधायक रविंद्र सिंह भाटी की अतिरिक्त सुरक्षा वापस ली।
- भाटी को धमकी के बाद तीन अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराए थे।
- अब भाटी की सुरक्षा में केवल एक सुरक्षा कर्मी ही तैनात रहेगा।
- भाटी सरकार के खिलाफ ओरण बचाओ पदयात्रा को लेकर चर्चा में थे।
- ओरण बचाओ पदयात्रा को सीएम हाउस जाने से रोक दिया था।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की राजनीति के केंद्र बिंदु बन चुके शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी फिर चर्चाओं में हैं। हालांकि, इस बार सुर्खियां उनके किसी नए आंदोलन की वजह से नहीं, बल्कि सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा में की गई अचानक कटौती के कारण हैं। बाड़मेर जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी एक आदेश के जरिए निर्दलीय विधायक भाटी की सुरक्षा घटा दी गई है।
4 के बजाय अब केवल 1 पीएसओ
बाड़मेर के एसपी चूनाराम जाट द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के अनुसार विधायक भाटी को दी गई अतिरिक्त सुरक्षा तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है। आदेश में कहा है कि अब उनके पास 4 सुरक्षाकर्मियों के बजाय केवल 1 पीएसओ (Personal Security Officer) तैनात रहेगा।
प्रशासन ने इस कार्रवाई के पीछे इंटेलिजेंस इनपुट और राजस्थान सरकार के उन पुराने निर्देशों का हवाला दिया है, जिसके तहत प्रत्येक सांसद और विधायक को केवल एक-एक पीएसओ ही उपलब्ध कराया जाना तय है।
पूर्व में मिली धमकियों और सुरक्षा इनपुट के आधार पर भाटी को 1 के अतिरिक्त 3 अन्य सुरक्षाकर्मी विशेष तौर पर दिए गए थे। इन्हें अब वापस ले लिया गया है।
आंदोलन से जुड़ रहे तार?
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को भाटी के हालिया ओरण बचाओ आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है। रविंद्र सिंह भाटी पिछले कई दिनों से जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र में ओरण भूमि संरक्षण के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे।
एक दिन पहले गुरुवार को भाटी अपनी ओरण यात्रा लेकर राजधानी जयपुर पहुंचे थे, जहां उन्हें सीएम आवास तक जाने से रोक दिया गया था। उन्होंने सरकार से ओरण संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाने और इन जमीनों को निजी कंपनियों के अधिग्रहण से बचाने की पुरजोर मांग की थी। भाटी का यह आक्रामक रुख प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ था।
खतरे के बीच कटौती
सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा ऑडिट को लेकर उठ रहा है। कुछ समय पहले ही इंटेलिजेंस रिपोर्ट में भाटी की जान को गंभीर खतरा बताया गया था। सवाल यह है कि क्या अचानक भाटी पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है? या फिर यह निर्णय केवल तकनीकी आधार पर लिया गया है?
इसी 21 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन प्रस्तावित है, जो बाड़मेर जिले का ही हिस्सा है। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम से ठीक पहले जिले के सबसे लोकप्रिय जन-प्रतिनिधि की सुरक्षा कम करना रणनीतिक रूप से भी सवाल खड़े करता है।
समर्थकों का आक्रोश और प्रशासनिक तर्क
सुरक्षा कटौती की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर भाटी के समर्थकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समर्थकों का तर्क है कि भाटी प्रदेशभर में लगातार दौरे करते हैं और उनकी जनसभाओं में भारी भीड़ उमड़ती है। खतरे को देखते हुए केवल एक गनमैन के भरोसे उन्हें छोड़ना उनके जीवन को जोखिम में डालना है।
दूसरी ओर एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। नियमों के तहत सभी विधायकों के लिए एक समान नीति लागू की जा रही है। सुरक्षा का आवंटन समय-समय पर खतरे के आकलन के आधार पर बदला जाता है।
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